फिलिस्तीनी के संगठन हमास ने सोमवार को अपने नए प्रमुख के नाम का ऐलान कर दिया है. इजराइल के साथ सीजफायर वार्ताओं में हमास के मुख्य वार्ताकार रहे खलील अल-हय्या को संगठन के राजनीतिक ब्यूरो का नया प्रमुख चुना गया है. वह पूर्व चीफ याह्या अल-सिनवार की जगह लेंगे. हमास ने एक आधिकारिक बयान जारी कर कहा, 'इस्लामिक रेजिस्टेंस मूवमेंट शहीद नेता याह्या अल-सिनवार के उत्तराधिकारी के रूप में भाई मुजाहिद खलील अल-हय्या को आंदोलन के राजनीतिक ब्यूरो के प्रमुख के रूप में चुने जाने की घोषणा करता है.'

खालिद मशाल को दी शिकस्त

1960 में जन्मे खलील अल-हय्या ने इस शीर्ष पद की रेस में हमास के पूर्व प्रमुख और अनुभवी नेता खालिद मशाल को पटखनी दी है. न्यूज एजेंसी एएफपी ने हमास के एक वरिष्ठ अधिकारी के हवासे लिखा है कि खलील अल-हय्या को भारी बहुमत से चुना गया है. उम्मीद जताई जा रही है कि वह अगले सप्ताह औपचारिक रूप से अपना पद संभाल लेंगे.

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इस चुनाव के बाद अब आगामी कुछ दिनों के भीतर तुर्की के इस्तांबुल में हमास के राजनीतिक ब्यूरो की एक बड़ी बैठक होने जा रही है. इस बैठक में कमेटियों का गठन किया जाएगा और हमास के नेतृत्व निकायों के पुनर्गठन की प्रक्रिया शुरू होगी.

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खुफिया तरीके से हुआ चुनाव

हमास के सूत्रों के मुताबिक, इजराइल द्वारा संगठन के कई राजनीतिक और सैन्य नेताओं की हालिया हत्याओं और गंभीर सुरक्षा स्थिति को देखते हुए यह चुनाव प्रक्रिया बेहद जटिल और गुप्त तंत्र के जरिए पूरी की गई. सिनवार की मौत के बाद से हमास का संचालन वरिष्ठ अधिकारी मोहम्मद दरविश के नेतृत्व में एक पांच सदस्यीय लीडरशिप काउंसिल कर रही थी. अब खलील अल-हय्या के चुने जाने के बाद इस पांच सदस्यीय नेतृत्व परिषद को भंग कर दिया जाएगा और इसके सदस्य समूह की शूरा काउंसिल को अपना इस्तीफा सौंपेंगे.

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इसके साथ ही हमास की सैन्य शाखा 'इज्ज़ुद्दीन अल-कसाम ब्रिगेड' ने भी हय्या को अपना पूर्ण समर्थन देने का एलान किया है.

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कई बार बच चुके हैं हय्या

खलील अल-हय्या को हमास का एक बेहद कड़ा और कूटनीतिक चेहरा माना जाता है. पिछले साल कतर के दोहा में हुए एक इजराइली हवाई हमले में वह बाल-बाल बच गए थे, हालांकि उस घातक हमले में उनके एक बेटे की मौत हो गई थी. अब याह्या सिनवार की मौत के दो साल बाद हमास की कमान उनके हाथों में आने से मिडिल ईस्ट के पूरे घटनाक्रम और इजराइल-हमास के बीच भविष्य की वार्ताओं पर इसका बड़ा असर देखने को मिल सकता है.

खलील अल-हय्या साल 1987 में हमास की स्थापना के वक्त से ही संगठन के साथ जुड़े हुए हैं. इसके अलावा वह साल 2006 से फिलिस्तीनी विधायी परिषद के सदस्य की भी भूमिका निभा रहे हैं. शिक्षा की बात करें तो पीएचडी की डिग्री धारक अल-हय्या ने इस्लामिक यूनिवर्सिटी ऑफ गाजा से BA किया है, फिर जॉर्डन यूनिवर्सिटी से हदीस में मास्टर्स किया.