अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष अब विनाशकारी हो सकता है। क्योंकि 8 अप्रैल से जारी सीजफायर टूटने की कगार पर है। ईरान ने अमेरिका के शांति प्रस्ताव का जवाब भेज दिया है, जिससे अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप नाराज हैं। उन्होंने ईरान के साथ कोई समझौता होने की संभावनाओं से इनकार कर दिया है। ईरान के जवाब को भी खारिज कर दिया है। अब वे ईरान पर फिर से हमला करने की प्लानिंग कर रहे हैं और चर्चा है कि इस बार का हमला पूरी दुनिया को डराने और चौंकाने वाला होगा।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान का जवाब मिलने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू से फोन पर बात की। दोनों के बीच ईरान में ग्राउंड मिलिट्री ऑपरेशन चलाने पर चर्चा हुई। इस ऑपरेशन का मकसद ईरान के परमाणु ठिकानों पर कब्जा करना, संवर्धित यूरेनियम को सीज करके परमाणु केंद्रों से बाहर निकालना रहेगा। लेकिन ईरान में ग्राउंड मिलिट्री ऑपरेशन आसान नहीं होगा, क्योंकि ईरान के कंक्रीट से बने परमाणु ठिकानों से जिंदा निकलना आसान नहीं होगा।
सूत्रों के अनुसार, इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू के सवाल के जवाब में ट्रंप ने कहा है कि ईरान के परमाणु ठिकानों के अंदर जाएंगे और 440 किलो संवर्धित यूरेनियम को बाहर निकालेंगे। यह इतिहास का सबसे बड़ा ऑपरेशन होगा, जिसके लिए हजारों सैनिकों की जरूरत होगी। इसलिए ईरान के परमाणु ठिकानों पर नजर रखी जा रही है। एक स्पेस टीम भी अंतरिक्ष से ठिकानों पर नजर रखे हुए है, जो ग्राउंड मिलिट्री ऑपरेशन के समय होने वाली ईरान की गतिविधियों के बारे में पहले से बात देगी।
इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का कहना है कि आप अंदर जाएंगे और उसे(संवर्धित यूरेनियम) बाहर निकालेंगे। राष्ट्रपति ट्रंप ने मुझसे कहा है- ‘मैं वहां जाना चाहता हूं। मुझे लगता है कि इसे शारीरिक रूप से किया जा सकता है। ये कोई समस्या नहीं है। अगर समझौता नहीं होता है तो अभियान चलाकर संवर्धित यूरेनियम को अंदर से बाहर लाया जाएगा। ट्रंप और बेंजामिन के बयान से साफ है कि ईरान के परमाणु केंद्रों पर कभी भी ग्राउंड ऑपरेशन चलाया जा सकता है। ताकि संवर्धित यूरेनियम को बाहर निकाला जा सके। इसके लिए अमेरिका और ईरान को इतिहास का सबसे बड़ा ऑपरेशन चलाना होगा। जिसमें हजारों सैनिकों की जरूरत होगी।
क्या है अमेरिका और इजराइल का सीक्रेट प्लान?
