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हेल्थ
नींद ना आने की हो गई है बीमारी तो पतंजलि पंचकर्म, षटकर्म और नैचुरोपैथी के ये नुस्खे अनिद्रा को कर देंगे दूर
Insomnia Remedies: अगर आप भी नींद ना आने के रोग यानी अनिद्रा से परेशान हैं और रातभर बिना नींद के करवट लेते-लेते थक गए हैं तो यहां जानिए पतंजलि की सुझाई कौन-कौन सी नैचुरोपैथी चिकित्सा काम आ सकती हैं.
हाइलाइट्स
News24 AI द्वारा निर्मित • संपादकीय टीम द्वारा जांचा गया
अनिद्रा के लिए प्राकृतिक उपचार
पंचकर्म थेरेपी में अभ्यंग, स्वेदन, शिरोधारा और क्षीरवस्ति जैसी विधियों से अनिद्रा का इलाज किया जाता है।
षटकर्म के तरीकों में जलनेति, सूत्रनेति, शंखप्रक्षालन, योगनिद्रा और एक्यूप्रेशर अनिद्रा को दूर करने में सहायक हैं।
नेचुरोपैथी उपचारों में मिट्टी की पट्टी, गर्म-ठंडा सेक, रीढ़ की मालिश, एनिमा और गीली चादर लपेटना शामिल हैं।
जीवनशैली में बदलाव
पतंजलि के विशेषज्ञों के अनुसार, निश्चित समय पर सोना, सोने से 3 घंटे पहले हल्का भोजन करना और सोने से पहले मोबाइल का उपयोग न करना अनिद्रा को दूर करने में मदद करता है।
Insomnia And Naturopathy: अनिद्रा यानी नींद ना आना एक रोग है जिसमें व्यक्ति को नींद नहीं आती है और अगर आती भी है तो कुछ ही देर में टूट जाती है. अनिद्रा में व्यक्ति थकान से चूर होने के बाद भी सोने में असमर्थ होता है और रातभर करवटें लेता रहता है. ऐसे में दवाओं के बजाय आयुर्वेदिक उपाय (Ayurvedic Remedies) और नैचुरोपैथी चिकित्सा अनिद्रा को दूर कर सकती है. पतंजलि वेलनेस सेंटर ऐसे कई नेचुरोपैथी ट्रीटमेंट्स देते हैं जो अनिद्रा के मरीजों को राहत देने का काम करते हैं. इसके अलावा, पतंजलि एक्सपर्ट्स के बताए आयुर्वेदिक नुस्खे और जीवनशैली में किए जाने वाले कुछ बदलाव भी अनिद्रा को दूर कर सकते हैं. अगर आप भी नींद ना आने की समस्या से परेशान हैं तो यहां जानिए कैसे मिलेगी राहत.
पंचकर्म से अनिद्रा का इलाज
पंचकर्म थेरैपी (Panchkarma Theraphy) में अभ्यङ्ग, स्वेदन, शिरोधारा और क्षीरवस्ति के माध्यम से अनिद्रा का इलाज किया जाता है.
अभ्यङ्ग - यह एक महत्वपूर्ण स्नेहक चिकित्सा है. इसमें तेल मालिश की जाती है. औषधीय तेलों से सिर से पैरों तक की मालिश करने पर शरीर से टॉक्सिंस निकलते हैं और शरीर को राहत महसूस होती है.
स्वेदन - यह एक पूर्व कर्म प्रक्रिया है जिसमें मालिश के बाद शरीर पर भाप दी जाती है. पसीने के माध्यम से शरीर से टॉक्सिंस निकलते हैं और मांसपेशियों की अकड़न, दर्द और जकड़न दूर होते हैं. अनिद्रा जैसी दिक्कतों में भी यह थेरैपी बेहद कारगर साबित होती है.
शिरोधारा - यह पंचकर्म की एक अनूठी चिकित्सा पद्धति है जिसमें गुनगुने तेल, छाछ या फिर काढ़े की स्थिर धार को माथे पर गिराया जाता है. इससे तनाव, चिंता और सिरदर्द से राहत मिलती है.
क्षीरवस्ति - यह एनिमा चिकित्सा है जिसमें औषधीय दूध और जड़ी- बूटियों का इस्तेमाल किया जाता है. इससे वात रोग शांत होता है, शरीर को पोषण मिलता है और शरीर डिटॉक्स होता है.
षटकर्म से अनिद्रा का इलाज
जलनेति, सूत्रनेति, शंखप्रक्षालन, योगनिद्रा और एक्यूप्रेशर जैसे षटकर्म के मैथड अनिद्रा को दूर करने में मदद करते हैं.
जलनेति - जलनेति या जलनीति में नाक और साइनस की सफाई होती है. इसमें नाक में गुनगुना नमकीन पानी या एसेंशियल ऑयल डाला जाता है.
