भारत के खिलाफ 'ड्रैगन' की नई चाल, बॉर्डर पर बने अपने एयरपोर्ट पर तैनात किए 11 फाइटर जेट, जानें क्या है प्लान?

भारतीय सीमा से सटे अपने बॉर्डर के अंदर बने एयरपोर्ट पर चीन ने लड़ाकू विमान तैनात किए हैं. इस तैनाती को भारत के खिलाफ चीन की चाल माना जा रहा है. सैटेलाइट इमेज में 2 एयरपोर्ट पर करीब 11 चीनी स्टील्थ फाइटर जेट तैनात दिखे.

india china relations

भारत और चीन के बीच 1965 में एक युद्ध हो चुका है, वहीं साल 2020 में गलवान में टकराव हुआ था.

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भारत के खिलाफ चीन नई चाल चल रहा है, जिसका खुलासा हाल ही में क्लिक की गई सैटेलाइट इमेज से हुआ. NDTV की रिपोर्ट के अनुसार, चीन ने भारत के खिलाफ 2 एयरपोर्ट पर 11 जे-20 लड़ाकू विमान तैनात किए हैं. यह विमान इस साल जून महीने के आखिर में और जुलाई महीने की शुरुआत में तैनात किए गए. हालांकि लड़ाकू विमान तैनात किए जाने की वजह तो नहीं चल पाई है, लेकिन इतना पता चल गया है कि 11 चीनी स्टील्थ फाइटर जेट भारत की ओर मंडरा रहे हैं.

लेह के पास बने एयरपोर्ट पर 7 विमान तैनात

NDTV की रिपोर्ट के अनुसार, 9 जुलाई को भारतीय सीमा से सटे चीन के शहर शिनजियांग उइघुर में होतान एयरपोर्ट के रनवे पर 7 जे-20 लड़ाकू विमान तैनात किए गए थे. यह एयरपोर्ट भारत के लद्दाख राज्य के लेह जिले से 389 किलोमीटर दूर उत्तर-पूर्व में और उत्तरी लद्दाख के दौलत बेग ओल्डी स्थित भारतीय वायु सेना के एयरपोर्ट से मात्र 245 किलोमीटर दूर उत्तर-पूर्व में बना है. लड़ाकू विमानों की यह तैनाती अब तक किसी भी चीनी एयरपोर्ट पर भारत के खिलाफ सबसे बड़ी तैनाती है.

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अरुणाचल प्रदेश के पास 4 विमान तैनात किए

तिब्बती राज्य ल्हासा के डामक्सुंग एयरपोर्ट पर 4 जे-20 लड़ाकू विमान दिखाई तैनात किए गए हैं. यह एयरपोर्ट अरुणाचल प्रदेश के तवांग से 344 किलोमीटर दूर उत्तर-पश्चिम में स्थित है. होतान में 7 और दमक्सुंग में 4 लड़ाकू विमान की तैनाती इस बात की पुष्टि करती है कि भारत के हाई पॉइंट वाले ठिकानों पर 5वीं पीढ़ी के विमान तैनात करना चीनी सेना का ऑपरेशन है, न कि सिर्फ दिखावा है, यानी चीन अपनी सुरक्षा बढ़ा रहा है और भारत को भविष्य के लिए कोई संकेत दे रहा है.

भारत के पास 5वीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान नहीं

रिपोर्ट के अनुसार, चीन भारतीय वायुक्षेत्र में अपना प्रभुत्व स्थापित करने की कोशिश में है. जबकि भारत के पास 5वीं पीढ़ी के विमान नहीं हैं. भारत के पास फ्रांस में बने डसॉल्ट राफेल भी हैं, जो स्टील्थ तकनीक से लैस नहीं हैं. भारत के पास देश में बने एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) देश का पहला स्टील्थ जेट है, लेकिन उसे अभी वायुसेना में तैनात नहीं किया गया है, बल्कि करीब 10 साल बाद इन विमानों को एयरफोर्स की स्क्वाड्रन का हिस्सा बनाकर इस्तेमाल किया जाएगा.

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चीन के पास आज 5वीं पीढ़ी के 500 विमान

रिपोर्ट के अनुसार, चीन के पास जे-20 लड़ाकू विमानों की संख्या 2019 में 50 से बढ़कर साल 2022 के आखिर तक 200 हो गई थी. 2026 तक 300-500 विमानों का बेड़ा तैयार हो गया. ब्रिटेन स्थित रॉयल यूनाइटेड सर्विसेज इंस्टीट्यूट का अनुमान है कि चीन 2030 तक लगभग 1000 जे-20 विमानों को अपने बेड़े में शामिल कर सकता है. भारत के पास वर्तमान में केवल 36 राफेल लड़ाकू विमान हैं, जो अंबाला (हरियाणा) और हासिमारा (बंगाल) में तैनात हैं और हमले के लिए तैयार रहते हैं.

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भारत 114 राफेल विमान खरीदने को तैयार

भारतीय नौसेना ने 7.5 अरब डॉलर के सौदे में 26 राफेल विमानों का ऑर्डर दिया है. भारतीय वायु सेना के लिए 114 अतिरिक्त राफेल विमानों के लिए डसॉल्ट के साथ बातचीत चल रही है, जिसका सौदा 36 से 40 अरब डॉलर के बीच हो सकता है. इसके अलावा भारतीय वायु सेना के बेड़े में मिराज 2000 और मिग-29 जैसे पुराने लड़ाकू विमानों के अलावा 260 से अधिक रूसी-डिजाइन वाले सुखोई-30MKI लड़ाकू विमान भी हैं, जिन्हें अभी अपग्रेड किया जाना बाकी है.

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लेखक के बारे में

Khushbu Goyal

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.
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