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उत्तराखंड में कौन-से वाहनों की एंट्री पर नहीं लगेगा ‘ग्रीन सेस’, क्यों पड़ी टैक्स की जरूरत?

Green Cess Uttarakhand: उत्तराखंड में एंट्री करने के लिए अब लोगों को ग्रीन सेस देना होगा. सरकार ने रेट तय करके ग्रीन सेस वसूलने का आदेश जारी कर दिया है, जो एक दिसंबर 2025 से लागू होगा. आइए जानते हैं कि ग्रीन सेस किन गाड़ियों पर लगेगा और किन गाड़ियों पर नहीं लगेगा?

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Green Cess in Uttarakhand: उत्तराखंड में अब बाहरी वाहनों की एंट्री पर ग्रीन सेस लगेगा. दिसंबर 2025 से जिस भी राज्य के वाहन उत्तराखंड में एंट्री करेंगे, उन्हें ग्रीन सेस देने के बाद ही आने दिया जाएगा. प्रदेश की पुष्कर धामी सरकार ने आदेश जारी करके नोटिफिकेशन रिलीज कर दिया है, जिसमें सेस की दरें भी बताई गई हैं. हालांकि उत्तराखंड में साल 2015 से ही सेस लागू है, लेकिन इसकी वैधता को लेकर उठ रहे सवालों के चलते इसे पूरी तरह लागू नहीं किया जा सकता था, लेकिन अब इसके चार्ज तय करके इसे लागू कर दिया गया है.

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फास्टैग से ऑटोमेटिक कटेगा सेस

परिवहन विभाग के अपर आयुक्त एसके सिंह ने बताया कि एक दिसंबर 2025 से सेस अनिवार्य होगा, जो फास्टैग से ऑटोमेटिक कटेगा. ग्रीन सेस वसूली की निगरानी करने के लिए बॉर्डर पर 16 जगहों पर ऑटोमेटेड नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) कैमरे लगे हैं. इसके लिए प्राइवेट कंपनी को हायर किया गया है, जो गढ़वाल और कुमाऊं मंडल में कुल्हाल, आशारोड़ी, नारसन, चिड़ियापुर, खटीमा, काशीपुर, जसपुर और रुद्रपुर समेत 16 जगहों पर कैमरे लगाएगी. वहीं ग्रीन सेस लगाने से सरकार के रेवेन्यू में हर साल 100 से 150 करोड़ की बढ़ोतरी होगी.

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किन पर लगेगा और किन पर नहीं?

आदेश के अनुसार, कारों की एंट्री पर 80 रुपये ग्रीन सेस लगेगा. डिलीवरी वैन को 250 रुपये, भारी वाहनों को 120 रुपये, बस को 140 रुपये और ट्रक को साइज के अनुसार 140 से 700 रुपये तक ग्रीन सेस देना होगा. दोपहिया वाहनों, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, CNG व्हीकल्स, सरकारी गाड़ियों, एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड को ग्रीन सेस नहीं देना पड़ेगा. दूसरी ओर, अगर कोई गाड़ी एक बार ग्रीन सेस देने के बाद 24 घंटे में अंदर आकर बाहर जाती है और फिर अंदर आती है तो उसे भी दोबारा से ग्रीन सेस नहीं देना पड़ेगा. आदेश का सख्ती से पालन करने के निर्देश हैं.

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उत्तराखंड में क्यों लगा ग्रीन सेस?

आदेश जारी करते हुए धामी सरकार ने स्पष्ट किया है कि ग्रीन सेस लगाने का मकसद वायु प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन का कंट्रोल करना है. पर्यावरण, मिट्टी और वन संरक्षण के लिए धन जुटाना है. शहरी परिवहन विकास किया जाएगा. उत्तराखंड के पर्यटन स्थलों और चारधाम यात्रा पर बढ़ते दबाव को कम किया जाएगा. संसाधनों और कचरे के मैनेजमेंट के लिए फंड जुटाया जाएगा. इन्फ्रास्ट्रक्चर यानी सड़कों, पुलों और अन्य बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए पैसा जुटेगा. प्राकृतिक आपदाओं के दौरान मैनेजमेंट के लिए पैसा चाहिए. उपरोक्त सभी कामों के लिए वित्तीय प्रबंधन के लिए ग्रीन सेस लगाया है.

First published on: Oct 26, 2025 02:04 PM

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