कौन हैं दूसरों के घरों में झाड़ू-पोछा करने वाली ‘कलिता दीदी’? अब बनी माननीय मंत्री; पति हैं दिहाड़ी मजदूर
Kalita Majhi Maid to Minister: पश्चिम बंगाल की सियासत से लोकतंत्र की ताकत को बयां करने वाली एक प्रेरणादायक कहानी और बेहद अलग कहानी सामने आई है, जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा है. कभी दूसरों के घरों में झाड़ू-पोछा और बर्तन मांजने का काम करने वाली कलिता माझी आज अपने संघर्ष और लोगों के समर्थन से विधानसभा चुनाव जीत चुकी हैं और अपनी पहुंच मंत्री पद तक बना चुकी हैं.
Edited By : Versha Singh|Updated: Jun 2, 2026 10:45
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Kalita Majhi Maid to Minister: पश्चिम बंगाल की सियासत से लोकतंत्र की ताकत को बयां करने वाली एक प्रेरणादायक कहानी और बेहद अलग कहानी सामने आई है, जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा है. कभी दूसरों के घरों में झाड़ू-पोछा और बर्तन मांजने का काम करने वाली कलिता माझी आज अपने संघर्ष और लोगों के समर्थन से विधानसभा चुनाव जीत चुकी हैं और अपनी पहुंच मंत्री पद तक बना चुकी हैं.
कौन हैं 'कलिता दीदी'?
बता दें कि कलिता माझी उर्फ 'कलिता दीदी' पूर्व बर्दवान जिले की गुसकरा नगर पालिका के वार्ड नंबर-3 (माझपुकुर पार) की रहने वाली हैं. कलिता ने अपने पारिवारिक जीवन में तंगहाली देखी है और उनका जीवन बेहद साधारण रहा है. वहीं, उनके पति दिहाड़ी मजदूर हैं, जबकि उनके बेटे पार्थ ने इसी साल हायर सेकेंडरी की परीक्षा दी है.
कलिता दूसरों के घरों में करती थीं काम
कुछ समय पहले तक कलिता खुद अपने परिवार को सहारा देने के लिए दूसरों के घरों में पारिचारिका के रूप में काम करती थीं, जहां वे झाड़ू-पोछा करने और कपड़े धोने का काम संभालती थीं. लेकिन उनकी ईमानदारी और जमीन से जुड़े स्वभाव ने उन्हें पहले जनता का और फिर देश की बड़ी राजनीतिक पार्टी का भी चहेता बना दिया.
2021 में मिली थी हार
मिली जानकारी के अनुसार, आउसग्राम विधानसभा सीट बोलपुर लोकसभा के तहत कलिता माझी का यह सफर आसान नहीं था. बल्कि इसके पीछे उनकी 5 साल की कड़ी मेहनत छिपी है. दरअसल, BJP ने साल 2021 के विधानसभा चुनाव में भी कलिता माझी को उम्मीदवार बनाकर सबको चौंकाया था. उस चुनाव में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के अबेदानंद थंडर ने 1 लाख 392 वोट पाकर जीत हासिल की थी. कलिता माझी 88 हजार 577 वोटों के साथ दूसरे नंबर पर थी और उन्हें 11 हजार 815 वोटों से हार का मुंह देखना पड़ा था.
2026 में भाजपा ने फिर जताया भरोसा
साल 2026 के चुनाव में भाजपा ने एक बार फिर से कलिता माझी पर भरोसा जताया और उन्हें फिर से चुनावी मैदान में उतारा और टिकट दिया. इस बार कलिता का मुकाबला तृणमूल के कद्दावर उम्मीदवार, पूर्वी बर्दवान जिला परिषद के अध्यक्ष और पेशे से वकील श्यामप्रसन्न लोहार से था, जबकि सीपीएम (CPIM) की तरफ से चंचल कुमार माझी मैदान में थे.
इस त्रिकोणीय मुकाबले में भी कलिता माझी ने सबको पीछे छोड़ दिया और 1 लाख 7 हजार 692 वोटों से जीत हासिल की. कलित ने तृणमूल के वकील उम्मीदवार श्यामप्रसन्न लोहार को 12 हजार 535 वोटों के बड़े अंतर से हराया और जीत दर्ज की.
पार्टी ने मुझ पर जताया भरोसा
मंत्री पद की शपल लेने के बाद कलिता माझी की आखों में खुशी के आंसू थे. उन्होंने बेहद सादगी से अपनी पार्टी और शीर्ष नेतृत्व का आभार जताते हुए कहा, 'मुझे न तो यह उम्मीद थी और न ही मैंने कभी सपने में भी ऐसा सोचा था कि मैं कभी जीवन में इस मुकाम तक पहुंच पाऊंगी. मुझे नहीं पता कि पार्टी ने मुझमें ऐसा क्या देखा कि मुझ पर इतना बड़ा भरोसा किया और विश्वास जताया.'
