सिजोफ्रेनिया क्या है और इसके क्या लक्षण होते हैं, WHO ने बताई Schizophrenia के मरीज को होने वाली दिक्कतें

What Is Schizophrenia: विश्व स्वास्थ्य संगठन से जानिए सिजोफ्रेनिया क्या है और व्यक्ति अगर सिजोफ्रेनिया का शिकार हो तो उसमें कैसे लक्षण नजर आते हैं.

Schizophrenia Symptoms

सिजोफ्रेनिया में व्यक्ति का व्यवहार बदलने लगता है. AI Generated Image

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Schizophrenia Symptoms: सिजोफ्रेनिया दिमाग से जुड़ी एक कंडीशन है जिसमें मरीज को साइकोसिस हो जाता है. समय पर इलाज ना होने पर सिजोफ्रेनिया का मरीज डिसेबिलिटी का शिकार हो जाता है और यह व्यक्ति के जीवन के विभिन्न पहलुओं को प्रभावित करता है. आसान शब्दों में समझें तो सिजोफ्रेनिया एक गंभीर मानसिक विकार है जो व्यक्ति के व्यवहार और सोचने-समझने की शक्ति पर असर डालता है. विश्व स्वास्थ्य संगंठन (WHO) के अनुसार, दुनियाभर में सिजोफ्रेनिया के 3 में से 2 मरीजों को स्पेशल मेंटल हेल्थ केयर नहीं मिलती है. ऐसे में सिजोफ्रेनिया के लक्षणों को समझना और मरीज को इलाज मुहैया कराना जरूरी होता है. यहां जानिए WHO के अनुसार सिजोफ्रेनिया के क्या लक्षण होते हैं और सिजोफ्रेनिया के मरीजों (Schizophrenia Patients) को किन दिक्कतों का सामना करना पड़ता है.

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सिजोफ्रेनिया के लक्षण क्या होते हैं

  • सिजोफ्रेनिया में मरीज भ्रम की स्थिति में रहता है. सबूत होने के बाद भी अपनी कल्पना और विश्वास को ही व्यक्ति सच समझता है.
  • व्यक्ति को हैलुसिनेशन होने लगती है. वह किसी तरह की आवाज, महक, किसी का स्पर्श और आस-पास जो चीजें नहीं हैं उन्हें भी महसूस करने लगता है.
  • ऐसा महसूस होता है कि उसके विचार, भावनाएं या गुस्सा उसका अपना नहीं है बल्कि उसके मन में यह सब किसी और के द्वारा डाला जा रहा है.
  • सोच अव्यवस्थित होने लगती है. व्यक्ति की सोच उलझ जाती है और ऐसा लगता है कि वह बेमतलब की बात कर रहा है.
  • ऐसा लगता है कि व्यक्ति का व्यवहार अव्यवस्थित होने लगा है. व्यक्ति अजीब हरकतें करने लगता है या लगता है कि वह लक्ष्यहीन हो गया है. कई बार व्यक्ति की भावनाएं या प्रतिक्रियाएं (Reactions) अप्रत्याशित या अनुचित हो जाते हैं. इससे व्यक्ति का व्यवहार व्यवस्थित नहीं हो पाता है.
  • व्यक्ति में नकारात्मक लक्षण (Negative Symptoms) दिखने लगते हैं, जैसे बहुत कम बोलना, अनुभवों का कम होना, कम इमोशंस नजर आना, कम एक्सप्रेशन दिखना, व्यक्ति का किसी भी चीज या काम में रुचि ना लेना और समाज से कट जाना.

सिजोफ्रेनिया होने का क्या कारण है

अबतक सिजोफ्रेनिया का कोई एक कारण नहीं देखा गया है. यह समझा जाता है कि सिजोफ्रेनिया जीन्स और पर्यावरण के तत्वों के बीच के इंट्रैक्शन से होता है. साइकोलॉजिकल फैक्टर्स भी सिजोफ्रेनिया को प्रभावित करते हैं. गांजे के बहुत ज्यादा इस्तेमाल का संबंध भी सिजोफ्रेनिया के बढ़ते जोखिम से संबंधित है.

