बेंच पर वैभव सूर्यवंशी, मैदान पर ‘ज़िद’, टीम इंडिया कब तोड़ेगी लेफ्ट-राइट का तिलिस्म?
Vaibhav Suryavanshi: इंग्लैंड दौरे पर टी20 सीरीज़ खेल रही टीम इंडिया इस वक्त एक अजीब उलझन में फंसी है. पहले ही आयरलैंड जैसी कमजोर टीम से टी20 सीरीज़ उसे 2-0 से शर्मनार हार मिली. उस पर इंग्लैंड के खिलाफ पहले टी20 में फिर एक बार 15 साल के 'वंडर किड' वैभव सूर्यवंशी को बाहर रखा गया, जिससे फैंस नाराज़ हो गए हैं. हालांकि बर्मिंघम का यह मैच बारिश की वजह से धुल गया, लेकिन खराब फॉर्म से जूझ रहे संजू सैमसन को बार-बार मौका दिया जाना टीम मैनेजमेंट की ज़िद और 'राइट और लेफ्ट' हैंड कॉम्बिनेशन के बेमतलब के डर पर सवाल खड़े कर गया है.
Vaibhav Sooryavanshi :'का बरषा सब कृषी सुखानें. समय चुकें पुनि का पछितानें..' हिंदुस्तान भगवान राम का देश है. उन्हीं के जीवन पर आधारित लिखी गई गोस्वामी तुलसीदास जी की रामचरितमानस की ये चौपाई सीता स्वयंवर के वक्त आती है. इसका सीधा सा मतलब है कि जब सारी फसल ही सूख जाए, तो फिर बारिश होने का क्या फायदा. यानी समय निकल जाने के बाद पछताने से क्या मिलता है. आज भारतीय क्रिकेट टीम का जो हाल है और 15 साल के वैभव सूर्यवंशी के डेब्यू को लेकर जैसी टालमटोल हो रही है, उस पर यह बात बिल्कुल फिट बैठती है. पूरी दुनिया के क्रिकेट फैंस बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं कि 'यूनिवर्सल बॉस बेबी' के नाम से मशहूर ये युवा तूफान मैदान पर कब उतरेगा.
मौके और पछतावे के बीच खड़ा भारतीय क्रिकेट
देखा जाए तो वैभव सूर्यवंशी का टीम इंडिया में डेब्यू एक ऐसी 'अवश्यंभावी' घटना है, जिसे अब कोई नहीं टाल सकता. लेकिन फिर भी बिना किसी ठोस वजह के इस ऐतिहासिक पल को टालने की जो झूठी दलीलें गढ़ी जा रही हैं. पूर्व भारतीय कप्तान सुनील गावस्कर भी अब इस बढ़ते इंतज़ार से परेशान हो चुके हैं. गावस्कर साहब की मानें तो उन्होंने साफ-साफ कहा है कि 'वैभव सूर्यवंशी के इंटरनेशनल डेब्यू को जितना टाला जाएगा, उतना ही अपने डेब्यू पर वैभव अधिक दबाव के साथ खेलेंगे'
वर्ल्ड चैंपियन होने का घमंड और आयरलैंड से हार
आयरलैंड में मिली हार के बाद जब भारतीय टी20 टीम के नए कप्तान श्रेयस अय्यर से वैभव सूर्यवंशी को मौका नहीं दिए जाने की वजह पूछी गई थी. तो श्रेयस ने कहा था कि, 'वो कोई भी फैसला जल्दबाज़ी में नहीं लेना चाहते. वर्ल्ड कप जीतने वाली टीम के खिलाड़ियों ने लगातार अच्छा प्रदर्शन किया है. ऐसे में टीम में बदलाव ज़रूरत के मुताबिक किया जाएगा.' सुनने में ये बात एक पल को सही लगती है. लेकिन कोई श्रेयस को भी समझाए कि जब सामने आयरलैंड जैसी कमजोर टीम हो, जिसमें उसके सबसे अच्छे खिलाड़ी भी नहीं खेल रहे थे. तो क्या वहां वैभव को प्लेइंग-11 में आजमाने से डरना सही कहा जाएगा?
इतिहास गवाह रहेगा कि इसी ज़िद के बाद ना सिर्फ पहली बार भारत आयरलैंड से हारा, बल्कि 2 मैचों की सीरीज़ में 2-0 से बुरी तरह पिट गया. एक तरफ फैंस का दिल टूट गया, तो वर्ल्ड चैंपियन होने का सारा रुतबा भी मिट्टी में मिल गया. लेकिन लगता है टीम मैनेजमेंट को इस हार का कोई मलाल ही नहीं है. इसी ज़िद का नतीजा रहा कि 1 जुलाई की शाम बर्मिंघम में जब इंग्लैंड के खिलाफ पहला टी20 मुकाबला हुआ, जो बारिश की वजह से पूरा भी नहीं हो पाया वहां भी वैभव को प्लेइंग-11 में जगह नहीं दी गई.
