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50000000 जिंदगियों पर मंडराया महासंकट! दांव पर लगे भारत और बांग्लादेश के कई राज्य, पढ़ें वैज्ञानिकों की चेतावनी

Scientists Alert for India: वैज्ञानिकों ने भारत को एक चेतावनी दी है कि अगर समय रहते कुछ नहीं किया गया तो 5 करोड़ से ज्यादा लोगों की जिंदगी दांव पर लग जाएगी। पूर्वोत्तर भारत के 8 राज्यों का वजूद खत्म हो जाएगा, क्योंकि इनके डूबने का खतरा पैदा हो गया है।

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देश के 5 करोड़ से ज्यादा लोगों की जिंदगी दांव पर लगी है और पूर्वोत्तर भारत के 8 राज्यों का वजूद खतरे में हैं। यह कोई और नहीं, चीन के सरकारी भूवैज्ञानिक कह रहे हैं। क्योंकि उनके सर्वे में इन राज्यों के पानी में डूबने का खतरा है। भारत सरकार ने समय रहते कुछ नहीं किया तो 7 या इससे ज्यादा की तीव्रता का भूकंप आने पर इन राज्यों में तबाही का मंजर देखना पड़ सकता है और भारतीयों पर मंडरा रहे इस खतरे का नाम अरुणाचल प्रदेश से लगी भारत-चीन सीमा पर बन रहा चीन का मेदोग हाइड्रोपावर स्टेशन है, जो दुनिया का सबसे बड़ा डैम और सबसे बड़ी जलविद्युत परियोजना है।

सबसे सक्रिय भूकंपीय लाइन पर बना है बांध

भारत-चीन सीमा से 50 किलोमीटर दूर तिब्बत में ब्रह्मपुत्र नदी पर मेदोग डैम चीन बना रहा है। इस डैम को लेकर चीन के वैज्ञानिकों ने चिंता जताई है। सेडिमेंट्री जियोलॉजी एंड टेथियन जियोलॉजी जर्नल में चीन के वैज्ञानिकों का एक रिसर्च पेपर प्रकाशित हुआ। चेंगदू यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी और चीन भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के विशेषज्ञों के रिसर्च पेपर में ब्रह्मपुत्र नदी यानी यारलुंग त्सांगपो नदी पर बन रहे मेदोग डैम का जिक्र है।

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वैज्ञानिकों का कहना है कि यह डैम दुनिया में सबसे ज्यादा सक्रिय पैझेन फॉल्ट लाइन यानी भूकंपीय दरार के ऊपर बना है। अगर भूकंप आया और यह दरार टूटी तो डैम टूटेगा, फिर जो महाप्रलय आएगी, उसमें भारत के पूर्वोतर में बसे 8 राज्य डूब जाएंगे और 5 करोड़ से ज्यादा लोग मारे जा सकते हैं। सबसे ज्यादा नुकसान भारत को उठाना पड़ेगा। इसके अलावा जहां- जहां से यह नदी गुजरती है, उफान आने पर वहां तबाही मचेगी।

60000 मेगावाट बिजली बनाने वाला प्रोजेक्ट

बता दें कि मेदोग हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट दुनिया का सबसे बड़ा प्रोजेक्ट है, जिसकी क्षमता 60000 मेगावाट बिजली पैदा करने की होगी। यह डैम चीन के थ्री गॉर्ज बांध से 3 गुना ज्यादा यानी सालाना 300 अरब किलोवाट बिजली पैदा करेगा। डैम को बनाने में एक ट्रिलियन युआन यानी लगभग 137 अरब डॉलर खर्च होंगे। दिसंबर 2024 में मंजूर हुए प्रोजेक्ट का निर्माण कार्य जुलाई 2025 में शुरू हुआ था। साल 2033 तक निर्माण पूरा होने और उद्धाटन होने की संभावना है।

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वहीं जिस यारलुंग त्सांगपो नदी पर यह डैम बन रहा है, वह तिब्बत के आंग्सी ग्लेशियर से निकलती है और तिब्बत में 1625 किमी बहने के बाद नामचा बरवा चोटी के पास मोड़ काटते हुए भारत के अरुणाचल प्रदेश में एंट्री करती है, जहां इसे ब्रह्मपुत्र कहते हैं। भारत में 918 किलोमीटर बहने के बाद नदी बांग्लादेश में एंट्री करती है, जहां इसे जमुना नदी कहते हैं और फिर यह बंगाल की खाड़ी में गिरती है, यानी बांग्लादेश के कई राज्यों पर भी बड़ा खतरा मंडरा रहा है।

बांध को लेकर चिंतित क्यों हैं चीन के वैज्ञानिक?

रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार, पैझेन फॉल्ट 26 लाख साल से सक्रिय है और आज भी इसकी टेक्टोनिक प्लेट्स में हलचल होती है। जिस पै विलेज इलाके में डैम बनाया जा रहा है, वह भूकंपीय गतिविधियों के मद्देनजर चीन का सबसे संवदेनशील इलाका है। साल 2017 में तिब्बत में 6.9 तीव्रता का जो भूकंप आया था, वह इसी फॉल्ट लाइन से आया था। बार-बार टकराने से प्लेट काफी कमजोर हो चुकी हैं, जो भारी-भरकम कंक्रीट के ढांचे और विशाल जलाशय का भार नहीं उठा पाएंगी।

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जब डैम में पानी भरेगा और धरती के अंदर उसका रिसाव होगा तो पकड़ ढीली होगी। ऊपर से भूकंप आ गया तो भूस्खलन और पहाड़ों के ढहने से डैम के टूटने का खतरा पैदा होगा। इस फॉल्ट लाइन में कोई भी हलचल इस डैम के लिए खतरा है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि जब चीन के सरकार समर्थित वैज्ञानिक ही डैम को लेकर चेतावनी दे रहे हैं तो यह डैम बन क्यों रहा है और जब इससे भारत के 8 राज्यों के खतरा है तो उनकी सुरक्षा के लिए चीन भारत के साथ मिलकर क्या करेगा?

First published on: Jul 12, 2026 01:15 PM

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About the Author

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.

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