सिजोफ्रेनिया के मरीज को किस तरह की दिक्कतें होती हैं

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सिजोफ्रेनिया के मरीज को लगातार अपनी सोचने-समझने की क्षमता में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है, जैसे कॉग्ननिटिव स्किल्स में, याद्दाश्त में, किसी बात पर ध्यान लगाने में या फिर समस्या को सुलझाने में. दुनियाभर में सिजोफ्रेनिया के मरीज साधारण जनसंख्या की तुलना में 9 साल पहले मर जाते हैं, ऐसा ज्यादातर फिजिकल बीमारियों जैसे कार्डियोवेस्कुलर डिजीज, मेटाबॉलिक और इंफेक्शन वाली बीमारियों के चलते होता है.

लोगों में सिजोफ्रेनिया को लेकर एक सामाजिक अवधारणा बनी हुई है और इसे बुरी भावना से देखा जाता है जिससे सिजोफ्रेनिया के मरीज समाज से अलग-थलग हो जाते हैं और परिवार के अलावा बाहरी लोगों के साथ भी उनके रिश्तों पर असर पड़ता है. इससे सिजोफ्रेनिया के मरीजों के साथ भेदभाव बढ़ता है और आम स्वास्थ्य, शिक्षा, आवास और रोजगार तक उनकी पहुंच कम हो जाती है.

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क्या सिजोफ्रेनिया के मरीज ठीक हो सकते हैं

WHO की मानें तो सिजोफ्रेनिया से पीड़ित कम से कम एक तिहाई लोगों में लक्षण पूरी तरह ठीक हो जाते हैं. वहीं, कुछ लोगों में यह लक्षण जीवनभर कभी बिगड़ते हैं तो कभी ठीक हो जाते हैं और वहीं कुछ लोगों में समय के साथ-साथ ये लक्षण गंभीर होते चले जाते हैं और बिगड़ते हैं.

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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.

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Source - WHO 

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लेखक के बारे में

Seema Thakur

Seema Thakur

सीमा ठाकुर पत्रकारिता से पिछले 7 सालों से जुड़ी हैं. न्यूज24 में सीमा बतौर चीफ सब एडिटर काम कर रही हैं. सीमा हेल्थ और लाइफस्टाइल बीट पर लिखती हैं और कॉन्टेन्ट क्रिएशन के साथ ही टीम लीड की भूमिका भी निभा रही हैं. न्यूज24 में सीमा ने अपनी बीट से हटकर इलेक्शंस की स्टोरीज पर भी काम किया है. हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़ी स्टडीज, लेटेस्ट न्यूज और एक्सपर्ट्स/डॉक्टर्स से बातचीत पर आधारित लेख लिखने में सीमा की मजबूत पकड़ है. सीमा हेल्थ की खबरों और लेटेस्ट अपडेट के लिए AIIMS, ICMR, WHO,  स्वास्थ्य मंत्रालय जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों और डॉक्टरों के संपर्क में रहती हैं. अनुभव सीमा ने पत्रकारिता की शुरुआत दिल्ली प्रेस ग्रुप से की थी जहां वे सरिता, मुक्ता और गृहशोभा मैग्जीन में वुमेन ओरिएंटेड, सोशल, लाइफस्टाइल, हेल्थ और बॉलीवुड के अलावा पॉलिटकल आर्टिकल्स लिखती थीं. सीमा को प्रूफरीडिंग और एडिटिंग का भी खासा अनुभव है. प्रिंट में काम करने के दौरान सीमा की हिंदी भाषा में अच्छी पकड़ है. दिल्ली प्रेस के बाद सीमा डायमंड पब्लिशिंग हाउस से जुड़ी थीं जहां उन्होंने मैग्जीन और वेबसाइट दोनों के लिए काम किया. डायमंड पब्लिशिंग हाउस के बाद सीमा ने NDTV के साथ डिजिटल मीडिया में अपना करियर शुरू किया. NDTV में सीमा ने राइटर के साथ ही वीडियो प्रोड्यूसर, एंकर और पॉडकास्टर के तौर पर भी काम किया. लाइफस्टाइल वीडियोज और बॉलीवुड गोल्ड सीरीज को प्रोड्यूस और एंकर करने के साथ ही वे बॉलीवुड पॉडकास्ट किया करती थीं. वीडियो प्रोडक्शन में सीमा का इंटरेस्ट और पकड़ यहीं से आई है. शिक्षा सीमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज से बी.ए किया है. इसके बाद जामिया मिलिया इस्लामिया से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. जामिया की पीजी डिप्लोमा इन जर्नलिज्म डिपार्टमेंट की मैग्जीन में सीमा स्टूडेंट एडिटर और अपने बैच की कॉन्टेंट हेड रह चुकी हैं.
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