गंदे, बदबूदार पानी को कैसे आसानी से साफ कर लेता है STP? जानिए आखिर क्या है इसके पीछे का साइंस
How STP works: क्या आप जानते हैं नाले का काला, गंदा बदबूदार पानी STP में जाकर कैसे साफ हो जाता है? आइए जानते हैं इस रहस्य के पीछे की हकीकत.
Written By: Azhar Naim|Updated: Jun 10, 2026 15:40
Edited By : Azhar Naim|Updated: Jun 10, 2026 15:40
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गंदा पानी कैसे साफ होता है? (Image: AI)
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अक्सर लोगों के मन में सवाल रहता है कि शहर व कस्बों में घनी आबादी है, जिसको लेकर सवाल मन में आता है कि गंदे पानी यानी सीवेज का पानी कैसे साफ होकर नदियों में छोड़ा जाता है. अगर इन नालों के पानी को सीधे नदियों व नहरों में छोड़ दिया जाए, तो इससे नदियां गंदी व प्रदूषित हो सकती है. यही वजह है कि हर राज्य के अलग-अलग शहरों में कई एसटीपी व्यवस्था मौजूद है, जो शहर व उद्योगों से निकलने वाले सभी गंदे पानी को साफ करके दोबारा इस्तेमाल में लाने लायक बनाते हैं.
STP सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट एक ऐसी तकनीकी सिस्टम है. इस सिस्टम की मदद से गंदे पानी में से ठोस कचरा, हानिकारक बैक्टीरिया, रसायन और अन्य प्रदूषक तत्वों का अलग कर साफ किया जाता है. इस पूरी प्रक्रिया में गंदा पानी साफ और इस्तेमाल लायक हो जाता है या फिर उसे नदियों में छोड़ दिया जाता है, ताकि नदियां साफ रहे. इस सफाई में कई चरण होते हैं, जिसके तहत पानी ठीक से साफ होता है, किसी भी चरण में हल्की गलती पानी की गुणवत्ता प्रभावित करती है.
कैसे होती है पानी की सफाई जानिए आसान शब्दों में
पानी की सफाई के लिए सबसे पहले सीवेज प्लांट तक गंदा पानी पहुंचाया जाता है, जहां पानी की स्क्रीनिंग होती है.
इस दौरान पानी में मौजूद ठोस, कपड़े के टुकड़े आदि चीजों को जालियों की मदद से अलग किया जाता है और सिर्फ पानी को आगे भेजा जाता है.
स्क्रीनिंग पूरी होने के बाद पानी को बड़े टैंकरों में भेजा जाता है, जहां भारी कण नीचे बैठ जाते हैं. यानी इस प्रोसेस में कीचड़ और पानी अलग-अलग हो जाते हैं, इस पूरी प्रक्रिया को सेडिमेंटेशन कहते हैं.
पानी की सफाई में एक सबसे जरूरी चरण जैविक उपचार होता है. इस स्टेज में कुछ खास तरह के सूक्ष्मजीव और बैक्टीरिया को गंदे पानी में छोड़ा जाता है, जो गंदे पानी में मौजूद जैविक कचरे को तोड़ते हैं. इसे एक्टिवेटेड स्लज प्रोसेस जैसी आधुनिक तकनीकों की मदद से किया जाता है.
इसके बाद ओजोन या अल्ट्रावायलेट (यूवी) तकनीक से पानी को कीटाणुरहित किया जाता है यानी पानी में मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया और वायरस नष्ट हो जाते हैं.
इन तमाम स्टेज के बाद पानी काफी हद तक साफ और सुरक्षित हो जाता है और उसे दोबारा इस्तेमाल में लिया जाता है.
अक्सर लोगों के मन में सवाल रहता है कि शहर व कस्बों में घनी आबादी है, जिसको लेकर सवाल मन में आता है कि गंदे पानी यानी सीवेज का पानी कैसे साफ होकर नदियों में छोड़ा जाता है. अगर इन नालों के पानी को सीधे नदियों व नहरों में छोड़ दिया जाए, तो इससे नदियां गंदी व प्रदूषित हो सकती है. यही वजह है कि हर राज्य के अलग-अलग शहरों में कई एसटीपी व्यवस्था मौजूद है, जो शहर व उद्योगों से निकलने वाले सभी गंदे पानी को साफ करके दोबारा इस्तेमाल में लाने लायक बनाते हैं.
STP सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट एक ऐसी तकनीकी सिस्टम है. इस सिस्टम की मदद से गंदे पानी में से ठोस कचरा, हानिकारक बैक्टीरिया, रसायन और अन्य प्रदूषक तत्वों का अलग कर साफ किया जाता है. इस पूरी प्रक्रिया में गंदा पानी साफ और इस्तेमाल लायक हो जाता है या फिर उसे नदियों में छोड़ दिया जाता है, ताकि नदियां साफ रहे. इस सफाई में कई चरण होते हैं, जिसके तहत पानी ठीक से साफ होता है, किसी भी चरण में हल्की गलती पानी की गुणवत्ता प्रभावित करती है.
कैसे होती है पानी की सफाई जानिए आसान शब्दों में
पानी की सफाई के लिए सबसे पहले सीवेज प्लांट तक गंदा पानी पहुंचाया जाता है, जहां पानी की स्क्रीनिंग होती है.
इस दौरान पानी में मौजूद ठोस, कपड़े के टुकड़े आदि चीजों को जालियों की मदद से अलग किया जाता है और सिर्फ पानी को आगे भेजा जाता है.
स्क्रीनिंग पूरी होने के बाद पानी को बड़े टैंकरों में भेजा जाता है, जहां भारी कण नीचे बैठ जाते हैं. यानी इस प्रोसेस में कीचड़ और पानी अलग-अलग हो जाते हैं, इस पूरी प्रक्रिया को सेडिमेंटेशन कहते हैं.
पानी की सफाई में एक सबसे जरूरी चरण जैविक उपचार होता है. इस स्टेज में कुछ खास तरह के सूक्ष्मजीव और बैक्टीरिया को गंदे पानी में छोड़ा जाता है, जो गंदे पानी में मौजूद जैविक कचरे को तोड़ते हैं. इसे एक्टिवेटेड स्लज प्रोसेस जैसी आधुनिक तकनीकों की मदद से किया जाता है.
इसके बाद ओजोन या अल्ट्रावायलेट (यूवी) तकनीक से पानी को कीटाणुरहित किया जाता है यानी पानी में मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया और वायरस नष्ट हो जाते हैं.
इन तमाम स्टेज के बाद पानी काफी हद तक साफ और सुरक्षित हो जाता है और उसे दोबारा इस्तेमाल में लिया जाता है.