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लीबिया में भीषण गर्मी और तपते रेगिस्तान में कैसे बची युवक की जान? 5 दिन से भटक रहा था भूखा-प्यासा

जब किसी की मृत्यु का समय ना हो तो चाहे कुछ भी हो जाए उसे कुछ नहीं हो सकता है. वो कहावत है ना 'जाको राखे साइयां, मार सके न कोय.' इस कहावत को सच साबित करने वाला एक मामला लीबिया से सामने आया है. जी हां, लीबिया के खतरनाक रेगिस्तान में जब हर किसी ने एक व्यक्ति के जिंदा होने की उम्मीद छोड़ दी थी, तब रेस्क्यू टीम ने उसे बिल्कुल सही सलामत रेगिस्तान से बाहर निकाला.

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जब किसी की मृत्यु का समय ना हो तो चाहे कुछ भी हो जाए उसे कुछ नहीं हो सकता है. वो कहावत है ना ‘जाको राखे साइयां, मार सके न कोय.’ इस कहावत को सच साबित करने वाला एक मामला लीबिया से सामने आया है. जी हां, लीबिया के खतरनाक रेगिस्तान में जब हर किसी ने एक व्यक्ति के जिंदा होने की उम्मीद छोड़ दी थी, तब रेस्क्यू टीम ने उसे बिल्कुल सही सलामत रेगिस्तान से बाहर निकाला.

रेस्क्यू टीम को नहीं हो रहा था विश्वास

रेस्क्यू के दौरान टीम को भी ये विश्वास नहीं हो रहा था कि ये सच है और वह शख्स सच में अभी तक जिंदा है. दरअसल, यह रूह कंपा देने वाली दास्तां लीबिया के ब्रेगा के रहने वाले मरवान अल-बहीजी (Marwan Al Bahiji) की है. मरवान पिछले 12 मई को एक तेल क्षेत्र (Oilfield) से निकले थे, लेकिन रास्ते में वह अपना रास्ता भटक गए और लीबिया के बेहद दुर्गम रेगिस्तान के बीचो-बीच जा पहुंचे.

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रेगिस्तान में खराब हुई गाड़ी और भटक गए रास्ता

इतना ही नहीं रेगिस्तान के अंदरूनी हिस्से में पहुंचते ही उनकी गाड़ी ने भी उनका साथ छोड़ दिया और वह अचानक खराब हो गई. मीलों दूर तक सिर्फ रेत का समंदर और मोबाइल नेटवर्क का नामोनिशान नहीं होने के कारण मरवान वहीं फंसकर रह गए. जब वह कई दिनों तक घर नहीं लौटे, तो उनके लापता होने की खबर से हड़कंप मच गया.

मरवान को ढूंढने के लिए चलाया गया सर्च ऑपरेशन

मरवान को ढूंढने के लिए एक बड़े पैमाने पर सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया. इसमें न केवल स्थानीय प्रशासन बल्कि सैकड़ों लोगों के साथ दमदार 4×4 गाड़ियों और हेलिकॉप्टरों को भी काम पर लगाया गया. सोशल मीडिया पर भी मरवान की तस्वीर शेयर कर मदद की अपील की जाने लगी. दिन बीतने के साथ रेगिस्तान की भीषण गर्मी, पानी की कमी और विशाल रेतीले इलाके की वजह से रेस्क्यू टीम की चुनौतियां बढ़ती जा रही थीं. आखिरकार, 17 मई को रेस्क्यू टीम को जिखरा के दक्षिण-पूर्व में स्थित ‘रामल 81’ (Raml 81) या ‘सैंड 81’ नाम के इलाके में मरवान की लोकेशन मिली.

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भावुक करने वाला था नजारा

बता दें कि जैसे ही रेस्क्यू टीम मरवान के पास पहुंची, वहां का नजारा भावुक कर देने वाला था. मरवान अपनी खराब गाड़ी के पास बेसुध और बेहद थके हुए बैठे थे, लेकिन सामने अपनी जान बचाने वालों को देखकर उनके चेहरे पर सुकून साफ झलक रहा था. इस बड़ी कामयाबी और मरवान को जिंदा देखकर रेस्क्यू टीम की खुशी का ठिकाना नहीं रहा. जश्न के माहौल में एक बचावकर्मी ने खुशी से हवा में गोलियां चलाईं, तो दूसरे ने गाड़ी का हॉर्न बजाकर अपनी खुशी का इजहार किया.

मरवान ने रेगिस्तान में कैसे किया सर्वाइव?

हैरानी की बात यह है कि पांच दिनों तक बिना किसी मदद, भीषण गर्मी और डिहाइड्रेशन के खतरे को झेलने के बाद भी मरवान का स्वास्थ्य बिल्कुल ठीक है. स्थानीय मीडिया के अनुसार, मरवान ने खुद पहले सोशल मीडिया पर लोगों को चेतावनी देते हुए कहा था, ‘रेगिस्तान में कभी अकेले मत निकलो.’ लेकिन किस्मत का खेल देखिए कि वह खुद इस जाल में फंस गए.

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रेगिस्तान में कैसे बची मरवान की जान

सर्वाइवल एक्सपर्ट्स का मानना है कि मरवान की जान बचने की सबसे बड़ी वजह यह रही कि वह अपनी खराब गाड़ी को छोड़कर पैदल आगे नहीं गए. सिर्फ इस एक कमद ने ही मरवान की जान बचाई है. जानकारों के अनुसार, जब भी कोई रेगिस्तान या जंगल में फंसता है तो उसे अपनी गाड़ी के पास ही रुकना चाहिए. ऐसा इसलिए क्योंकि आसमान से हेलिकॉप्टर या जमीन पर रेस्क्यू टीम के लिए एक अकेले इंसान की तुलना में एक बड़ी गाड़ी को ढूंढना कहीं ज्यादा आसान होता है. लीबिया का यह रेगिस्तान लगभग 5,02,000 वर्ग मील में फैला है, जो सहारा रेगिस्तान का सबसे सूखा और सबसे कम आबादी वाला खतरनाक हिस्सा माना जाता है, जहां से मरवान का जिंदा लौटना किसी पुनर्जन्म से कम नहीं है.

First published on: May 22, 2026 03:08 PM

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