ऐसा नहीं है कि वैभव सूर्यवंशी को यूं ही 'वंडर किड' कहा जा रहा है. श्रीलंका में खेली गई ट्राई सीरीज़ के फाइनल में वैभव ने महज 29 गेंदों पर 94 रनों की जो तूफानी पारी खेली थी, उसने दुनिया के बड़े-बड़े क्रिकेट पंडितों को हैरान कर दिया था. वो पारी साबित करती है कि बड़े मैचों का दबाव इस लड़के के आस-पास भी नहीं फटकता. इससे पहले आईपीएल सीज़न-19 में वैभव ने अपने बल्ले से जो आग उगली थी, वो भी सबके सामने है. आईपीएल 2026 के दौरान 230+ के स्ट्राइक रेट से रन कूटते हुए उन्होंने दुनिया के टॉप गेंदबाजों की लाइन-लेंथ बिगाड़ दी.
मॉर्डन टी20 क्रिकेट में टीम इंडिया को ऐसे ही खिलाड़ी की जरूरत है जो पहली ही गेंद से ही मैच का रुख बदलने का माद्दा रखता हो. भरोसा दिखाया गया तो वैभव भारतीय टीम के लिए वो 'तुरूप के इक्के' साबित होंगे जो सामने वाली टीम के हौसले पल भर में पस्त कर देंगे. एक बेवजह के तर्क के चलते ऐसे कमाल के हुनर को बेंच पर बैठाकर हम सिर्फ अपना नुकसान कर रहे हैं.
भविष्य के 'सचिन' के आत्मविश्वास से खिलवाड़?
जब वैभव का टीम इंडिया के स्क्वॉड में सिलेक्शन हुआ, तब उनकी उम्र सिर्फ 15 साल और 71 दिन थी. सबसे कम उम्र में नेशनल टीम में चुने जाने का रिकॉर्ड वो पहले ही बना चुके हैं. अब अगर इंग्लैंड दौरे पर उन्हें किसी भी मैच में मौका मिलता है, तो वो मैदान पर कदम रखते ही सचिन तेंदुलकर का 36 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ देंगे. सचिन ने 16 साल 205 दिन की उम्र में भारत के लिए डेब्यू किया था. लेकिन रिकॉर्ड तोड़ने से भी बड़ी बात है खिलाड़ी का हौसला. अगर वैभव वाकई हमारे भविष्य के सचिन हैं, तो उन्हें इस वक्त सबसे ज्यादा आत्मविश्वास देने की जरूरत है.
ट्राई सीरीज़ के फाइनल में तूफानी 94 रन और उससे पहले आईपीएल-19 की सुपर फॉर्म के बावजूद उन्हें बार-बार टीम इंडिया के प्लेइंग-11 से बाहर रखा जाएगा, तो उनका आत्मविश्वास पूरी तरह टूट जाएगा. आने वाले दिनों में भारतीय टीम एशियन गेम्स खेलने भी जाएगी. अगर वैभव के हुनर को बड़े मैचों के लिए तैयार करना है, तो यही सबसे सही वक्त है.
लेफ्ट-राइट कॉम्बिनेशन की उलझन और 'अनकहा' डर
क्रिकेट की रणनीति के हिसाब से देखें तो भारतीय टीम इस वक्त 'राइट-लेफ्ट बैटिंग कॉम्बिनेशन' के एक अजीब से डर में फंसी है. टॉप ऑर्डर में भारत के पास बाएं हाथ के बल्लेबाज अभिषेक शर्मा ओपनर हैं, और तीसरे नंबर पर खेल रहे ईशान किशन भी लेफ्टी हैं. मैनेजमेंट को डर है कि अगर वैभव को खिलाया गया, तो उन्हें आउट ऑफ फॉर्म चल रहे संजू सैमसन की जगह लाना होगा. ऐसा होते ही टॉप-3 के तीनों बल्लेबाज बाएं हाथ के हो जाएंगे.
संजू सैमसन का दाएं हाथ का बल्लेबाज होना इस वक्त उनका अकेला सहारा बना हुआ है. मैनेजमेंट का संजू को न ड्रॉप करने का ये अड़ियल रवैया समझ से बाहर है. एक तरफ एक खिलाड़ी लगातार फ्लॉप हो रहा है, और दूसरी तरफ एक युवा बल्लेबाज अपने करियर की सबसे बेहतरीन फॉर्म में बाहर बैठा है.
मैदान पर टीम या प्लेइंग-11 बनाते वक्त किसी भी खिलाड़ी की पुरानी पहचान नहीं, बल्कि उसकी मौजूदा फॉर्म देखी जाती है. इंग्लैंड के खिलाफ बर्मिंघम के पहले टी20 में संजू सिर्फ 1 रन बनाकर आउट हो गए. इससे पहले आयरलैंड के खिलाफ दो मैचों में उन्होंने कुल 5 रन बनाए थे, जिसमें से एक बार तो वो बिना खाता खोले शून्य पर ही लौट गए थे. आईपीएल 2026 के आंकड़ों को भी मिला लें, तो पिछली 10 टी20 पारियों में संजू ने सिर्फ 1 बार पचास का आंकड़ा पार किया है और उनका दूसरा टॉप स्कोर सिर्फ 28 रन का रहा है.
