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सिगरेट न पीने वाले भी क्यों हो सकते हैं लंग कैंसर के शिकार? जानें घर और बाहर की ये सबसे खतरनाक वजहें

Lung Cancer: आपने ऐसे कई मामलों के बारे में सुना होगा कि कोई शख्स सिगरेट नहीं पीता था, लेकिन फिर भी वह लंग कैंसर का शिकार हो गया. इस तरह के केस न सिर्फ डराते हैं, बल्कि वातावरण में फैली गैस और केमिकल को लेकर भी चिंता पैदा करते हैं. इस स्टोरी में हम आपको ऐसे फैक्ट्स बताएंगे, जिन्हें जानकर आप हैरान रह जाएंगे.

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Lung Cancer Common Reason: लोग आमतौर पर सोचते हैं कि लंग कैंसर सिर्फ उन लोगों को होता है जो सिगरेट या बीड़ी पीते हैं. लेकिन असलियत कुछ और है. बहुत से लोग, जो कभी भी धूम्रपान नहीं करते, फिर भी इस बीमारी का शिकार बन जाते हैं. इसकी वजह है हमारे रोजमर्रा के जीवन में मौजूद कई ऐसे कारण, जिनका हम ध्यान नहीं रखते. यह केवल बाहरी वातावरण ही नहीं, बल्कि घर के अंदर मौजूद चीजें भी हमारे फेफड़ों के लिए खतरा बन सकती हैं. अगर हम समय रहते इन खतरों से बचाव नहीं करते हैं, तो लंग कैंसर होने का खतरा काफी बढ़ जाता है.

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लंग कैंसर के पीछे छिपी रोजमर्रा की वजहें

स्मोकिंग न करने वाले लोग भी लंग कैंसर के जोखिम से पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं. इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं, जो अक्सर नजरअंदाज हो जाते हैं. जैसे दूसरों के सिगरेट या बीड़ी के धुएं में सांस लेना यानी सेकंडहैंड स्मोक (Secondhand Smoke), लंबे समय तक फेफड़ों को नुकसान पहुंचा सकता है. घर में मौजूद रेडॉन गैस (Radon Gas), जो प्राकृतिक रूप से रेडियोधर्मी (Radioactive) होती है, भी खतरा बढ़ाती है. आपके मन में सवाल होगा कि आखिर ये गैस घर में कहां से आती है? बता दें कि रेडॉन गैस जमीन के नीचे मौजूद मिट्टी और फर्श की दरारों, दीवारों के छोटे छेद, पाइप लाइन या बेसमेंट के रास्ते घर के अंदर जमा हो सकती है, खासकर बंद और कम हवादार घरों में.

बाहर की हवा भी लंग कैंसर का कारण

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इसके अलावा, शहरों में भारी ट्रैफिक और वायु प्रदूषण, गाड़ियों का धुआं, धूल-मिट्टी का लगातार संपर्क और जंगल की आग या लकड़ी जलने से निकलने वाला धुआं फेफड़ों पर बुरा असर डालता है. अगर कोई व्यक्ति ऐसे केमिकल्स जैसे एस्बेस्टस, अर्सेनिक या क्रोमियम के संपर्क में लगातार रहता है, तो भी लंग कैंसर का खतरा बढ़ सकता है. सवाल उठता है कि यह हम तक कैसे पहुंच सकते हैं?

बता दें कि पुराने घरों की मरम्मत, दूषित पानी का इस्तेमाल, पेंट-सीमेंट या निर्माण कार्य की धूल, और कुछ उद्योगों से जुड़े रोजमर्रा के कामों के दौरान लोग अनजाने में एस्बेस्टस, अर्सेनिक या क्रोमियम जैसे केमिकल्स के संपर्क में आ सकते हैं. साथ ही, परिवार में किसी सदस्य का 50 साल की उम्र से पहले लंग कैंसर का शिकार होना भी इस जोखिम को और बढ़ा देता है. इसलिए नॉन-स्मोकर्स को भी अपनी रोजमर्रा की आदतों और वातावरण पर ध्यान रखना बेहद जरूरी है.

