Noida Authority Plot Scheme: नोएडा में एयरपोर्ट के करीब जमीन खरीदने का शानदार मौका, 11 जून तक करें आवेदन; जानिए प्लॉट की कीमत
Noida Mein Zameen: नोएडा एयरपोर्ट के आसपास बढ़ती रियल एस्टेट हचचल के बीच नोएडा अथॉरिटी की नई प्लॉट स्कीम से निवेशकों को एक बड़ा अवसर दिया है. 35 प्लॉट्स वाली इस योजना में आवेदन 11 जून तक किए जा सकते हैं. आइए जानते हैं इस योजना की पूरी डिटेल्स और कितनी है प्लॉट्स की कीमत?
नोएडा एयरपोर्ट के पास जमीन खरीदने का बड़ा मौका. (Image: AI/Pexels)
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दिल्ली-NCR के रियल एस्टेट बाजार में हलचल तेज है. माना जा रहा है कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर एयरपोर्ट) के आधिकारिक संचालन की घड़ी जैसे-जैसे नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे इस क्षेत्र में जमीनों की कीमतें आसमान छूने लगी हैं. इसी बीच, नोएडा विकास प्राधिकरण (Noida Authority) ने निवेशकों को बड़ा मौका देते हुए अपनी प्लॉट स्कीम की घोषणा की है, जिसके तहत कुल 35 भूखंडों (Plots) का आवंटन किया जाना है. इस योजना की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसके तहत पेश किए गए एक सबसे महंगे कमर्शियल प्लॉट की रिजर्व कीमत ही ₹758 करोड़ आंकी गई है. इच्छुक आवेदक 11 जून तक आवेदन कर सकते हैं.
सबसे महंगा प्लॉट: सेक्टर-18 में 29,408 वर्ग मीटर क्षेत्रफल वाला कमर्शियल प्लॉट है, जिसकी रिजर्व कीमत 758 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है.
क्यों वक्त के साथ तेजी से बढ़ रहे जमीन के दाम?
विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी क्षेत्र में जमीन की कीमत तब बढ़ती है जब वहां विकास और कारोबार की संभावनाएं मजबूत दिखाई देती हैं. नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, यमुना एक्सप्रेसवे, नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे, ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे और दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे जैसी बड़ी परियोजनाओं ने क्षेत्र की कनेक्टिविटी को मजबूती दी है. बेहतर सड़क नेटवर्क और परिवहन सुविधाओं के कारण उद्योग, लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउस, डेटा सेंटर और कॉर्पोरेट कंपनियों की इन जमीनों की तरफ रुची लगातार बढ़ रही है. यही वजह है कि कमर्शियल और औद्योगिक जमीनों की मांग तेजी से ऊपर जा रही है.
घर खरीदारों और निवेशकों पर क्या पड़ेगा असर?
रियल एस्टेट विशेषज्ञों का मानना है कि किसी क्षेत्र में व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ने का सीधा फायदा आवासीय बाजार को भी मिलता है. नए उद्योग और व्यवसाय आने से रोजगार के अवसर बढ़ते हैं, जिससे लोगों की बसावट और घरों की मांग में बढ़ोतरी होती है. इसके साथ ही स्कूल, अस्पताल, शॉपिंग सेंटर और मनोरंजन सुविधाओं का विकास भी तेज होता है. नोएडा, ग्रेटर नोएडा, यमुना एक्सप्रेसवे, जेवर और गाजियाबाद के आसपास के इलाकों में वर्तमान समय में इसी तरह का विकास देखने को मिल रहा है, जिससे प्रॉपर्टी बाजार को लगातार मजबूती मिल रही है और दाम समय के साथ बढ़ते जा रहे हैं.
निवेश से पहले इन बातों का रखें खास ध्यान
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि किसी भी प्रॉपर्टी में निवेश करने से पहले सभी जरूरी मंजूरियों और कानूनी दस्तावेजों की जांच जरूर से करें.
सिर्फ व्यक्ति की बातों पर भरोसा करके, या सिर्फ कीमत देखकर निर्णय लेने के बजाय ईएमआई, स्टांप ड्यूटी, रजिस्ट्रेशन शुल्क और अन्य खर्चों का भी पूरा आकलन करें.
साथ ही वर्तमान और भविष्य की कनेक्टिविटी, रोजगार केंद्र, सामाजिक सुविधाएं और डेवलपर का रिकॉर्ड भी जरूर देखें.
साइट विजिट करके वास्तविक स्थिति को समझना भी जरूरी है.
