अमेरिकी सेना की आखिरी टुकड़ी भी ईराक छोड़ चुकी है और ISIS पर अमेरिका की जीत निर्णायक रही है. यह ऐलान अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बीते दिन किया. उन्होंने ईराक में चल रहे अमेरिकी सेना के ऑपरेशन इन्हेरेंट रिजॉल्व के खत्म होने की औपचारिक घोषणा की है. ईराक के आतंकी संगठन ISIS पर अमेरिकी सेना की जीत को निर्णायक करार दिया. 23 साल बाद अमेरिका ने ईराक को पूरी तरह खाली कर दिया है और इन 23 साल में अरबों डॉलर खर्च किए गए हैं. यह अमेरिका की जीत है, ईराक की जीत और ISIS पर जीत है, जिसका ईराक से नामोनिशां मिटा दिया गया है.
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ईराक में ISIS के खात्मे को ऐतिहासिक बताया
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने एक्स पर पोस्ट में लिखा कि आज अमेरिका के लिए बहुत बड़ा और महान दिन है. गलत फैसले लेने की वजह से अमेरिका दलदल में फंस गया था, लेकिन अब वह फैसला इतिहास बन गया है. अमेरिका खलीफा से लड़ने आया था और आज कोई खलीफा नहीं बचा है तो अब हम अपने घर जा रहे हैं. साल 2021 में अमेरिकी सेना ने अफगानिस्तान को छोड़ा था, लेकिन अफगानिस्तान की तरह ईराक में कोई सैन्य उपकरण पीछे नहीं छोड़ा है, बल्कि योजना के साथ अमेरिकी सेना ईराक से निकली है. ईराक के नए प्रधानमंत्री अली अल-जाइदी भी तारीफ-ए-काबिल हैं.
साल 2003 से ईराक में तैनात थी अमेरिकी सेना
राष्ट्रपति ट्रंप ने बताया कि ऑपरेशन इनहेरेंट रिजॉल्व अमेरिका का सैन्य अभियान था, जो ईराक में साल 2014 में शुरू हुआ था. हालांकि अमेरिकी सेना 2003 में ईराक में तैनात हुई थी और 7 साल के संघर्ष के बाद 2011 में वापस चली गई थी, लेकिन ISIS ने ईराक में फिर से आतंक मचाना शुरू कर दिया था तो अमेरिकी सेना को साल 2014 में इराक और सीरिया में इस्लामिक स्टेट (ISIS) के खिलाफ फिर से सैन्य अभियान शुरू करना पड़ा. जो बाइडने सरकार ने साल 2024 में ईरान से अमेरिकी सेना की वापसी की योजना बनाई थी, जिसे ट्रंप सरकार ने अमलीजामा पहनाया.
ईराक में तैनात अमेरिकी सेना की आखिरी टुकड़ी अब जॉर्डन में शिफ्ट हो गई है. साल 2014 में ISIS ने ईराक और सीरिया के बहुत बड़े हिस्से को कब्जा लिया था, लेकिन अमेरिकी सेना ने उन इलाकों को वापस ले लिया. ईराक और सीरिया की सेना को सैन्य मजबूती प्रदान करके क्षेत्रीय नियंत्रण स्थापित करने में मदद की.