मैं उस भरोसे पर पूरी तरह खरा उतरने की कोशिश करूंगी. यह मेरे और मेरे समाज के लिए जश्न का मौका है. सिर्फ BJP और मोदी जी ही मुझ जैसी गरीब महिला को यह अवसर दे सकते थे. अब पार्टी का जो भी निर्देश होगा, मैं उसका पूरी तरह पालन करूंगी."
Kalita Majhi Maid to Minister: पश्चिम बंगाल की सियासत से लोकतंत्र की ताकत को बयां करने वाली एक प्रेरणादायक कहानी और बेहद अलग कहानी सामने आई है, जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा है. कभी दूसरों के घरों में झाड़ू-पोछा और बर्तन मांजने का काम करने वाली कलिता माझी आज अपने संघर्ष और लोगों के समर्थन से विधानसभा चुनाव जीत चुकी हैं और अपनी पहुंच मंत्री पद तक बना चुकी हैं.
कौन हैं ‘कलिता दीदी’?
बता दें कि कलिता माझी उर्फ ‘कलिता दीदी’ पूर्व बर्दवान जिले की गुसकरा नगर पालिका के वार्ड नंबर-3 (माझपुकुर पार) की रहने वाली हैं. कलिता ने अपने पारिवारिक जीवन में तंगहाली देखी है और उनका जीवन बेहद साधारण रहा है. वहीं, उनके पति दिहाड़ी मजदूर हैं, जबकि उनके बेटे पार्थ ने इसी साल हायर सेकेंडरी की परीक्षा दी है.
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कलिता दूसरों के घरों में करती थीं काम
कुछ समय पहले तक कलिता खुद अपने परिवार को सहारा देने के लिए दूसरों के घरों में पारिचारिका के रूप में काम करती थीं, जहां वे झाड़ू-पोछा करने और कपड़े धोने का काम संभालती थीं. लेकिन उनकी ईमानदारी और जमीन से जुड़े स्वभाव ने उन्हें पहले जनता का और फिर देश की बड़ी राजनीतिक पार्टी का भी चहेता बना दिया.
2021 में मिली थी हार
मिली जानकारी के अनुसार, आउसग्राम विधानसभा सीट बोलपुर लोकसभा के तहत कलिता माझी का यह सफर आसान नहीं था. बल्कि इसके पीछे उनकी 5 साल की कड़ी मेहनत छिपी है. दरअसल, BJP ने साल 2021 के विधानसभा चुनाव में भी कलिता माझी को उम्मीदवार बनाकर सबको चौंकाया था. उस चुनाव में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के अबेदानंद थंडर ने 1 लाख 392 वोट पाकर जीत हासिल की थी. कलिता माझी 88 हजार 577 वोटों के साथ दूसरे नंबर पर थी और उन्हें 11 हजार 815 वोटों से हार का मुंह देखना पड़ा था.
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2026 में भाजपा ने फिर जताया भरोसा
साल 2026 के चुनाव में भाजपा ने एक बार फिर से कलिता माझी पर भरोसा जताया और उन्हें फिर से चुनावी मैदान में उतारा और टिकट दिया. इस बार कलिता का मुकाबला तृणमूल के कद्दावर उम्मीदवार, पूर्वी बर्दवान जिला परिषद के अध्यक्ष और पेशे से वकील श्यामप्रसन्न लोहार से था, जबकि सीपीएम (CPIM) की तरफ से चंचल कुमार माझी मैदान में थे.
इस त्रिकोणीय मुकाबले में भी कलिता माझी ने सबको पीछे छोड़ दिया और 1 लाख 7 हजार 692 वोटों से जीत हासिल की. कलित ने तृणमूल के वकील उम्मीदवार श्यामप्रसन्न लोहार को 12 हजार 535 वोटों के बड़े अंतर से हराया और जीत दर्ज की.
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पार्टी ने मुझ पर जताया भरोसा
मंत्री पद की शपल लेने के बाद कलिता माझी की आखों में खुशी के आंसू थे. उन्होंने बेहद सादगी से अपनी पार्टी और शीर्ष नेतृत्व का आभार जताते हुए कहा, ‘मुझे न तो यह उम्मीद थी और न ही मैंने कभी सपने में भी ऐसा सोचा था कि मैं कभी जीवन में इस मुकाम तक पहुंच पाऊंगी. मुझे नहीं पता कि पार्टी ने मुझमें ऐसा क्या देखा कि मुझ पर इतना बड़ा भरोसा किया और विश्वास जताया.’
मैं उस भरोसे पर पूरी तरह खरा उतरने की कोशिश करूंगी. यह मेरे और मेरे समाज के लिए जश्न का मौका है. सिर्फ BJP और मोदी जी ही मुझ जैसी गरीब महिला को यह अवसर दे सकते थे. अब पार्टी का जो भी निर्देश होगा, मैं उसका पूरी तरह पालन करूंगी.”