साइबेरियाई रिसर्च लैब में ऐसा क्या हुआ, जिसे कहा जा रहा वुहान पार्ट-2; क्यों क्वारंटीन किए गए 200 लोग?

साइबेरियाई लैब में हादसे के बाद सोशल मीडिया पर खबरें प्रचलित हैं कि लैब वुहान पार्ट-2 बन सकती है, क्योंकि हादसे के बाद 200 लोग क्वारंटीन किए गए हैं. लेकिन रूसी अधिकारियों ने खबरों को अफवाह करार दिया और कहा कि कोई संक्रमण नहीं मिला है, सब कुछ ठीक है.

Research Lab | Anti Plague Testing | Siberia Russia

एंटी प्लेन रिसर्च लैब में टेस्ट ट्यूब् फटने के बाद प्लेग वायरस फैलने का दावा किया गया है. CREDIT: AI/X(Visegrád 24)

रूस के साइबेरिया में शेलेखोव शहर के पास इरकुत्स्क एंटी प्लेग रिसर्च लैब में टेस्ट ट्यूब टूटने बड़ा हादसा हुआ है, जिसमें 28 साल की लैब टेक्नीशियन की मौत हो गई है. लेकिन चिंता की बात यह है कि लैब में हुए हादसे के बाद 200 लोगों को क्वारंटीन करना पड़ गया. क्योंकि हादसा एंटी प्लेग रिसर्च लैब में हुआ, इसलिए चर्चा है कि प्लेग महामारी फैल सकती है और रिसर्च लैब वुहान पार्ट-2 बन सकती है. हालांकि साइबेरिया के स्वास्थ्य अधिकारियों ने प्लेग फैलने की पुष्टि नहीं की है, लेकिन हादसे के बाद 200 लोगों को क्वारंटीन क्यों करना पड़ा? इसका जवाब स्वास्थ्य अधिकारी नहीं दे पा रहे हैं.

विज्ञापन

निमोनिया बिगड़ने से वेंटिलेटर तक पहुंची डारिया

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, लैब में सितंबर के आखिर में टेस्ट ट्यूब टूटने से फैले केमिकल की चपेट में आने से 28 वर्षीय लैब टेक्नीशियन डारिया शिपिलोवा की मौत हुई है. उन्हें निमोनिया हो गया था, जिसके कारण उनकी हालत ज्यादा बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती करना पड़ा, जहां वेंटिलेटर पर इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया. लैब स्टाफ का कहना है कि सैंपल कलेक्ट करते समय लाइव बैक्टीरिया वाली टेस्ट ट्यूब टूट गई थी. जिस बैक्टीरिया यर्सिनिया पेस्टिस के सैंपल कलेक्ट किए जा रहे थे, उसके कारण प्लेग फैलता है. इसके बाद 200 लोगों को उनके घरों और अस्पतालों में क्वारंटीन किया गया.

विज्ञापन

हादसे को लेकर क्या कहती है रूस की सरकार?

रूस की ऑफिशियल हेल्थ एजेंसी रोस्पोट्रेबनाडजोर ने डारिया को हुए निमोनिया को ‘अज्ञात कारण वाला निमोनिया’ कहा है और स्पष्ट किया है कि लैब में बीमारी फैलाने वाले बैक्टीरिया से जुड़ा कोई हादसा नहीं हुआ है. न ही लैब और इसके आस-पास के इलाके में कोई वायरस फैलने की पुष्टि हुई है. लैब टेक्नीशियन के संपर्क में आने वाले लोगों के टेस्ट किए गए हैं, लेकिन रिपोर्ट नेगेटिव आई है. टेस्ट ट्यूब टूटने से अगर कोई खतरा बढ़ा भी तो उसे कंट्रोल कर लिया गया है. लैब में हाई रिस्क वाले बैक्टीरिया के साथ काम करने से छोटी-छोटी गलतियां होती है, जिसके बड़े परिणाम निकलते हैं, लकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ.

प्लेग खतरनाक बीमारी और इलाज-वैक्सीन भी नहीं

रूस की ऑफिशियल हेल्थ एजेंसी रोस्पोट्रेबनाडजोर का कहना है कि प्लेग बहुत पुरानी बीमारी है और आज भी खतरनाक है, क्योंकि दुनिया में इसकी वैक्सीन नहीं है. इसके 3 फॉर्मेट होते हैं, जिनमें न्यूमोनिक प्लेग सबसे गंभीर होता, क्योंकि यह सांस के जरिए एक से दूसरे व्यक्ति में फैल सकता है. अगर समय पर एंटीबायोटिक न मिले तो मृत्यु दर बहुत ज्यादा हो सकती है. प्लेग की वैक्सीन बनाने के लिए ही रिसर्च चल रही है, लेकिन जैसा कहा जा रहा है, वैसा कुछ नहीं हुआ है. इसलिए इलाके के लोग शांति बनाए रखें, क्योंकि हादसे में जान गंवाने वाली लैब टेक्नीशियन डारिया शिपिलोवा के संपर्क में आने वाले लोग स्वस्थ हैं.

विज्ञापन

न्यूज 24 पर पढ़ें देश,राष्ट्रीय समाचार (National News),खेल,मनोरंजन,धर्म,लाइफ़स्टाइल,हेल्थ,शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।

First published on:

और पढ़ें: हमारे संपादकीय दिशानिर्देश और मानक यहाँ देखें।

लेख समाप्त

लेखक के बारे में

Khushbu Goyal

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.
... और पढ़ें
विज्ञापन
होम पेज पर वापस जाएँ