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टॉयलेट के समय दर्द और खून आना बवासीर है या फिशर? ऐसे समझें दोनों में फर्क  

Piles And Fissure Between: अगर टॉयलेट में बार-बार खून आ रहा है, दर्द ज्यादा है, लक्षण लगातार बने हुए हैं या देखभाल के बावजूद समस्या ठीक नहीं हो रही है तो डॉक्टर से टेस्ट करानी चाहिए. यह बवासीर है या फिशर के संकेत हो सकते हैं. 

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टॉयलेट करते समय दर्द होना या टॉयलेट पेपर पर खून दिखाई देना ऐसी समस्या है जिसे लोग अक्सर बवासीर यानी पाइल्स समझ लेते हैं. लेकिन हर बार इसका कारण बवासीर नहीं होता एनल फिशर यानी गुदा के पास की स्किन में छोटी दरार भी दर्द और खून आने की वजह हो सकती है. दोनों के लक्षण कुछ हद तक एक जैसे हो सकते हैं, लेकिन दर्द का तरीका और दूसरे संकेत इनके बीच अंतर समझने में मदद कर सकते हैं. आइए इस लेख में विस्तार से जानते हैं कि इन दोनों बीमारियों के क्या लक्षण हो सकते हैं. 

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बवासीर क्या होती है?

बवासीर को मेडिकल भाषा में हेमोरॉयड्स कहा जाता है. इसमें गुदा या निचले मलाशय के आसपास की नसों में सूजन आ जाती है. यह अंदर या बाहर, दोनों जगह हो सकती है. अंदर की बवासीर में टॉयलेट के बाद चमकीले लाल रंग का खून आना आम लक्षण है. कई बार अंदर की बवासीर में दर्द नहीं होता और बाहर की बवासीर में गुदा के पास गांठ, खुजली या दर्द हो सकता है.

फिशर क्या होता है?

एनल फिशर गुदा के आसपास की स्किन होने वाली छोटी दरार या चोट है. यह अक्सर कठोर मल निकलने या कब्ज के दौरान जोर लगाने के बाद हो सकता है. इसमें टॉयलेट करते समय चुभने वाला दर्द हो सकता है. दर्द टॉयलेट के बाद भी कुछ समय तक बना रह सकता है. इसके साथ चमकीले लाल रंग का खून टॉयलेट पेपर या टॉयलेट में दिखाई दे सकता है. 

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दर्द से कैसे समझें फर्क?

फिशर में टॉयलेट करते समय चुभने या जलन जैसा दर्द होना और टॉयलेट के बाद भी दर्द बने रहना ज्यादा खास संकेत है. वहीं, बवासीर में अंदर की बवासीर में ब्लीडिंग हो सकती है लेकिन आमतौर पर दर्द नहीं होता. इसलिए सिर्फ यह देखकर कि टॉयलेट के समय दर्द और खून दोनों आ रहे हैं, यह तय नहीं किया जा सकता कि समस्या बवासीर है या फिशर.

खून आने के तरीके से क्या पता चलता है?

फिशर में यह अक्सर टॉयलेट करते समय दर्द के साथ दिखाई देता है. बवासीर में भी टॉयलेट के बाद टॉयलेट पेपर, मल या टॉयलेट में चमकीला लाल खून दिख सकता है. इसलिए सिर्फ खून के रंग के आधार पर खुद से बीमारी की पहचान करना सही नहीं है.

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कब्ज का क्या हो सकता है रोल?

कब्ज, कठोर मल और टॉयलेट के दौरान ज्यादा जोर लगाना दोनों समस्याओं से जुड़े हो सकते हैं. बवासीर में भी जोर लगाने और लंबे समय तक टॉयलेट पर बैठने जैसी चीजें समस्या बढ़ा सकती है. इसलिए मल को नरम रखने के लिए पानी पीना, फाइबर वाले चीजें खाना और टॉयलेट में ज्यादा जोर लगाने से बचना जरूरी है.

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Source- NCBI

First published on: Sep 16, 2026 03:44 PM

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About the Author

Shadma Muskan

शादमा मुस्कान न्यूज 24 डिजिटल में सीनियर सब एडिटर (Senior Sub Editor) हैं. दिल्ली की रहने वाली शादमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता में बैचलर और मास्टर डिग्री हासिल की है. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 5 साल से ज्यादा का अनुभव है. शादमा ने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका और हरिभूमि में इंटर्नशिप से की. इसके बाद, उन्होंने जागरण न्यू मीडिया की वेबसाइट हरज़िंदगी के साथ 4 साल से अधिक समय तक काम किया, जहां उन्होंने हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लेखन किया. इस दौरान उन्होंने ब्यूटी, फैशन, फूड, होम रेमेडीज, गार्डनिंग, होम डेकोर और पेरेंटिंग जैसे विषयों पर भी काम किया. इस अनुभव के दौरान शादमा ने अलग-अलग क्षेत्रों के कई विशेषज्ञों के साथ काम किया है. एक्सपर्ट ओपीनियन के आधार पर वह रीडर्स तक सटीक और आसान शब्दों में चीजों को पहुंचाने का काम कर रही हैं. शादमा मुस्कान का कुल अनुभव  कुल अनुभव - 5 साल डिग्री- शादमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के डॉ. भीमराव अंबेडकर कॉलेज से बीजेएमसी (BJMC) और दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस से पीजी डिप्लोमा किया है. उन्होंने गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय हिसार से एमजेएमसी (MJMC) की पढ़ाई भी की है. पिछला अनुभव- शादमा ने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की। इसके बाद हरिभूमि और जागरण न्यू मीडिया के हरजिंदगी में अपनी पत्रकारिता की समझ और अनुभव को और मजबूत किया. तहजीब टीवी में भी उन्होंने काम किया. इस दौरान उन्होंने ब्रेकिंग न्यूज, सोशल मीडिया से लेकर न्यूज रूम की बेसिक समझ हासिल की. अब ज्यादा फोकस हेल्थ और लाइफस्टाइल की बीट पर है. किस क्षेत्र में महारत शादमा मुस्कान को लाइफस्टाइल, ट्रैवल, फूड और हेल्थ से जुड़े विषयों के बारे में काफी अच्छी जानकारी है. इसके अलावा शादमा को फूड रिव्यू, किचन गाइड, फैशन टिप्स, शॉपिंग गाइड, ब्यूटी, रिलेशनशिप और इंटीरियर गाइड के विषय में भी विशेषज्ञों से बातचीत के साथ विस्तृत लेखन में महारत हासिल है.

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