PM Modi in Uzbekistan: यूरेनियम, सोना और गैस से समृद्ध है उज्बेकिस्तान, भारत के लिए क्यों अहम है यह ‘खजाना’?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उज्बेकिस्तान दौरे के बीच इस देश की प्राकृतिक संपदा चर्चा में है. यूरेनियम, सोना, प्राकृतिक गैस और दूसरे महत्वपूर्ण खनिजों से समृद्ध उज्बेकिस्तान भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा और क्रिटिकल मिनरल्स की जरूरत पूरी करने में अहम साझेदार बन सकता है. दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और रणनीतिक सहयोग बढ़ाने पर भी जोर है.
Edited By : Versha Singh|Updated: Aug 30, 2026 13:49
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यूरेनियम, सोना और गैस से समृद्ध है उज्बेकिस्तान, भारत के लिए क्यों अहम है यह ‘खजाना’? (फोटो- AI)
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PM Modi in Uzbekistan: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उज्बेकिस्तान दौरे के बीच मध्य एशिया का यह देश एक बार फिर चर्चा में है. वजह सिर्फ दोनों देशों के बीच बढ़ते कूटनीतिक रिश्ते नहीं, बल्कि उज्बेकिस्तान की जमीन के नीचे मौजूद प्राकृतिक संसाधनों की बड़ी संपदा भी है. सोना, यूरेनियम, प्राकृतिक गैस, तांबा और दूसरे खनिजों के भंडार ने इस देश को रणनीतिक तौर पर महत्वपूर्ण बना दिया है. ऐसे में भारत के लिए उज्बेकिस्तान के साथ संबंध मजबूत करना आर्थिक और ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से खास मायने रखता है.
यूरेनियम से लेकर सोने तक बड़ा भंडार
उज्बेकिस्तान दुनिया के प्रमुख यूरेनियम उत्पादक देशों में शामिल है. परमाणु ऊर्जा के बढ़ते इस्तेमाल के बीच यूरेनियम की मांग लगातार महत्वपूर्ण बनी हुई है. भारत भी अपनी परमाणु ऊर्जा क्षमता बढ़ाने पर जोर दे रहा है. ऐसे में उज्बेकिस्तान के साथ यूरेनियम और परमाणु ईंधन से जुड़े संभावित सहयोग को रणनीतिक नजरिए से देखा जा रहा है.
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सोना भी उज्बेकिस्तान की अर्थव्यवस्था का बड़ा आधार है. देश की प्रमुख खदानों में बड़े पैमाने पर सोने का उत्पादन होता है. इसके अलावा तांबा, चांदी, जस्ता, सीसा और दूसरे खनिज भी यहां पाए जाते हैं. हाल के दिनों में उज्बेकिस्तान ने भारतीय कंपनियों को अपने खनन और धातु क्षेत्र में निवेश के लिए आमंत्रित किया है.
Landed in Tashkent to a warm welcome by President Shavkat Mirziyoyev. Grateful to him for the special gesture.
This is my fourth visit to Uzbekistan, reflecting the depth and growing momentum of our bilateral relations.
उज्बेकिस्तान की अर्थव्यवस्था में प्राकृतिक गैस की भी अहम भूमिका है. देश में इसका इस्तेमाल बिजली उत्पादन और औद्योगिक जरूरतों के लिए होता है. अब उज्बेकिस्तान ऊर्जा क्षेत्र में निवेश और संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल पर भी जोर दे रहा है. भारत के लिए मध्य एशिया से ऊर्जा स्रोतों तक पहुंच बढ़ाना लंबे समय से रणनीतिक प्राथमिकता रही है.
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भारत के लिए क्यों खास है यह देश?
प्रधानमंत्री मोदी का मौजूदा दौरा सिर्फ खनिज और ऊर्जा तक सीमित नहीं है. भारत और उज्बेकिस्तान के बीच व्यापार, रक्षा, डिजिटल कनेक्टिविटी, शिक्षा, स्वास्थ्य और निवेश जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी जोर है. ताशकंद में मोदी और राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव के बीच बातचीत में इन क्षेत्रों के अलावा क्षेत्रीय और रणनीतिक मुद्दों पर भी चर्चा हो रही है.
भारत मध्य एशिया में अपनी मौजूदगी को मजबूत करने के लिए कनेक्टिविटी पर भी ध्यान दे रहा है. इस क्षेत्र तक सीधी जमीनी पहुंच की सीमाओं के बीच ईरान का चाबहार बंदरगाह भारत के लिए अहम विकल्प है. बेहतर कनेक्टिविटी से व्यापार और संसाधनों तक पहुंच दोनों को बढ़ावा मिल सकता है.
भारत और उज्बेकिस्तान के रिश्ते सिर्फ ऊर्जा और प्राकृतिक संसाधनों तक सीमित नहीं हैं. दोनों देशों के बीच फार्मा, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और डिजिटल क्षेत्र में भी सहयोग लगातार बढ़ रहा है. उज्बेकिस्तान में भारतीय दवाओं की अच्छी मांग है, वहीं भारतीय कंपनियों के लिए मेडिकल उपकरण, अस्पताल और हेल्थकेयर सेवाओं के क्षेत्र में भी नए अवसर बन रहे हैं.
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दोनों देशों के बीच कारोबार में पिछले कुछ सालों में तेजी आई है और द्विपक्षीय व्यापार करीब 1.3 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है. हालांकि, व्यापार को और आगे बढ़ाने में सबसे बड़ी बाधाओं में से एक बेहतर कनेक्टिविटी की कमी है. भारत से उज्बेकिस्तान तक सामान पहुंचाने के लिए कई देशों और लंबे परिवहन मार्गों पर निर्भर रहना पड़ता है, जिससे समय और लागत दोनों बढ़ते हैं. भारत इस चुनौती से निपटने के लिए ईरान के चाबहार बंदरगाह और मध्य एशिया के साथ विकसित किए जा रहे वैकल्पिक संपर्क मार्गों पर जोर दे रहा है. बेहतर परिवहन नेटवर्क तैयार होने से दोनों देशों के बीच सामान की आवाजाही आसान होगी और कारोबार के नए रास्ते खुल सकते हैं.