---विज्ञापन---

सांस लेने में दिक्कत होना COPD का लक्षण तो नहीं? डॉक्टर ने बताया किन लोगों को हो सकती है फेफड़ों की यह बीमारी

Lung Disease Symptoms: डॉ. करण मदान, प्रोफेसर, पल्मोनरी, क्रिटिकल केयर एंड स्लीप मेडिसिन विभाग, एम्स, नई दिल्ली, बता रहे हैं फेफड़ों की बीमारी सीओपीडी क्या है और सांस संबंधी दिक्कतें इसका लक्षण हैं या नहीं.

---विज्ञापन---

Lung Disease Symptoms: सांस लेने में दिक्कत होना फेफड़ों की दिक्कत का लक्षण है या नहीं एक बड़ा सवाल है और इस सवाल का जवाब दे रहे हैं AIIMS नई दिल्ली के पल्मोनरी, क्रिटिकल केयर एंड स्लीप मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डॉ. करण मदान. डॉक्टर बताते हैं कि COPD का मतलब है क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज. इसे आसान भाषा में समझें तो यह प्रगतिशील फेफड़ों की बीमारी है. इसमें सांस लेना मुश्किल हो जाता है. सीओपीडी से पीड़ित लोगों को ऐसा महसूस होता है जैसे कि एक छोटे पतले पाइप से सांस लेने की कोशिश की जा रही हो. ऐसे में सीओपीडी के क्या लक्षण होते हैं और इसका क्या इलाज है यह जानना जरूरी है.

यह भी पढ़ें – Prostate Cancer Awareness Month: पुरुषों में ये 5 दिक्कतें प्रोस्टेट कैंसर का हो सकती हैं लक्षण, पेशाब से जुड़ी समस्या समझने की ना करें भूल

---विज्ञापन---

सीओपीडी क्या है

सीओपीडी में क्रोनिक का मतलब है कि ये बीमारी जल्दी ठीक नहीं होती, ऑब्सट्रक्टिव यानी सांस के रास्ते में रुकावट होती है, पल्मोनरी यानी फेफड़ों से जुड़ा हुआ. सीओपीडी एक ऐसी स्थिति है जिसमें फेफड़ों में हवा का आना-जाना सीमित या ब्लॉक हो जाता है. यह दुनिया की सबसे आम लेकिन पहचान में ना आने वाली श्वसन बीमारियों में से एक है.

हमारे फेफड़े छोटे-छोटे एयर सैक्स से बने होते हैं. स्वस्थ फेफड़ों में हवा आसानी से अंदर-बाहर जाती है. लेकिन, सीओपीडी में ये एयरवेज सूज जाते हैं और संकरे हो जाते हैं. एयर सैक्स अपनी लचक खो देते हैं और डैमेज हो जाते हैं. म्यूकस जमा होकर सांस के रास्ते को ब्लॉक कर देता है. इन सबकी वजह से सांस लेना मुश्किल हो जाता है और खासकर सांस छोड़ना मुश्किल होता है.

---विज्ञापन---

सीओपीडी के 2 मुख्य प्रकार होते हैं –

सीओपीडी क्रोनिक ब्रोंकाइटिस जिसमें एयरवे में सूजन और ज्यादा म्यूकस बनता है .एम्फिसीमा जिसमें एयर सैक्स डैमेज होकर अपनी लचक खो देते हैं. इसके परिणाम होता है धीरे-धीरे बढ़सी सांस फूलना, लगातार खांसी और रोजमर्रा के काम में परेशानी.

---विज्ञापन---

क्या सीओपीडी सिर्फ धूम्रपान करने वालों की बीमारी है

लोगों को अक्सर लगता है कि सीओपीडी धूम्रपास से होने वाली बीमारी है, हालांकि धूम्रपान इसका सबसे बड़ा कारण है लेकिन सिर्फ यही इसके होने की वजह नहीं है. यह बीमारी सिर्फ धूम्रपान करने वालों को होती है यह सोचना गलत है. ऐसा सोचने के चलते ही बहुत से लोग समय पर जांच और इलाज नहीं करा पाते हैं.

---विज्ञापन---

सीओपीडी होने के क्या कारण हैं

  • धूम्रपान करने के अलावा सीओपीडी के और भी कई कारण हैं, जैसे चूल्हे के धुएं या बायोमास फ्यूल से लंबे समय तक संपर्क, खासकर ग्रामीण भारत की महिलाओं में जिन्होंने कभी स्मोक नहीं किया.
  • काम के दौरान धूल, केमिकल या धुएं के संपर्क में आना, जैसे निर्माण कार्य, खदान का काम या खेती के कामों में.
  • शहरों में लंबे समय तक वायु प्रदूषण का असर, बचपन में बार-बार होने वाले सांस के इंफेक्शन जो फेफड़े के विकास को प्रभावित करते हैं.

जेनेटिक कारण जैसे अल्फा एंटीट्रिप्सिन की कमी.

---विज्ञापन---

भारत में सीओपीडी के कई मरीज स्मोकर नहीं होते. ऐसे में यह सिर्फ सिगरेट की बात नहीं है बल्कि यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि आपके फेफड़े सालों तक किन चीजों के संपर्क में रहे हैं. खासकर सबसे जरूरी बात यह है कि सीओपीडी बीमारी धीरे-धीरे सालों में विकसित होती है.

