जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर हुए मिसाइल हमले के बाद पश्चिम एशिया में एक बार फिर से तनाव की स्थिति पैदा हो गई है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर अमेरिकी सेना ने ईरान से जुड़े सैन्य ठिकानों पर फिर से हवाई हमले शुरू कर दिए हैं. अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई जॉर्डन स्थित अमेरिकी बलों को निशाना बनाए जाने के जवाब में की गई है और इसका उद्देश्य भविष्य में ऐसे हमलों को रोकना है.
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की ओर से जॉर्डन में तैनात अमेरिकी सैनिकों पर मिसाइल हमला करने की कोशिश की गई थी. वॉशिंगटन का दावा है कि इस हमले को विफल कर दिया गया, लेकिन इसे क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती माना गया. इसके बाद अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों और रणनीतिक लक्ष्यों पर सटीक एयरस्ट्राइक की.
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का एक बयान सामने आया है. जिसमें उन्होंने कहा कि इस वक्त जो ईरान में अमेरिका से लड़ रहा है वो कोई दूसरा ग्रुप है. ट्रंप ने कल के यूएस बेस पर ईरानी हमलों पर प्रतिक्रिया दी और कहाकि यह वह समूह नहीं था जिसका सामना हम पहले कर रहे हैं. ट्रंप का इशारा ईरान में अब IRGC के total control की तरफ है.
ट्रंप की चेतावनी के बाद ईरान पर अमेरिकी हमला 4 दिन के ब्रेक के बाद फिर से शुरू हो गया है. पिछले 5 घंटों में अमेरिकी रक्षा बलों को Borazjaan और Bandar Abbas में हवाई हमलों की सूचना मिली है. साथ ही नई अमेरिकी स्ट्राइक्स Sirik में भी की गईं.
ट्रंप ने पहले ही दी थी चेतावनी
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले ही संकेत दे दिए थे कि अगर अमेरिकी सैनिकों या सैन्य ठिकानों पर हमला हुआ तो उसका कड़ा जवाब दिया जाएगा. हमलों के बाद ट्रंप प्रशासन ने स्पष्ट किया कि अमेरिका अपने सैनिकों की सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगा और जरूरत पड़ने पर आगे भी सैन्य कार्रवाई जारी रह सकती है.
दूसरी ओर, ईरान का कहना है कि उसने अमेरिकी सैन्य मौजूदगी के खिलाफ जवाबी कार्रवाई की है. ईरानी पक्ष का दावा है कि उसके हमलों का निशाना अमेरिकी सैन्य ठिकाने थे, जबकि जॉर्डन ने अपने हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने वाली कई मिसाइलों और ड्रोन को मार गिराने की पुष्टि की है.
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ईरान को चुकानी होगी कीमत- ट्रंप
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि अमेरिका ने गुरुवार रात भारतीय समयानुसार हवाई अभियान शुरू किया. कमांड के मुताबिक, यह सैन्य कार्रवाई एक दिन पहले मध्य पूर्व में तैनात अमेरिकी सैनिकों और ठिकानों को निशाना बनाने की ईरान की कथित कोशिश के जवाब में की गई है.
इस कार्रवाई से पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट चेतावनी दी थी कि यदि अमेरिकी सैनिकों पर हमला किया गया तो उसका सख्त और प्रभावी जवाब दिया जाएगा. फॉक्स न्यूज से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका अपने सैनिकों पर किसी भी हमले को बर्दाश्त नहीं करेगा और जवाबी कार्रवाई इतनी तीव्र होगी कि ईरान को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी.
अमेरिका और सऊदी अरब ने इराक में किए हमले
इस बीच इराक में भी अमेरिका और सऊदी अरब ने ईरान समर्थित सशस्त्र समूहों के खिलाफ बड़ा सैन्य अभियान चलाया. मंगलवार देर रात दोनों देशों की संयुक्त वायुसेना ने इराक के कई इलाकों में हवाई हमले किए. पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्सेज (PMF) के अनुसार, इस कार्रवाई में कम से कम 20 लोगों की मौत हुई है.
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने बताया कि हमलों का मुख्य उद्देश्य पूर्वी इराक में मौजूद ईरान समर्थित मिलिशिया के लॉजिस्टिक नेटवर्क, हथियार भंडार और संचालन केंद्रों को निष्क्रिय करना था. अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि पिछले तीन दिनों के दौरान अमेरिकी सैन्य ठिकानों और सऊदी अरब के ऊर्जा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाकर 30 से अधिक ड्रोन हमलों की कोशिश की गई थी. वॉशिंगटन ने इन हमलों के लिए ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) को जिम्मेदार ठहराया है.