जानकारों का मानना है कि एयरपोर्ट, मेट्रो, रैपिड रेल, एक्सप्रेसवे और औद्योगिक कॉरिडोर जैसी परियोजनाओं के चलते आने वाले सालों में यह क्षेत्र एनसीआर के सबसे प्रमुख विकास केंद्रों में शामिल हो सकता है.
इस बात का ध्यान रखें कि बायर्स को इन्वेस्ट करने से पहले लीगल अप्रूवल की सही तरीके से जांच करनी चाहिए और फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स से राय लेनी चाहिए.
दिल्ली-NCR के रियल एस्टेट बाजार में हलचल तेज है. माना जा रहा है कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर एयरपोर्ट) के आधिकारिक संचालन की घड़ी जैसे-जैसे नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे इस क्षेत्र में जमीनों की कीमतें आसमान छूने लगी हैं. इसी बीच, नोएडा विकास प्राधिकरण (Noida Authority) ने निवेशकों को बड़ा मौका देते हुए अपनी प्लॉट स्कीम की घोषणा की है, जिसके तहत कुल 35 भूखंडों (Plots) का आवंटन किया जाना है. इस योजना की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसके तहत पेश किए गए एक सबसे महंगे कमर्शियल प्लॉट की रिजर्व कीमत ही ₹758 करोड़ आंकी गई है. इच्छुक आवेदक 11 जून तक आवेदन कर सकते हैं.
सबसे महंगा प्लॉट: सेक्टर-18 में 29,408 वर्ग मीटर क्षेत्रफल वाला कमर्शियल प्लॉट है, जिसकी रिजर्व कीमत 758 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है.
क्यों वक्त के साथ तेजी से बढ़ रहे जमीन के दाम?
विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी क्षेत्र में जमीन की कीमत तब बढ़ती है जब वहां विकास और कारोबार की संभावनाएं मजबूत दिखाई देती हैं. नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, यमुना एक्सप्रेसवे, नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे, ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे और दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे जैसी बड़ी परियोजनाओं ने क्षेत्र की कनेक्टिविटी को मजबूती दी है. बेहतर सड़क नेटवर्क और परिवहन सुविधाओं के कारण उद्योग, लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउस, डेटा सेंटर और कॉर्पोरेट कंपनियों की इन जमीनों की तरफ रुची लगातार बढ़ रही है. यही वजह है कि कमर्शियल और औद्योगिक जमीनों की मांग तेजी से ऊपर जा रही है.
घर खरीदारों और निवेशकों पर क्या पड़ेगा असर?
रियल एस्टेट विशेषज्ञों का मानना है कि किसी क्षेत्र में व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ने का सीधा फायदा आवासीय बाजार को भी मिलता है. नए उद्योग और व्यवसाय आने से रोजगार के अवसर बढ़ते हैं, जिससे लोगों की बसावट और घरों की मांग में बढ़ोतरी होती है. इसके साथ ही स्कूल, अस्पताल, शॉपिंग सेंटर और मनोरंजन सुविधाओं का विकास भी तेज होता है. नोएडा, ग्रेटर नोएडा, यमुना एक्सप्रेसवे, जेवर और गाजियाबाद के आसपास के इलाकों में वर्तमान समय में इसी तरह का विकास देखने को मिल रहा है, जिससे प्रॉपर्टी बाजार को लगातार मजबूती मिल रही है और दाम समय के साथ बढ़ते जा रहे हैं.
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निवेश से पहले इन बातों का रखें खास ध्यान
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि किसी भी प्रॉपर्टी में निवेश करने से पहले सभी जरूरी मंजूरियों और कानूनी दस्तावेजों की जांच जरूर से करें.
सिर्फ व्यक्ति की बातों पर भरोसा करके, या सिर्फ कीमत देखकर निर्णय लेने के बजाय ईएमआई, स्टांप ड्यूटी, रजिस्ट्रेशन शुल्क और अन्य खर्चों का भी पूरा आकलन करें.
साथ ही वर्तमान और भविष्य की कनेक्टिविटी, रोजगार केंद्र, सामाजिक सुविधाएं और डेवलपर का रिकॉर्ड भी जरूर देखें.
साइट विजिट करके वास्तविक स्थिति को समझना भी जरूरी है.
जानकारों का मानना है कि एयरपोर्ट, मेट्रो, रैपिड रेल, एक्सप्रेसवे और औद्योगिक कॉरिडोर जैसी परियोजनाओं के चलते आने वाले सालों में यह क्षेत्र एनसीआर के सबसे प्रमुख विकास केंद्रों में शामिल हो सकता है.
इस बात का ध्यान रखें कि बायर्स को इन्वेस्ट करने से पहले लीगल अप्रूवल की सही तरीके से जांच करनी चाहिए और फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स से राय लेनी चाहिए.