ईरान पीस डील को लेकर US से क्यों नाराज हुआ इजरायल? राजदूत अजार ने बताया ट्रंप से कहां हुई 'गलती'

युद्ध की शुरुआत में डोनाल्ड ट्रंप और इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू दोनों ने ईरान के मिसाइल प्रोग्राम को रोकने को अपनी प्राथमिकता बताया था. लेकिन इस नए समझौते में इस मुद्दे को पूरी तरह छोड़ दिया गया है.

Israel Envoy Reuven Azar

अमेरिका और ईरान के बीच हुए ऐतिहासिक शांति समझौते को लेकर मिडिल ईस्ट में नया कूटनीतिक घमासान छिड़ गया है. भारत में इजरायल के राजदूत रूवेन अजार ने इस समझौते पर बेहद तीखी प्रतिक्रिया देते हुए साफ कहा है कि इस डील में उनके देश के हितों के साथ समझौता किया गया है.

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‘इंडिया टुडे’ को दिए इंटरव्यू में राजदूत अजार ने चेतावनी दी कि यदि ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम और उसके क्षेत्रीय चरमपंथी संगठनों को बढ़ावा देने वाले एजेंडे पर रोक नहीं लगाई गई, तो यह भविष्य में एक और बड़े युद्ध की वजह बनेगा.

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ईरान की मिसाइलों और प्रॉक्सियों पर ट्रंप चुप क्यों?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पिजेशकियन के बीच हुए 14 सूत्रीय समझौते पर सवाल उठाते हुए इजरायली राजदूत ने कहा, ‘जब बात बैलिस्टिक मिसाइलों की आती है, तो इजरायल के हितों की पूरी तरह अनदेखी की गई है. हमारे लिए सबसे बड़ी चुनौती ईरान का खतरनाक मिसाइल प्रोग्राम और हिजबुल्लाह व हमास जैसे आतंकी समूहों को तेहरान से मिलने वाली फंडिंग और हथियार हैं. इसके साथ ही हमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर भी गंभीर चिंताएं हैं.’

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बता दें, युद्ध की शुरुआत में डोनाल्ड ट्रंप और इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू दोनों ने ईरान के मिसाइल प्रोग्राम को रोकने को अपनी प्राथमिकता बताया था. लेकिन इस नए समझौते में इस मुद्दे को पूरी तरह छोड़ दिया गया है, यहां तक कि ट्रंप ने यह भी कह दिया कि वे ईरान पर मिसाइल प्रोग्राम बंद करने का दबाव नहीं डालेंगे.

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ट्रंप को दोटूक जवाब

इस समझौते के तहत लेबनान को भी शामिल किया गया है, जिसके अनुसार इजरायल वहां कोई सैन्य ऑपरेशन नहीं कर सकता. इस पर इजरायली राजदूत ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा, ‘इजरायल दक्षिणी लेबनान से अपनी सेना बिल्कुल नहीं हटाएगा. हमारे हितों की रक्षा नहीं हुई है. अगर हिज्बुल्लाह हम पर हमला करता है, तो हम अपनी रक्षा करेंगे और इजरायल अपने आत्मरक्षा के अधिकार को कभी नहीं छोड़ेगा.’

राजदूत अजeर का यह बयान सीधे तौर पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को जवाब माना जा रहा है, जिन्होंने हाल ही में लेबनान में इजरायल के सैन्य अभियान पर नाराजगी जताई थी और कहा था कि अमेरिका के बिना ‘कोई इजरायल नहीं होगा.’

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‘ईरान को सैन्य रूप से हराया’

ट्रंप प्रशासन के साथ मतभेदों को स्वीकार करते हुए भी राजदूत अज़ार ने इजरायली सेना के अभियान की सफलताओं को गिनाया. उन्होंने दावा किया, ‘हमने ईरान को सैन्य रूप से पूरी तरह शिकस्त दी है. इस युद्ध में ईरान को 1 ट्रिलियन डॉलर से अधिक का नुकसान हुआ है. हमारी सेना ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई और कई शीर्ष सैन्य कमांडरों को खत्म कर हमारे देश पर मंडरा रहे वजूद के खतरे को दूर कर दिया है.’

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उन्होंने इन अटकलों को खारिज किया कि ट्रंप ने पीएम नेतन्याहू को अधर में छोड़ दिया है. अजार ने याद दिलाया कि ट्रंप ने यरूशलेम को इजरायल की राजधानी के रूप में मान्यता देने और गोलान हाइट्स पर इजरायली संप्रभुता को स्वीकार करने जैसे ऐतिहासिक काम किए हैं.

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इजरायली राजदूत ने आखिर में साफ संदेश दिया कि अमेरिका से मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन इजरायल अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है.

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लेखक के बारे में

Arif Khan

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आरिफ खान मंसूरी न्यूज 24 में बतौर डिप्टी न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. आरिफ को डिजिटल पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा अनुभव हैं. उन्होंने 2014, 2019 और 2024 के लगातार तीन लोकसभा चुनाव के अलावा पिछले 15 सालों में देशभर में हुए विधानसभा चुनावों की भी व्यापक कवरेज की है. न्यूज 24 से पहले उन्होंने देश के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की थी, यहां देश, दुनिया और पॉलिटिक्स की खबरों पर काम किया. आरिफ ने इसके बाद इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप की हिंदी वेबसाइट जनसत्ता के साथ अपनी पारी शुरू की. इसके बाद उन्होंने हिंदुस्तान टाइम्स की हिंदी न्यूज वेबसाइट लाइवहिंदुस्तान ज्वाइन कर लिया. लाइवहिंदुस्तान.कॉम के बाद वह एनडीटीवी ग्रुप के साथ जुड़ गए. एनडीटीवी में करीब छह साल तक काम करने के बाद न्यूज24 के साथ जुड़ गए. न्यूज24 में भी होमपेज की जिम्मेदारी संभालते हैं. शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से कला संकाय में स्नातक और मास्टर ऑफ जर्नलिज्म की डिग्री हासिल की है. आरिफ देश, विदेश और राजनीति से जुड़ी खबरों के अलावा एक्सप्लेनर लिखने में भी माहिर हैं.
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