सूत्रनेति - यह षटकर्म की एक प्रमुख नेति क्रिया है जिसमें नाक साफ करने के लिए नरम सुती धागे या रबड़ कैथेटर का इस्तेमाल किया जाता है. इससे नाक के माध्यम से बलगम और गंदगी को निकाला जाता है. सोने में होने वाली इन दिक्कतों को दूर करने पर अनिद्रा दूर हो सकती है.
शंखप्रक्षालन- इसमें नमक वाले गुनगुने पानी से 5 अलग-अलग आसनों के माध्यम से मुंह से लेकर मलाशय तक की सफाई की जाती है.
योगनिद्रा - षटकर्म में योगनिद्रा थेरैपी दी जाती है. इससे व्यक्ति को शारीरिक और मानसिक आराम मिलता है. इस थेरैपी से शरीर शांत होता है, ऊर्जा संतुलित होती है और थकावट दूर होती है.
एक्यूप्रेशर - एक्यूप्रेशर एक प्राचीन पद्धति है जिसमें गले और पेट के विशिष्ट हिस्सों को दबाकर या उत्तेजित करके उलटी करवाई जाती है. इससे श्वसन तंत्र की भी सफाई हो जाती है.
नेचुरोपैथी से अनिद्रा का इलाज
पतंजलि के नैचुरोपैथी के ट्रीटमेंट्स अनिद्रा रोग को दूर कर सकते हैं. इन नेचुरोपैथी ट्रीटमेंट्स में सिर व पेट पर मिट्टी की पट्टी बांधी जाती है, पेट और रीढ़ पर गर्म और ठंडा सेक दिया जाता है, रीढ़ की मालिश की जाती है, एनिमा और गीली चादर लपेटना आदि किया जाता है.
इसके अलावा, जल और मिट्टी चिकित्सा दी जाती है जिसमें ठंडा रीढ़ स्नान, मड स्नान, गरम पाद स्नान, पूर्ण टब स्नान और ठंडा कटि स्नान दिया जाता है.
इन बातों का ध्यान रखकर अनिद्रा को किया जा सकता है दूर
पतंजलि के एक्सपर्ट की राय है कि जीवनशैली की कुछ बातों का ध्यान रखा जाए तो अनिद्रा की दिक्कत को दूर किया जा सकता है. एक्सपर्ट्स की सलाह है कि रोजाना निश्चित समय पर सोएं, सोने से 3 घंटे पहले खाना खा लें और इस बात का ध्यान रखें कि आप खाना खाने के तुरंत बाद ना सोएं. रात के समय खासतौर से हल्दा भोजन ही करें.
दिन में सोने से परहेज करें. इससे रात के समय सही तरह से नींद लेने में दिक्कत होती है. एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि अगर आपको सोना है तो सोने से पहले मोबाइल का इस्तेमाल ना करें.
सोने के लिए कमरे में सही माहौल होना जरूरी है. ऐसे में सोने से पहले कमरे की सभी तरह की लाइटों को बंद कर दें. कमरे में जितना ज्यादा अंधेरा होगा उतनी ही बेहतर तरह से नींद लेने में मदद मिलेगी. अंधेरे कमरे में लेटने पर दिमाग से नींद लाने वाले हार्मोन मेलाटॉनिन का स्राव होता है. इससे नींद जल्दी लेने में मदद मिलती है.
गहरी नींद लेने के लिए चिंता को दूर रखने को कोशिश करें. खुशी से सोने पर बेहतर और अच्छी नींद आती है.
Insomnia And Naturopathy: अनिद्रा यानी नींद ना आना एक रोग है जिसमें व्यक्ति को नींद नहीं आती है और अगर आती भी है तो कुछ ही देर में टूट जाती है. अनिद्रा में व्यक्ति थकान से चूर होने के बाद भी सोने में असमर्थ होता है और रातभर करवटें लेता रहता है. ऐसे में दवाओं के बजाय आयुर्वेदिक उपाय (Ayurvedic Remedies) और नैचुरोपैथी चिकित्सा अनिद्रा को दूर कर सकती है. पतंजलि वेलनेस सेंटर ऐसे कई नेचुरोपैथी ट्रीटमेंट्स देते हैं जो अनिद्रा के मरीजों को राहत देने का काम करते हैं. इसके अलावा, पतंजलि एक्सपर्ट्स के बताए आयुर्वेदिक नुस्खे और जीवनशैली में किए जाने वाले कुछ बदलाव भी अनिद्रा को दूर कर सकते हैं. अगर आप भी नींद ना आने की समस्या से परेशान हैं तो यहां जानिए कैसे मिलेगी राहत.
पंचकर्म से अनिद्रा का इलाज
पंचकर्म थेरैपी (Panchkarma Theraphy) में अभ्यङ्ग, स्वेदन, शिरोधारा और क्षीरवस्ति के माध्यम से अनिद्रा का इलाज किया जाता है.
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अभ्यङ्ग – यह एक महत्वपूर्ण स्नेहक चिकित्सा है. इसमें तेल मालिश की जाती है. औषधीय तेलों से सिर से पैरों तक की मालिश करने पर शरीर से टॉक्सिंस निकलते हैं और शरीर को राहत महसूस होती है.
