मुंह में घुलने वाली क्लोबाजाम मिर्गी के लंबे दौरे में हो सकती है असरदार, AIIMS के रिसर्चर्स ने की स्टडी

AIIMS नई दिल्ली और जीबी पंत इंस्टीट्यूट के शोधकर्ताओं ने मिर्गी के दौरे को रोकने के लिए क्लोबाजाम दवा पर स्टडी की है. स्टडी में पाया गया कि यह दवा मिर्गी के लिए दी जाने वाली दवा मिडाजोलम से कैसे अलग है.

Mirgi Ki Dawa

मिर्गी के मरीज को यह दवा देने में नहीं आएगी दिक्कत. AI Generated Image

AIIMS Study: AIIMS नई दिल्ली और जीबी पंत इंस्टीट्यूट के रिसर्चर्स ने अपनी स्टडी में पाया है कि मुंह में घुलने वाली दवा क्लोबाजाम लंबे समय तक चलने वाले मिर्गी के दौरे (Mirgi Ke Daure) को कम करने में असरदार हो सकती है. शोध में पाया गया कि क्लोबाजाम नाक में डालकर दी जाने वाली दवा मिडाजोलम जितनी ही प्रभावी हो सकती है. स्टडी में पाया गया कि दोनों दवाएं लंबे दौरे यानी फोकल सीजर्स को एक मिनट में रोकने में असर दिखाया. इस दौरान मरीजों के दौरे के लक्षणों को देखा गया और EEG में दिमाग की इल्केट्रिक एक्टिविटी को देखा.

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कैसे की गई यह रिसर्च

एम्स दिल्ली की एपिलेप्सी मोनिटरिंग यूनिट में यह रिसर्च की गई थी. यहां उन मरीजों को इस स्टडी में शामिल किया गया जिन्हें ड्रग रेजिस्टेंट मिर्गी थी. 165 मरीजों पर जांच और 95 मरीजों को स्टडी में शामिल किया गया. मिर्गी के दौरे कुछ ही देर में रुक जाते हैं लेकिन अगर यह दौरा अगर लंबे समय तक बना रहे तो गंभीर स्थिति बन जाती है. ऐसे में इस स्टडी में 2 मिनट से ज्यादा देर तक चलने वाले फोकल सीजर्स पर फोकस किया गया. स्टडी का मकसद यह जानना था कि मुंह में घुलने वाली क्लोबाजाम और नाक से दी जाने वाली मिडाजोलम में कितना अंतर है स्टडी में पाया गया कि क्लोबाजाम भी मिडाजोलम जितनी ही प्रभावी है या नहीं.

क्लोबाजाम मिडाजोलम के कैसे अलग है

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एम्स की डॉ. मंजरी त्रिपाठी के मुताबिक, स्टडी में इस्तेमाल की गई मिडाजोलम नाक में दी जाती है. बच्चों में इसे कई पफ में देना पड़ सकता है जबकि बड़ों में पफ की जरूरत नहीं होती है. इस दौरान दवा के लीक होने की आशंका रहती है. यह दवा हर जगह आसानी से उपलब्ध नहीं होती और इसकी कीमत भी एक चुनौती है. वहीं, मुंह में घुलने वाली क्लोबाजाम को सामान्य गोली की तरह निगलने की जरूरत नहीं पड़ती. यह मुंह में घल जाती है जिससे मरीजों को आसानी होती है. दौरे के दौरान दवा निगलना मुश्किल होता है ऐसे में यह दवा इस मुश्किल को सुलझा देती है.

किसी व्यक्ति को अगर मिर्गी का दौरा पड़ता है तो डॉक्टर की सलाह से इस दवा को रेस्यूक मेडिसिन के दौर पर दिया जा सकता है. मिडाजोलम और क्लोबाजाम में से किस दवा का इस्तेमाल करना है या किया जाएगा यह डॉक्टर की सलाह से ही निर्धारित किया जा सकता है.

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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.

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लेखक के बारे में

Seema Thakur

Seema Thakur

सीमा ठाकुर पत्रकारिता से पिछले 7 सालों से जुड़ी हैं. न्यूज24 में सीमा बतौर चीफ सब एडिटर काम कर रही हैं. सीमा हेल्थ और लाइफस्टाइल बीट पर लिखती हैं और कॉन्टेन्ट क्रिएशन के साथ ही टीम लीड की भूमिका भी निभा रही हैं. न्यूज24 में सीमा ने अपनी बीट से हटकर इलेक्शंस की स्टोरीज पर भी काम किया है. हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़ी स्टडीज, लेटेस्ट न्यूज और एक्सपर्ट्स/डॉक्टर्स से बातचीत पर आधारित लेख लिखने में सीमा की मजबूत पकड़ है. सीमा हेल्थ की खबरों और लेटेस्ट अपडेट के लिए AIIMS, ICMR, WHO,  स्वास्थ्य मंत्रालय जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों और डॉक्टरों के संपर्क में रहती हैं. अनुभव सीमा ने पत्रकारिता की शुरुआत दिल्ली प्रेस ग्रुप से की थी जहां वे सरिता, मुक्ता और गृहशोभा मैग्जीन में वुमेन ओरिएंटेड, सोशल, लाइफस्टाइल, हेल्थ और बॉलीवुड के अलावा पॉलिटकल आर्टिकल्स लिखती थीं. सीमा को प्रूफरीडिंग और एडिटिंग का भी खासा अनुभव है. प्रिंट में काम करने के दौरान सीमा की हिंदी भाषा में अच्छी पकड़ है. दिल्ली प्रेस के बाद सीमा डायमंड पब्लिशिंग हाउस से जुड़ी थीं जहां उन्होंने मैग्जीन और वेबसाइट दोनों के लिए काम किया. डायमंड पब्लिशिंग हाउस के बाद सीमा ने NDTV के साथ डिजिटल मीडिया में अपना करियर शुरू किया. NDTV में सीमा ने राइटर के साथ ही वीडियो प्रोड्यूसर, एंकर और पॉडकास्टर के तौर पर भी काम किया. लाइफस्टाइल वीडियोज और बॉलीवुड गोल्ड सीरीज को प्रोड्यूस और एंकर करने के साथ ही वे बॉलीवुड पॉडकास्ट किया करती थीं. वीडियो प्रोडक्शन में सीमा का इंटरेस्ट और पकड़ यहीं से आई है. शिक्षा सीमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज से बी.ए किया है. इसके बाद जामिया मिलिया इस्लामिया से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. जामिया की पीजी डिप्लोमा इन जर्नलिज्म डिपार्टमेंट की मैग्जीन में सीमा स्टूडेंट एडिटर और अपने बैच की कॉन्टेंट हेड रह चुकी हैं.
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