भारत में लॉन्च हुआ 7 मिनट कैंसर शॉट, बदल सकती है इलाज की सूरत लेकिन आसमान छूती कीमत
7 Minute Cancer Shot: भारत में 7 मिनट कैंसर शॉट से कैंसर का इलाज आसान हो सकता है. इससे मरीज को थेरैपी के लिए घंटों तक अस्पताल में नहीं रहना पड़ता है. ऐसे में यहां जानिए किन कैंसर मरीजों को इस शॉट से फायदा मिल सकता है, इसकी क्या कीमत है और यह किस तरह से काम करता है.
Written By: Seema Thakur|Updated: May 15, 2026 12:08
Edited By : Seema Thakur|Updated: May 15, 2026 12:08
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किन मरीजों को दिया जा सकता है यह इंजेक्शन
हाइलाइट्स
News24 AI द्वारा निर्मित • संपादकीय टीम द्वारा जांचा गया
कैंसर उपचार में नई प्रगति
भारत में कैंसर के इलाज के लिए एक नया इंजेक्शन लॉन्च किया गया है।
यह इंजेक्शन कैंसर इम्यूनोथेरैपी ड्रग एटेज़ोलिज़ुमाब है, जो टेसेंट्रिक ब्रांड नाम से उपलब्ध है।
यह इंजेक्शन केवल 7 मिनट में दिया जा सकता है, जिससे मरीजों को अस्पताल में कम समय बिताना पड़ेगा।
पारंपरिक उपचारों से अंतर
पारंपरिक इम्यूनोथेरैपी या कीमोथेरैपी के लिए कैंसर के मरीजों को लंबे समय तक अस्पताल में रहना पड़ता है।
Cancer Shot: कैंसर के इलाज के लिए आमतौर पर इम्यूनोथेरैपी या कीमोथेरैपी दी जाती है. लेकिन, इन थेरैपी के लिए कैंसर के मरीजों को देर तक अस्पताल में रहना पड़ता है. ऐसे में भारत में एक नया कैंसर इंजेक्शन आया है. कैंसर के इलाज के लिए कैंसर इम्यूनोथेरैपी ड्रग एटेज़ोलिज़ुमाब (Immunotherapy Drug Atezolizumab) लॉन्च हुआ है जो भारत में टेसेंट्रिक ब्रांड नाम से उपलब्ध है. कैंसर की इस इंजेक्शन थेरैपी से मरीजों को घंटों तक अस्पताल में नहीं रहना पड़ेगा. यह इंजेक्शन 7 मिनट में ही कैंसर के मरीज को दिया जा सकता है.
इम्यूनोथेरैपी शॉट उन मरीजों के लिए है जो नॉन-स्मॉल सेल लंग कैंसर (Lung Cancer) से पीड़त हैं. भारत में इसके हर साल 81,000 से ज्यादा मामले देखे जाते हैं. लेकिन, यह शॉट इस टाइप के कैंसर से पीड़ित हर मरीज को नहीं दिया जा सकता है. यह PD-L1 रिसेप्टर्स को टार्गेट करता है. इसीलिए जिन मरीजों के कैंसर सेल्स में ये रिसेप्टर्स हैं सिर्फ वही इस ट्रीटमेंट का फायदा उठा सकते हैं. ऐसे में आधे से ज्यादा मरीज इस ट्रीटमेंट के लिए योग्य हैं.
कितनी है इस ड्रग की कीमत
इस 7 मिनट कैंसर शॉट की कीमत ज्यादा है. इसकी एक डोज तकरीबन 3.7 लाख रुपए है, ज्यादातर मरीजों को इलाज के लिए इसकी 6 डोज चाहिए होंगी. इस ड्रग को केंद्र सरकार स्वास्थ्य योजना में भी शामिल किया गया है. लेकिन, इंट्रावेनस वर्जन्स के लिए 1,200 एमजी के मुकाबले 1,800 एमजी डोज है, ऐसे में दोनों की कीमत में 25,000 से 30,000 के बीच का फर्क होगा. लेकिन, अस्पताल में भर्ती होने समेत अन्य खर्चों के साथ आखिर में डोज की कीमत ज्यादा ही होगी.
कैसे काम करता है यह इंजेक्शन
एटेज़ोलिज़ुमाब कैंसर की इम्यून सिस्टम से छुपने की क्षमता उससे छीनकर कैंसर कंट्रोल करने में मदद करता है. इससे इम्यून सिस्टम यानी शरीर की रोग प्रतिरोधक प्रणाली कैंसर की सेल्स को ढूंढ-ढूंढकर अटैक करती है. आमतौर पर इम्यून सेल्स यानी टी सेल्स शरीर की जांच करती रहती हैं और एब्नॉर्मल कोशिकाओं को नष्ट कर देती हैं, लेकिन कैंसर की सेल्स खुद को प्रोटेक्ट करने के लिए प्रोटीन PD-L1 की तरह सतह पर शो होती हैं. कैंसर सेव्स प्रोटीन रिसेप्टर्स से चिपककर इम्यून सेल्स को गलत सिग्रनल देती हैं जिससे इम्यून सेल्स इन कोशिकाओं पर हमला नहीं करती हैं. इससे कैंसर लगातार बढ़ता जाता है.
