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डोनाल्ड ट्रंप का चीन दौरा हुआ तय, जानें कब होगी शी जिनपिंग से मुलाकात; भारत के लिए है खतरे की घंटी?

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बीजिंग यात्रा पर जाने वाले हैं. इसका ऐलान खुद चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने आधिकारिक तौर पर कर दिया है. बता दें कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के निमंत्रण पर 13 से 15 मई तक चीन का राजकीय दौरा करेंगे. तीन दिन की यह यात्रा दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंधों को मजबूत करने के मकसद से आयोजित की जा रही है.

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Donald Trump China Visit 2026: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बीजिंग यात्रा पर जाने वाले हैं. इसका ऐलान खुद चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने आधिकारिक तौर पर कर दिया है. बता दें कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के निमंत्रण पर 13 से 15 मई तक चीन का राजकीय दौरा करेंगे. तीन दिन की यह यात्रा दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंधों को मजबूत करने के मकसद से आयोजित की जा रही है.

वहीं, चीनी समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने इस हाई-प्रोफाइल दौरे की पुष्टि की है. इस दौरान दोनों वैश्विक नेता आपसी हितों और अहम द्विपक्षीय मुद्दों पर विस्तार से चर्चा करेंगे. यह दौरा अंतरराष्ट्रीय मंच पर बीजिंग और वॉशिंगटन के बीच संवाद का एक नया चैप्टर शुरू करने के लिए तय किया गया है.

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दूसरे हमारे मामलों में दखल न दें- चीन

बता दें कि पिछले महीने होर्मुज मुद्दे पर चीन के एक सीनियर अधिकारी ने अमेरिका को चेतावनी दी थी कि वह होर्मुज स्ट्रेट पर नाकाबंदी न करें और चीन के ईरान के साथ द्विपक्षीय संबंधों में दखल न दें. रक्षा मंत्री एडमिरल डोंग जून की यह चेतावनी अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी शुरू होने के बाद आई थी. जून ने यह भी कहा था कि ‘ईरान के साथ हमारे व्यापार और ऊर्जा समझौते हैं. हम उम्मीद करते हैं कि दूसरे हमारे मामलों में दखल नहीं देंगे. होर्मुज स्ट्रेट चीन के लिए खुला रहेगा.’

बीजिंग के लिए अहम है ये जलमार्ग

बता दें कि बीजिंग के लिए यह जलमार्ग बेहद अहम है, क्योंकि चीन की करीब 40 फीसदी तेल और करीब 30 फीसदी LNG जरूरतों को पूरा करता है. इसलिए चीन खाड़ी में इस अहम जलमार्ग को सुरक्षित रखने के लिए संघर्ष विराम पर जोर भी देता रहा है.

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भारत के लिए है खतरे की घंटी?

अमेरिका और चीन के संबंधों में पिछले कुछ समय से तनाव रहा है. भारत की दृष्टि से देखें तो नई दिल्ली के लिए यही सबसे सही स्थिति है. पिछले दो दशकों में भारत की विदेश नीति ने अमेरिका और चीन की तना तनी से फायदा ही उठाया है. चाहे वह क्वाड हो, अमेरिका के साथ टेक्नोलॉजी ट्रांसफर हो या फिर चीन को निशाना बनाकर बनाई गई चिप प्रणाली हो. चीन के सामने भारत हमेशा से ही अमेरिका की पहली प्राथमिकता रहा है. चीन को काउंटर करने की अमेरिकी नीति में भारत हमेशा से एक बड़ा खिलाड़ी बनकर उभरा है. लेकिन ट्रंप के आने के बाद स्थिति बदल गई है.

ट्रंप ने पहले पाकिस्तान से मिलाया हाथ

ट्रंप ने पहले पाकिस्तान के साथ हाथ मिलाया और अब वह चीन के साथ नजदीकी बढ़ाने की कोशिश में हैं. नई दिल्ली के लिए यह बड़ी चिंता की बात है. क्योंकि अगर ट्रंप और जिनपिंग की इस बैठक के दौरान अमेरिका और चीन दोस्ती पर पहुंचते हैं, तो भारत के लिए यह एक बड़ा खतरा हो सकता है. क्योंकि फिर उसे पाकिस्तान, चीन और अमेरिका के त्रिगुट का सामना करना पड़ सकता है. वहीं, दूसरी ओर अगर इनकी यह बैठक दुश्मनी पर खत्म होती है, तब भी भारत को एक बेहद संकटपूर्ण स्थिति का सामना करते हुए पूरी तरह से किसी एक पक्ष को चुनना पड़ेगा.

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First published on: May 11, 2026 08:46 AM

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