स्वेदन – यह एक पूर्व कर्म प्रक्रिया है जिसमें मालिश के बाद शरीर पर भाप दी जाती है. पसीने के माध्यम से शरीर से टॉक्सिंस निकलते हैं और मांसपेशियों की अकड़न, दर्द और जकड़न दूर होते हैं. अनिद्रा जैसी दिक्कतों में भी यह थेरैपी बेहद कारगर साबित होती है.
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शिरोधारा – यह पंचकर्म की एक अनूठी चिकित्सा पद्धति है जिसमें गुनगुने तेल, छाछ या फिर काढ़े की स्थिर धार को माथे पर गिराया जाता है. इससे तनाव, चिंता और सिरदर्द से राहत मिलती है.
क्षीरवस्ति – यह एनिमा चिकित्सा है जिसमें औषधीय दूध और जड़ी- बूटियों का इस्तेमाल किया जाता है. इससे वात रोग शांत होता है, शरीर को पोषण मिलता है और शरीर डिटॉक्स होता है.
षटकर्म से अनिद्रा का इलाज
जलनेति, सूत्रनेति, शंखप्रक्षालन, योगनिद्रा और एक्यूप्रेशर जैसे षटकर्म के मैथड अनिद्रा को दूर करने में मदद करते हैं.
जलनेति – जलनेति या जलनीति में नाक और साइनस की सफाई होती है. इसमें नाक में गुनगुना नमकीन पानी या एसेंशियल ऑयल डाला जाता है.
सूत्रनेति – यह षटकर्म की एक प्रमुख नेति क्रिया है जिसमें नाक साफ करने के लिए नरम सुती धागे या रबड़ कैथेटर का इस्तेमाल किया जाता है. इससे नाक के माध्यम से बलगम और गंदगी को निकाला जाता है. सोने में होने वाली इन दिक्कतों को दूर करने पर अनिद्रा दूर हो सकती है.
शंखप्रक्षालन- इसमें नमक वाले गुनगुने पानी से 5 अलग-अलग आसनों के माध्यम से मुंह से लेकर मलाशय तक की सफाई की जाती है.
योगनिद्रा – षटकर्म में योगनिद्रा थेरैपी दी जाती है. इससे व्यक्ति को शारीरिक और मानसिक आराम मिलता है. इस थेरैपी से शरीर शांत होता है, ऊर्जा संतुलित होती है और थकावट दूर होती है.
एक्यूप्रेशर – एक्यूप्रेशर एक प्राचीन पद्धति है जिसमें गले और पेट के विशिष्ट हिस्सों को दबाकर या उत्तेजित करके उलटी करवाई जाती है. इससे श्वसन तंत्र की भी सफाई हो जाती है.
नेचुरोपैथी से अनिद्रा का इलाज
पतंजलि के नैचुरोपैथी के ट्रीटमेंट्स अनिद्रा रोग को दूर कर सकते हैं. इन नेचुरोपैथी ट्रीटमेंट्स में सिर व पेट पर मिट्टी की पट्टी बांधी जाती है, पेट और रीढ़ पर गर्म और ठंडा सेक दिया जाता है, रीढ़ की मालिश की जाती है, एनिमा और गीली चादर लपेटना आदि किया जाता है.
इसके अलावा, जल और मिट्टी चिकित्सा दी जाती है जिसमें ठंडा रीढ़ स्नान, मड स्नान, गरम पाद स्नान, पूर्ण टब स्नान और ठंडा कटि स्नान दिया जाता है.
इन बातों का ध्यान रखकर अनिद्रा को किया जा सकता है दूर
पतंजलि के एक्सपर्ट की राय है कि जीवनशैली की कुछ बातों का ध्यान रखा जाए तो अनिद्रा की दिक्कत को दूर किया जा सकता है. एक्सपर्ट्स की सलाह है कि रोजाना निश्चित समय पर सोएं, सोने से 3 घंटे पहले खाना खा लें और इस बात का ध्यान रखें कि आप खाना खाने के तुरंत बाद ना सोएं. रात के समय खासतौर से हल्दा भोजन ही करें.
दिन में सोने से परहेज करें. इससे रात के समय सही तरह से नींद लेने में दिक्कत होती है. एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि अगर आपको सोना है तो सोने से पहले मोबाइल का इस्तेमाल ना करें.
सोने के लिए कमरे में सही माहौल होना जरूरी है. ऐसे में सोने से पहले कमरे की सभी तरह की लाइटों को बंद कर दें. कमरे में जितना ज्यादा अंधेरा होगा उतनी ही बेहतर तरह से नींद लेने में मदद मिलेगी. अंधेरे कमरे में लेटने पर दिमाग से नींद लाने वाले हार्मोन मेलाटॉनिन का स्राव होता है. इससे नींद जल्दी लेने में मदद मिलती है.
गहरी नींद लेने के लिए चिंता को दूर रखने को कोशिश करें. खुशी से सोने पर बेहतर और अच्छी नींद आती है.