सीओपीडी के क्या लक्षण होते हैं

---विज्ञापन---
  • थोड़ी सी मेहनत में सांस फूलना
  • लगातार खांसी होना
  • सांस लेते समय सीटी जैसी आवाज आना
  • छाती में जकड़न महसूस होना
  • बार-बार छाती के इंफेक्शन होना

डॉक्टर बताते हैं कि कई लोग इन लक्षणों (COPD Symptoms) को आम दिक्कत जैसे कमजोरी या उम्र का असर समझकर नजरअंदाज कर देते हैं. लेकिन, यह उससे कई ज्यादा गंभीर हो सकता है.

COPD की जांच और इलाज

---विज्ञापन---

अगर किसी में सीओपीडी के लक्षण और जोखिम कारक हैं तो जांच जरूर करानी चाहिए. सीओपीडी की पहचान स्पाइरोमेट्री नाम के एक आसान और बिना दर्द वाले टेस्ट से होती है. इसमें आपको एक मशीन में जोर से सांस लेकर छोड़नी होती है. इसके बाद एक इनहेल्ड दवा देने के बाद दोबारा टेस्ट किया जाता है ताकि देखा जा सके कि एयरवेज कितना खुलते हैं. यह टेस्ट सिर्फ कुछ मिनटों में ही हो जाता है.

सीओपीडी पूरी तरह ठीक नहीं होती लेकिन सही इलाज से इसे अच्छे से कंट्रोल किया जा सकता है. सही इलाज और लाइफस्टाइल में बदलाव के साथ लोग सही तरह से सांस ले सकते हैं और सामान्य जीवन जी सकते हैं. इलाज में इनहेलर्स, पल्मोनरी रिहैबिलिटिशन और गंभीर मामलों में ऑक्सीजन थेरेपी दी जा सकती है.

---विज्ञापन---

यह भी पढ़ें – पैरों पर नीली-हरी धारियां वेरिकोज वेन्स का हो सकती हैं लक्षण, कभी ना करें ये 3 काम नहीं तो बढ़ जाएगी दिक्कत
अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.

Source- AIIMS

First published on: Sep 16, 2026 11:47 AM

End of Article

About the Author

Seema Thakur

सीमा ठाकुर पत्रकारिता से पिछले 7 सालों से जुड़ी हैं. न्यूज24 में सीमा बतौर चीफ सब एडिटर काम कर रही हैं. सीमा हेल्थ और लाइफस्टाइल बीट पर लिखती हैं और कॉन्टेन्ट क्रिएशन के साथ ही टीम लीड की भूमिका भी निभा रही हैं. न्यूज24 में सीमा ने अपनी बीट से हटकर इलेक्शंस की स्टोरीज पर भी काम किया है. हेल्थ और लाफस्टाइल से जुड़ी स्टडीज, लेटेस्ट न्यूज और एक्सपर्ट्स/डॉक्टर्स से बातचीत पर आधारित लेख लिखने में सीमा की मजबूत पकड़ है. सीमा हेल्थ खबरों और लेटेस्ट अपडेट के लिए AIIMS, ICMR, WHO,  स्वास्थ्य मंत्रालय जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों और डॉक्टरों के संपर्क में रहती है. अनुभव सीमा ने पत्रकारिता की शुरुआत दिल्ली प्रेस ग्रुप से की थी जहां वे सरिता, मुक्ता और गृहशोभा मैग्जीन में वुमेन ओरिएंटेड, सोशल, लाइफस्टाइल, हेल्थ और बॉलीवुड के अलावा पॉलिटकल आर्टिकल्स लिखती थीं. सीमा को प्रूफरीडिंग और एडिटिंग का भी खासा अनुभव है. प्रिंट में काम करने के दौरान सीमा की हिंदी भाषा में अच्छी पकड़ है. दिल्ली प्रेस के बाद सीमा डायमंड पब्लिशिंग हाउस से जुड़ी थीं जहां उन्होंने मैग्जीन और वेबसाइट दोनों के लिए काम किया. डायमंड पब्लिशिंग हाउस के बाद सीमा ने NDTV के साथ डिजिटल मीडिया में अपना करियर शुरू किया. NDTV में सीमा ने राइटर के साथ ही वीडियो प्रोड्यूसर, एंकर और पॉडकास्टर के तौर पर भी काम किया. लाइफस्टाइल वीडियोज और बॉलीवुड गोल्ड सीरीज को प्रोड्यूस और एंकर करने के साथ ही वे बॉलीवुड पॉडकास्ट किया करती थीं. वीडियो प्रोडक्शन में सीमा का इंटरेस्ट और पकड़ यहीं से आई है. शिक्षा सीमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज से बी.ए किया है. इसके बाद जामिया मिलिया इस्लामिया से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. जामिया की पीजी डिप्लोमा इन जर्नलिज्म डिपार्टमेंट की मैग्जीन में सीमा स्टूडेंट एडिटर और अपने बैच की कॉन्टेंट हेड रह चुकी हैं. अनुभव - 7 साल शिक्षा - जामिया मिलिया इस्लामिया से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा पिछला अनुभव - NDTV, दिल्ली प्रेस, डायमंड पब्लिशिंग हाउस

Read More
---विज्ञापन---
संबंधित खबरें
Sponsored Links by Taboola