Parmod chaudhary
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Fauzia Amin Sido Story: गाजा से बचकर लौटी एक यजीदी महिला ने अपनी खौफनाक आपबीती दुनिया को बताई है। इस महिला का नाम फौजिया अमीन सिदो है। जिसे इजराइल की सेना ने बचाया। महिला अपने साथ हुए अत्याचार को याद कर अब भी सिहर उठती है। सिदो के अनुसार ISIS आतंकियों ने सिर्फ 9 साल की उम्र में ही उसे कैद कर लिया था। उसके भाइयों को भी ISIS आतंकियों ने अपनी कैद में रखा। उसके अलावा हजारों बंधक और भी थे। ISIS आतंकी उन लोगों को सिंजर से ताल अफार ले गए। पैदल ही पूरा सफर तय किया। तीन दिन तक उन लोगों को खाने के लिए कुछ नहीं दिया। जिसके बाद उन लोगों को चावल और मांस दिया गया। मांस जब खाया तो काफी अजीब लगा। लेकिन भूख की वजह से वे लोग मजबूर रहे।
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एक इंटरव्यू में सिदो ने बताया कि कुछ लोगों के पेट में मांस और चावल खाने के बाद दर्द होने लगा। ISIS आतंकियों ने उन लोगों को बताया कि जो मांस वे खा चुके हैं, वह यजीदी बच्चों का है। जिनको हमने मौत के घाट उतार दिया है। इसके बाद उन लोगों को यकीन दिलाने के लिए उन बच्चों के फोटो दिखाए गए। ISIS आतंकियों ने कहा कि ये वही बच्चे हैं, जिनका मांस तुम लोगों ने खाया है। ISIS के लड़ाके इससे पहले भी ऐसी क्रूर हरकत कर चुके हैं। 2017 में यजीदी सांसद वियान दाखिल ने चौंका देने वाला खुलासा किया था। वियान ने कहा था कि इंसानी मांस परोसने की गलत हरकत ISIS शुरू कर चुका है।
Eine unglaubliche Geschichte:
Fauzia Amin Sido (21), eine junge Jesidin, die 2014 im Alter von 11 Jahren aus ihrem Zuhause im Irak entführt wurde, wurde aus dem Gazastreifen befreit und ist nun zu ihrer Familie in ihr Herkunftsland zurückgekehrt.
Laut verschiedenen Berichten… pic.twitter.com/STzvzCoRVz
— Ahmad Mansour 🎗️ (@AhmadMansour__) October 3, 2024
सिदो के अनुसार जब ISIS आतंकियों के मांस परोसे जाने का पता कई बंधकों को लगा तो वे सदमा सह नहीं पाए। कई बंधकों की हार्ट अटैक से मौत हो गई। लेकिन आतंकियों की यातना जारी रही। सिदो के अनुसार ISIS के तहखाने में 200 से अधिक यजीदी लड़कियों को कैद करके कई महीने रखा गया। कई बेटियों की मौत गंदा खाना खाने और पानी पीने से हो गई थी। इस तहखाने से निकालने के बाद उसको 5 बार बेचा गया। इनमें से एक लड़ाके का नाम अबू अमर अल-मकदिसी था। उसने उससे शादी की, दो बच्चे भी पैदा हुए। लेकिन सालों बाद गाजा में इजराइली सेना ने उसे बचा लिया। जिसके बाद अब अपने परिवार के पास इराक लौटी है। बच्चे अभी भी गाजा में बंधक हैं। अरबी मुस्लिम उनको पाल रहे हैं।
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