रूस के साइबेरिया में शेलेखोव शहर के पास इरकुत्स्क एंटी प्लेग रिसर्च लैब में टेस्ट ट्यूब टूटने बड़ा हादसा हुआ है, जिसमें 28 साल की लैब टेक्नीशियन की मौत हो गई है. लेकिन चिंता की बात यह है कि लैब में हुए हादसे के बाद 200 लोगों को क्वारंटीन करना पड़ गया. क्योंकि हादसा एंटी प्लेग रिसर्च लैब में हुआ, इसलिए चर्चा है कि प्लेग महामारी फैल सकती है और रिसर्च लैब वुहान पार्ट-2 बन सकती है. हालांकि साइबेरिया के स्वास्थ्य अधिकारियों ने प्लेग फैलने की पुष्टि नहीं की है, लेकिन हादसे के बाद 200 लोगों को क्वारंटीन क्यों करना पड़ा? इसका जवाब स्वास्थ्य अधिकारी नहीं दे पा रहे हैं.
निमोनिया बिगड़ने से वेंटिलेटर तक पहुंची डारिया
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, लैब में सितंबर के आखिर में टेस्ट ट्यूब टूटने से फैले केमिकल की चपेट में आने से 28 वर्षीय लैब टेक्नीशियन डारिया शिपिलोवा की मौत हुई है. उन्हें निमोनिया हो गया था, जिसके कारण उनकी हालत ज्यादा बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती करना पड़ा, जहां वेंटिलेटर पर इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया. लैब स्टाफ का कहना है कि सैंपल कलेक्ट करते समय लाइव बैक्टीरिया वाली टेस्ट ट्यूब टूट गई थी. जिस बैक्टीरिया यर्सिनिया पेस्टिस के सैंपल कलेक्ट किए जा रहे थे, उसके कारण प्लेग फैलता है. इसके बाद 200 लोगों को उनके घरों और अस्पतालों में क्वारंटीन किया गया.
हादसे को लेकर क्या कहती है रूस की सरकार?
रूस की ऑफिशियल हेल्थ एजेंसी रोस्पोट्रेबनाडजोर ने डारिया को हुए निमोनिया को ‘अज्ञात कारण वाला निमोनिया’ कहा है और स्पष्ट किया है कि लैब में बीमारी फैलाने वाले बैक्टीरिया से जुड़ा कोई हादसा नहीं हुआ है. न ही लैब और इसके आस-पास के इलाके में कोई वायरस फैलने की पुष्टि हुई है. लैब टेक्नीशियन के संपर्क में आने वाले लोगों के टेस्ट किए गए हैं, लेकिन रिपोर्ट नेगेटिव आई है. टेस्ट ट्यूब टूटने से अगर कोई खतरा बढ़ा भी तो उसे कंट्रोल कर लिया गया है. लैब में हाई रिस्क वाले बैक्टीरिया के साथ काम करने से छोटी-छोटी गलतियां होती है, जिसके बड़े परिणाम निकलते हैं, लकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ.
प्लेग खतरनाक बीमारी और इलाज-वैक्सीन भी नहीं
रूस की ऑफिशियल हेल्थ एजेंसी रोस्पोट्रेबनाडजोर का कहना है कि प्लेग बहुत पुरानी बीमारी है और आज भी खतरनाक है, क्योंकि दुनिया में इसकी वैक्सीन नहीं है. इसके 3 फॉर्मेट होते हैं, जिनमें न्यूमोनिक प्लेग सबसे गंभीर होता, क्योंकि यह सांस के जरिए एक से दूसरे व्यक्ति में फैल सकता है. अगर समय पर एंटीबायोटिक न मिले तो मृत्यु दर बहुत ज्यादा हो सकती है. प्लेग की वैक्सीन बनाने के लिए ही रिसर्च चल रही है, लेकिन जैसा कहा जा रहा है, वैसा कुछ नहीं हुआ है. इसलिए इलाके के लोग शांति बनाए रखें, क्योंकि हादसे में जान गंवाने वाली लैब टेक्नीशियन डारिया शिपिलोवा के संपर्क में आने वाले लोग स्वस्थ हैं.