बच्चे का कान छिदवाने से पहले जान लें ये 4 बातें, सही उम्र से लेकर मटीरियल तक का रखें ध्यान

Baby Ear Piercing: बच्चे का कान छिदवाना चाहते हैं लेकिन यह नहीं पता कि सही उम्र क्या है तो यहां जानिए जवाब. बच्चे का कान छिदवाने की सही उम्र से लेकर कौन सी धातु का इस्तेमाल कान छेदने के लिए सही है यह भी जानिए यहां.

ear piercing

बच्चे का कान कब छिदवाना चाहिए?

Ear Piercing: बच्चे का कान छिदवाना हिंदू धर्म में परंपरा भी है और सुंदरता के लिए भी बहुत से लोग बच्चे के कान छिदवाते हैं. छोटी उम्र में त्वचा नाजुक होती है और इसीलिए कान छिदवाए जाते हैं ताकि बच्चे को दर्द का ज्यादा पता ना लगे. लेकिन, अक्सर ही बच्चे का कान किस उम्र में छिदवाना (Kaan Chhidwana) चाहिए और किस तरह छिदवाना चाहिए यह माता-पिता को पता नहीं होता और समझ भी नहीं आता कि किससे सवाल किया जाए. लेकिन, अब आपको टेंशन लेने की जरूरत नहीं है. यहां जानिए बच्चे का कान छिदवाने की सही उम्र क्या है और कान छिदवाने से पहले और बाद में किन बातों के बारे में पता होना जरूरी है.

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बच्चे का कान छिदवाने से पहले जान लें ये बातें

अगर आप बच्चे का कान छिदवाना चाहते हैं तो इन बातों का ध्यान रखें –

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बच्चे की उम्र कितनी हो

बच्चे का कान छिदवाने की कोई सही उम्र नहीं है. लेकिन, बच्चे की उम्र कम से कम 6 महीना जरूर होनी चाहिए. 6 महीने बाद बच्चे का कान छिदवाने लायक हो जाता है और बच्चे को ज्यादातर वैक्सीन लग चुकी होती है और इम्यून सिस्टम भी बेहतर हो जाता है.

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स्टेरेलाइज्ड हो टूल

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जिस भी टूल से बच्चे का कान छिदवाया जा रहा है उसे ठीक तरह से स्टेरेलाइज्ड जरूर करवा लें. इसके साथ ही, किसी डॉक्टर या सर्टिफाइड प्रोफेशनल से ही बच्चे का कान छिदवाएं.

कैसा मटीरियल चुनें

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बच्चे का कान छिदवाने के लिए नकल फ्री गोल्ड, टाइटेनियम या सर्जिकल स्टेनलेस स्टील का इस्तमाल करें. इससे एलर्जिक रिएक्शन का रिस्क कम हो जाता है.

कान छिदवाने के बाद क्या करें

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  • बच्चे का कान छिदवाने के बाद सही साफ-सफाई रखना जरूरी है.
  • रोजाना एंटी-सेप्टिक क्रीम को कान पर लगाएं.
  • बच्चे के कान से 4 से 6 हफ्तों तक इयरिंग्स ना हटाएं.
  • अगर छिदे हुए कान लाल, सूजे हुए या फिर पस से भरे नजर आएं तो डॉक्टर से संपर्क करें.

इन बातों का भी रखें ध्यान

बच्चे का कान छिदवाते हुए इस बात का ख्याल रखें कि आप बच्चे को कसकर पकड़ें जिससे बच्चा कान छेदने की प्रक्रिया के दौरान हिले-डुले नहीं. इसके अलावा, बच्चे के कान में दर्द ना हो इसके लिए कान सुन्न करने वाली क्रीम लगाई जा सकती है. बच्चे को ढीले और आसानी से उतारे जा सकें ऐसे कपड़े पहनाएं. बच्चे का कान छिद जाने के बात बालियों को एक से 2 बार दिनभर में जरूर घुमाएं ताकि वो त्वचा से चिपके नहीं.

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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.

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लेख समाप्त

लेखक के बारे में

Seema Thakur

Seema Thakur

सीमा ठाकुर पत्रकारिता से पिछले 7 सालों से जुड़ी हैं. न्यूज24 में सीमा बतौर चीफ सब एडिटर काम कर रही हैं. सीमा हेल्थ और लाइफस्टाइल बीट पर लिखती हैं और कॉन्टेन्ट क्रिएशन के साथ ही टीम लीड की भूमिका भी निभा रही हैं. न्यूज24 में सीमा ने अपनी बीट से हटकर इलेक्शंस की स्टोरीज पर भी काम किया है. हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़ी स्टडीज, लेटेस्ट न्यूज और एक्सपर्ट्स/डॉक्टर्स से बातचीत पर आधारित लेख लिखने में सीमा की मजबूत पकड़ है. सीमा हेल्थ की खबरों और लेटेस्ट अपडेट के लिए AIIMS, ICMR, WHO,  स्वास्थ्य मंत्रालय जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों और डॉक्टरों के संपर्क में रहती हैं. अनुभव सीमा ने पत्रकारिता की शुरुआत दिल्ली प्रेस ग्रुप से की थी जहां वे सरिता, मुक्ता और गृहशोभा मैग्जीन में वुमेन ओरिएंटेड, सोशल, लाइफस्टाइल, हेल्थ और बॉलीवुड के अलावा पॉलिटकल आर्टिकल्स लिखती थीं. सीमा को प्रूफरीडिंग और एडिटिंग का भी खासा अनुभव है. प्रिंट में काम करने के दौरान सीमा की हिंदी भाषा में अच्छी पकड़ है. दिल्ली प्रेस के बाद सीमा डायमंड पब्लिशिंग हाउस से जुड़ी थीं जहां उन्होंने मैग्जीन और वेबसाइट दोनों के लिए काम किया. डायमंड पब्लिशिंग हाउस के बाद सीमा ने NDTV के साथ डिजिटल मीडिया में अपना करियर शुरू किया. NDTV में सीमा ने राइटर के साथ ही वीडियो प्रोड्यूसर, एंकर और पॉडकास्टर के तौर पर भी काम किया. लाइफस्टाइल वीडियोज और बॉलीवुड गोल्ड सीरीज को प्रोड्यूस और एंकर करने के साथ ही वे बॉलीवुड पॉडकास्ट किया करती थीं. वीडियो प्रोडक्शन में सीमा का इंटरेस्ट और पकड़ यहीं से आई है. शिक्षा सीमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज से बी.ए किया है. इसके बाद जामिया मिलिया इस्लामिया से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. जामिया की पीजी डिप्लोमा इन जर्नलिज्म डिपार्टमेंट की मैग्जीन में सीमा स्टूडेंट एडिटर और अपने बैच की कॉन्टेंट हेड रह चुकी हैं.
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