जयललिता मौत: पैनल ने सहयोगी शशिकला को ठहराया दोषी, जांच की सिफारिश
Edited By Gyanendra Sharma

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नई दिल्ली: तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता की मौत की जांच न्यायमूर्ति ए अरुमुघस्वामी जांच आयोग की। उनकी मौत 2016 में हुई थी। पैनल ने शशिकला को दोषी माना है और उनके खिलाफ जांच कराने के सिफारिश की है।
मंगलवार को तमिलनाडु सरकार ने विधानसभा में जयललिता की मौत और राज्य के थूथुकुडी में 2018 की पुलिस फायरिंग के आसपास की परिस्थितियों को देखने वाले अलग-अलग जांच आयोगों की रिपोर्ट पेश की। पैनल ने शशिकला के साथ अन्य का भी नाम लिया है। जस्टिस अरुणा जगदीशन कमीशन ऑफ इंक्वायरी ने 2018 में स्टरलाइट विरोधी प्रदर्शनकारियों पर थूथुकुडी में पुलिस फायरिंग की जांच की। इस हादसे में 13 लोगों की जान गई थी। आयोग ने इसके लिए पुलिस अधिकारियों को दोषी ठहराया है।
रिपोर्ट में सिफारिश की गई है कि द्रमुक के नेतृत्व वाली सरकार को शशिकला, पूर्व मुख्य सचिव राम मोहन राव, पूर्व स्वास्थ्य मंत्री सी विजयभास्कर और कुछ अन्य लोगों की जांच करनी चाहिए। राज्य मंत्रिमंडल ने 600 पन्नों की रिपोर्ट पर चर्चा की और फैसला किया कि वे सिफारिशों के संबंध में कानूनी विशेषज्ञों से सलाह लेंगे।
द्रमुक ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में वादा किया था कि वे जयललिता की मौत के बारे में ‘सच्चाई सामने लाएंगे’। जयललिता को 22 सितंबर, 2016 को चेन्नई के अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया था और उस वर्ष 5 दिसंबर को उनकी मृत्यु होने तक 75 दिनों तक उनका इलाज किया गया था।
सुप्रीम कोर्ट, 30 नवंबर, 2021 को अपोलो अस्पताल की उस याचिका पर सहमत हो गया जिसमें एम्स को अरुमुघस्वामी आयोग की सहायता के लिए एक मेडिकल बोर्ड का गठन करने का निर्देश दिया गया था। उसके अस्पताल में भर्ती होने और बाद में मौत के रहस्य के आरोपों के बाद, तत्कालीन अन्नाद्रमुक सरकार ने 2017 में एडप्पादी पलानीस्वामी के साथ विलय से पहले अन्नाद्रमुक नेता ओ पनीरसेल्वम द्वारा बातचीत के तहत एक समझौते के तहत आयोग का गठन किया था।
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