कैंसर और टिटनेस के इलाज पर बढ़ा खर्च, कई दवाओं की कीमतों में 50% तक इजाफा
Cancer Medicine Price Hike: कैंसर और टिटनेस की दवाओं में 50 परसेंट की बढ़ोतरी की गई है, जिसका असर आम लोगों को पड़ने वाला है. एक तो लोग महंगा इलाज करा नहीं पा रहे थे और अब दवा को भी महंगा कर दिया है. इसके पीछे क्या कारण बताया जा रहा है, आइए जानते हैं.
Edited By : Shadma Muskan|Updated: Jul 22, 2026 14:46
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क्यों बढ़ाई गई दवाओं की कीमत? Image Credit- Freepik
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Cancer Tetanus Medicine Price: आजकल वैसे ही कैंसर जैसी बीमारी बढ़ रही है. लोग इलाज के लिए परेशान हैं और अब कैंसर और टिटनेस जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली कुछ जरूरी दवाओं की कीमतें बढ़ा दी गई हैं. नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी ने चुनिंदा दवाओं की कीमतों में लगभग 50 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी को मंजूरी दी है. रिपोर्ट के मुताबिक, उन दवाओं की कीमतें बढ़ाई गई हैं, जिनका स्टॉक कम है और कीमतें बढ़ाने से मांग को काफी हद तक कम किया जा सकता है. इस विस्तार से जानते हैं कि इस फैसले को क्यों लिया गया है.
एनपीपीए का कहना है कि कुछ जरूरी दवाओं को बनाने में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल, पैकेजिंग और लागत में लगातार बढ़ोतरी हुई है. कई दवा कंपनियों का कहना था कि मौजूदा कीमतों पर इन दवाओं को बनाना काफी मुश्किल हो रहा है, जिससे बाजार में इनका माल कम है. इसी को ध्यान में रखते हुए दवाओं की डिमांड को कम करने के लिए बनाए रखने कीमतें बढ़ाई गई है.
किन दवाओं पर पड़ेगा असर?
हालांकि, कुछ ही दवा की कीमतें बढ़ाई गई हैं, जिनका इस्तेमाल गंभीर बीमारियों के इलाज में किया जाता है जैसे- कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली कुछ दवाएं, टिटनेस में इस्तेमाल होने वाली दवाएं और कुछ एंटीबायोटिक आदि. सभी कैंसर या टिटनेस की दवाओं की कीमत नहीं बढ़ाई गई है.
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इसका मरीजों पर क्या असर पड़ेगा?
दवाओं की कीमत बढ़ने से मरीजों के इलाज का खर्च बढ़ सकता है. खासकर लंबे समय तक इलाज कराने वाले मरीजों को एक वक्त के बाद दवा खरीदने में परेशानी हो सकती है. हालांकि, सरकार का कहना है कि यह कदम दवाओं की डिमांड को कम करने के लिए किया गया है.
क्या सभी दवाएं महंगी होंगी?
इसको लेकर अभी कोई अधिकारिक बयान नहीं आया है. इसलिए अभी यह बढ़ोतरी सभी दवाओं पर लागू नहीं है. इसमें कुछ दवाओं को ही शामिल किया गया है, बाकी दवाओं की कीमतें पहले की तरह ही रहेंगी, जब तक कि एनपीपीए की ओर से अलग से कोई बयान जारी न किया जाए.