एटेज़ोलिज़ुमाब PD-L1 प्रोटीन से चिपक जाता है और कैंसर के संपर्क को ब्लॉक करता है. जब यह गलत सिग्नल बंद होता है तो टी सेल्स कैंसर को पहचान लेती हैं और उनपर हमला करने लगती हैं. इससे इम्यून सेल्स कैंसर की सेल्स को खत्म करने में असरदार होती हैं.
अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.
Cancer Shot: कैंसर के इलाज के लिए आमतौर पर इम्यूनोथेरैपी या कीमोथेरैपी दी जाती है. लेकिन, इन थेरैपी के लिए कैंसर के मरीजों को देर तक अस्पताल में रहना पड़ता है. ऐसे में भारत में एक नया कैंसर इंजेक्शन आया है. कैंसर के इलाज के लिए कैंसर इम्यूनोथेरैपी ड्रग एटेज़ोलिज़ुमाब (Immunotherapy Drug Atezolizumab) लॉन्च हुआ है जो भारत में टेसेंट्रिक ब्रांड नाम से उपलब्ध है. कैंसर की इस इंजेक्शन थेरैपी से मरीजों को घंटों तक अस्पताल में नहीं रहना पड़ेगा. यह इंजेक्शन 7 मिनट में ही कैंसर के मरीज को दिया जा सकता है.
इम्यूनोथेरैपी शॉट उन मरीजों के लिए है जो नॉन-स्मॉल सेल लंग कैंसर (Lung Cancer) से पीड़त हैं. भारत में इसके हर साल 81,000 से ज्यादा मामले देखे जाते हैं. लेकिन, यह शॉट इस टाइप के कैंसर से पीड़ित हर मरीज को नहीं दिया जा सकता है. यह PD-L1 रिसेप्टर्स को टार्गेट करता है. इसीलिए जिन मरीजों के कैंसर सेल्स में ये रिसेप्टर्स हैं सिर्फ वही इस ट्रीटमेंट का फायदा उठा सकते हैं. ऐसे में आधे से ज्यादा मरीज इस ट्रीटमेंट के लिए योग्य हैं.
कितनी है इस ड्रग की कीमत
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इस 7 मिनट कैंसर शॉट की कीमत ज्यादा है. इसकी एक डोज तकरीबन 3.7 लाख रुपए है, ज्यादातर मरीजों को इलाज के लिए इसकी 6 डोज चाहिए होंगी. इस ड्रग को केंद्र सरकार स्वास्थ्य योजना में भी शामिल किया गया है. लेकिन, इंट्रावेनस वर्जन्स के लिए 1,200 एमजी के मुकाबले 1,800 एमजी डोज है, ऐसे में दोनों की कीमत में 25,000 से 30,000 के बीच का फर्क होगा. लेकिन, अस्पताल में भर्ती होने समेत अन्य खर्चों के साथ आखिर में डोज की कीमत ज्यादा ही होगी.
कैसे काम करता है यह इंजेक्शन
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एटेज़ोलिज़ुमाब कैंसर की इम्यून सिस्टम से छुपने की क्षमता उससे छीनकर कैंसर कंट्रोल करने में मदद करता है. इससे इम्यून सिस्टम यानी शरीर की रोग प्रतिरोधक प्रणाली कैंसर की सेल्स को ढूंढ-ढूंढकर अटैक करती है. आमतौर पर इम्यून सेल्स यानी टी सेल्स शरीर की जांच करती रहती हैं और एब्नॉर्मल कोशिकाओं को नष्ट कर देती हैं, लेकिन कैंसर की सेल्स खुद को प्रोटेक्ट करने के लिए प्रोटीन PD-L1 की तरह सतह पर शो होती हैं. कैंसर सेव्स प्रोटीन रिसेप्टर्स से चिपककर इम्यून सेल्स को गलत सिग्रनल देती हैं जिससे इम्यून सेल्स इन कोशिकाओं पर हमला नहीं करती हैं. इससे कैंसर लगातार बढ़ता जाता है.
एटेज़ोलिज़ुमाब PD-L1 प्रोटीन से चिपक जाता है और कैंसर के संपर्क को ब्लॉक करता है. जब यह गलत सिग्नल बंद होता है तो टी सेल्स कैंसर को पहचान लेती हैं और उनपर हमला करने लगती हैं. इससे इम्यून सेल्स कैंसर की सेल्स को खत्म करने में असरदार होती हैं.
अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.