माना जाता है कि फोर्दो, नतांज और इस्फहान के अंडरग्राउंड ठिकाने में संवर्धित यूरेनियम दबा हो सकता है। यहां हर वक्त बड़ी संख्या में ईरानी सेना मौजूद रहती है। जिसमें तोप और टैंकों की बड़ी टुकड़ी शामिल है। अमेरिका संवर्धित यूरेनियम को हासिल करने के लिए ग्राउंड ऑपरेशन शुरू करता है तो सबसे पहले एयरस्ट्राइक कर यहां मौजूद सैन्य तैनाती को तबाह करना होगा। जिसके बाद US और इजरायल के सैनिक हेलिकॉप्टर्स के जरिए केंद्रों के आसपास जमीन पर उतरेंगे। उनके साथ न्यूक्लियर सर्च टीम भी होगी ताकि यूरेनियम का पता लगाया जा सके। हालांकि इसके बाद भी अमेरिका और इजरायल के लिए ये ऑपरेशन इतना आसान नहीं होने वाला।
ईरान की रीढ़ हैं नतांज, फोर्दो और इस्फहान
ईरान का नतांज परमाणु केंद्र, फोर्दो संवर्धन प्लांट और इस्फहान न्यूक्लियर कॉम्प्लेक्स हैं। ये तीनों ईरान के परमाणु प्रोग्राम की रीढ़ माने जाते हैं। इजराइल ने 40 दिन के युद्ध के दौरान सबसे ज्यादा हमले ईरान के इन्हीं इलाकों पर किए थे। माना जाता है कि पहाड़ों और जमीन के नीचे बनी इन अंडरग्राउंड फैसिलिटी के एंट्री गेट पूरी तरह से तबाह हो चुके हैं। एक्सपर्ट्स अब इन परमाणु् केंद्रों को कंक्रीट की कब्र बता रहे हैं। जहां ऑपरेशन चलाना अमेरिका और इजरायल के लिए बेहद मुश्किल है।
संवर्धित यूरेनियम खोजने के लिए किन चीजों की पड़ेगी जरूरत
दरअसल अमेरिका और इजरायल की स्पेशल टीमें अगर यहां जमीन पर उतरती हैं तो परमाणु केंद्रो में एंट्री के लिए उन्हें सबसे पहले यहां मौजूद मलबे को हटाना होगा। जिसके लिए भारी मशीनरी की जरूरत होगी। यहां क्रेनें एयरलिफ्ट की जाएंगी। जिसके बाद इन दरवाजों में एंट्री का रास्ता तैयार किया जाएगा। संभव है कि फैसिलिटी के अंदर भी जगह-जगह रास्ते मलबे से ब्लॉक होंगे। ऐसे में क्रेन और ट्रकों के जरिए इन रास्तों को खोला जाएगा। जिसके बाद कहीं अमेरिकी सेना उस एरिया तक पहुंच सकेगी जहां संवर्धित यूरेनियम मौजूद हो सकता है। जिसे निकालने के लिए यूरेनियम को विशेष कंटेनरों में भरा जाएगा और ट्रकों से बाहर लाया जाएगा।
इस काम में कई दिन, हफ्ते या महीने लग सकते हैं। इस दौरान ईरान की सेना लगातार बड़े हमले करेगी। उसकी कोशिश यहां पहुंचकर ऑपरेशन को फेल करना होगा। इतने लंबे वक्त तक ईरानी सेना को रोकना अमेरिका के लिए बेहद मुश्किल होगा। अमेरिका को डर है उसके ऑपरेशन से पहले ही ईरान संवर्धित यूरेनियम को यहां से हटाने की कोशिश कर सकता है। ऐसे में अमेरिकी सैटेलाइट दिन-रात ईरान के परमाणु केंद्रों पर नजर रख रहे हैं।
ग्राउंड ऑपरेशन से पहले ईरान के सैन्य टारगेट्स करेंगे तबाह
दरअसल माना जा रहा है कि अमेरिका ग्राउंड ऑपरेशन से पहले ईरान में अपने बचे हुए सैन्य टारगेट्स को तबाह करेगा। जिसकी धमकी खुद डोनाल्ड ट्रंप ने दी है। ट्रंप ने अपने बयान में कहा है कि हमारे कुछ खास टारगेट थे, जिनमें से हमने 70% पूरे किए हैं। अभी और भी टारगेट हैं, जिन्हें हम हिट कर सकते हैं। जल्द हम हर एक टारगेट को पूरा करेंगे। कहा जा रहा है कि अमेरिका को डर है ये टारगेट्स पूरे करने के दौरान ही ईरान संवर्धित यूरेनियम को हटा सकते है। इसीलिए सैटेलाइट से परमाणु केंद्रों पर नजर रखी जा रही है।