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इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज

लंग कैंसर अक्सर धीरे-धीरे बढ़ता है और शुरुआती चरण में इसके लक्षण हल्के होते हैं. ऐसे संकेतों पर ध्यान देना जरूरी है:

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  • लगातार खांसी या खांसी में खून आना.
  • सांस लेने में तकलीफ या जल्दी थक जाना.
  • सीने में भारीपन या दर्द.
  • गले में तकलीफ या आवाज का बैठ जाना.
  • अचानक वजन कम होना आदि इसके लक्षणों में आते हैं. अगर आपको ऐसी कोई समस्या है तो डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें.

कैसे करें अपने और परिवार की सुरक्षा?

लंग कैंसर के खतरे से खुद को सुरक्षित रखने के लिए कुछ आसान उपाय अपनाएं जा सकते हैं:

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  • सिगरेट या बीड़ी के धुएं से पूरी तरह दूर रहें.
  • घर में रेडॉन गैस की जांच कराएं.
  • अगर आप केमिकल्स या धुएं वाली जगह पर काम करते हैं, तो सुरक्षा नियमों का पालन करें और सही गियर पहनें.
  • ट्रैफिक जाम या बहुत ज्यादा प्रदूषित (heavily polluted) इलाकों में जाने से बचें और वायु प्रदूषण की एडवाइजरी का पालन करें.

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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.

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First published on: Jan 19, 2026 01:26 PM

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About the Author

Azhar Naim

अज़हर नईम एक डिजिटल पत्रकार हैं. अज़हर नईम News24 Bag Convergence में सब-एडिटर के रूप में कार्यरत हैं. यहां वह मुख्य रूप से लाइफस्टाइल, हेल्थ और वायरल सेक्शन से जुड़ी खबरें लिखते हैं. उन्होंने साल 2024 में श्री वेंकटेश्वर यूनिवर्सिटी से बैचलर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (BJMC) की डिग्री हासिल की. पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान उन्होंने इंडिया न्यूज और खबरफास्ट जैसे मीडिया संस्थानों के साथ काम किया, जहां उन्हें डिजिटल न्यूज रिपोर्टिंग और कंटेंट लेखन का अनुभव मिला. इसके बाद उन्होंने एक साल से ज्यादा समय तक (2024-2026) इंडिया डॉट कॉम (Zee Media) में ट्रेनी के तौर पर काम किया और हेल्थ, लाइफस्टाइल, वायरल, ट्रेंडिंग, न्यूज और टेक्नोलॉजी समेत कई बीट्स पर डिजिटल कंटेंट तैयार किया. अपने अब तक के अनुभव में अज़हर डिजिटल मीडिया के बदलते ट्रेंड्स को समझने, SEO-फ्रेंडली कंटेंट तैयार करने और पाठकों की रुचि को ध्यान में रखते हुए उपयोगी व आकर्षक स्टोरीज लिख रहे हैं. अज़हर नईम का पत्रकारिता में अनुभव कुल अनुभव: 2 साल से ज्यादा योग्यता, डिग्री / अन्य उपलब्धियां: उन्होंने श्री वेंकटेश्वर यूनिवर्सिटी से बैचलर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (BJMC) की डिग्री हासिल की. पिछला अनुभव: अज़हर ने न्यूज 24 से पहले इंडिया न्यूज़, खबरफास्ट और इंडिया डॉट कॉम (Zee Media) में अपनी पत्रकारिता की समझ और अनुभव को और मजबूत किया. अपने प्रोफेशनल सफर में उन्होंने दिल्ली ब्लास्ट, जम्मू-कश्मीर ब्लास्ट, ईरान-अमेरिका युद्ध, रूस-यूक्रेन युद्ध और कई विधानसभा चुनावों के अलावा लाइफस्टाइल और हेल्थ जैसे विविध विषयों पर कंटेंट तैयार किया है. विशेषज्ञता और फोकस अज़हर नईम को लाइफस्टाइल और हेल्थ का खासा अनुभव है, वह इन खबरों को आसान भाषा में समझाने में माहिर हैं और इन्हीं से जुड़ी स्टोरी पर लगातार काम कर रहे हैं. इसके अलावा उन्हें टिप्स और ट्रिक्स, स्किन केयर, हेयर केयर, किचन-गार्डनिंग और फैशन से जुड़ी खबरों में भी महारत हासिल है.

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