ऐसे में सिर्फ दाएं हाथ का बल्लेबाज होने की वजह से संजू को लगातार ढोना और सुपर फॉर्म में चल रहे वैभव को नज़रअंदाज करना क्रिकेट के किसी भी नियम के हिसाब से सही नहीं है. टीम मैनेजमेंट में कप्तान और कोच दोनों की ज़िम्मेदारी सबसे ज्यादा होती है. इस बात में कोई शक नहीं कि संजू बड़े और अच्छे खिलाड़ी हैं और उनपर भरोसा दिखाना ज़रूरी है. लेकिन अगर किसी एक खिलाड़ी को चाहने का खामियाज़ा पूरी टीम भुगतेगी तो यहां श्रेयस अय्यर और गौतम गंभीर की जवाबदेही भी बनेगी.
मेरा मानना है कि भारतीय टीम मैनेजमेंट के कुछ फैसले इन दिनों समझदारी से कम और किसी पुरानी ज़िद से ज्यादा लिए जा रहे हैं. ऐसे में मेरी कप्तान श्रेयस अय्यर और कोच गौतम गंभीर से यह बहुत ही सीधी और दिल से अपील है कि वो कागजी जोड़-घटाव और राइट-लेफ्ट की इस बेमतलब उलझन से बाहर निकलें. सच्चाई का सामना करें और खिलाड़ी की आज की फॉर्म को महत्व दें. वैभव सूर्यवंशी जैसे बल्लेबाज़ को बेंच पर बैठाए रखना, जो 29 गेंद में 94 रन बनाने का दम रखता हो, भारतीय क्रिकेट के भविष्य के साथ बड़ी नाइंसाफी है.
वैभव से जल्द से जल्द डेब्यू कराइए, उन्हें वो भरोसा दीजिए जिसके वो असली हकदार हैं. जब 'यूनिवर्सल बॉस बेबी' इंग्लैंड के मैदान पर बल्ला थामकर उतरेगा, तो दुनिया खुद देख लेगी कि भारतीय क्रिकेट का नया दौर शुरू हो चुका है. कहीं ऐसा न हो कि फैसले में देरी और ज़िद के चलते हमें बाद में बस यही कहना पड़े- 'समय चुकें पुनि का पछितानें'.
Vaibhav Sooryavanshi :‘का बरषा सब कृषी सुखानें. समय चुकें पुनि का पछितानें..’ हिंदुस्तान भगवान राम का देश है. उन्हीं के जीवन पर आधारित लिखी गई गोस्वामी तुलसीदास जी की रामचरितमानस की ये चौपाई सीता स्वयंवर के वक्त आती है. इसका सीधा सा मतलब है कि जब सारी फसल ही सूख जाए, तो फिर बारिश होने का क्या फायदा. यानी समय निकल जाने के बाद पछताने से क्या मिलता है. आज भारतीय क्रिकेट टीम का जो हाल है और 15 साल के वैभव सूर्यवंशी के डेब्यू को लेकर जैसी टालमटोल हो रही है, उस पर यह बात बिल्कुल फिट बैठती है. पूरी दुनिया के क्रिकेट फैंस बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं कि ‘यूनिवर्सल बॉस बेबी’ के नाम से मशहूर ये युवा तूफान मैदान पर कब उतरेगा.
मौके और पछतावे के बीच खड़ा भारतीय क्रिकेट
देखा जाए तो वैभव सूर्यवंशी का टीम इंडिया में डेब्यू एक ऐसी ‘अवश्यंभावी’ घटना है, जिसे अब कोई नहीं टाल सकता. लेकिन फिर भी बिना किसी ठोस वजह के इस ऐतिहासिक पल को टालने की जो झूठी दलीलें गढ़ी जा रही हैं. पूर्व भारतीय कप्तान सुनील गावस्कर भी अब इस बढ़ते इंतज़ार से परेशान हो चुके हैं. गावस्कर साहब की मानें तो उन्होंने साफ-साफ कहा है कि ‘वैभव सूर्यवंशी के इंटरनेशनल डेब्यू को जितना टाला जाएगा, उतना ही अपने डेब्यू पर वैभव अधिक दबाव के साथ खेलेंगे’
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वर्ल्ड चैंपियन होने का घमंड और आयरलैंड से हार
आयरलैंड में मिली हार के बाद जब भारतीय टी20 टीम के नए कप्तान श्रेयस अय्यर से वैभव सूर्यवंशी को मौका नहीं दिए जाने की वजह पूछी गई थी. तो श्रेयस ने कहा था कि, ‘वो कोई भी फैसला जल्दबाज़ी में नहीं लेना चाहते. वर्ल्ड कप जीतने वाली टीम के खिलाड़ियों ने लगातार अच्छा प्रदर्शन किया है. ऐसे में टीम में बदलाव ज़रूरत के मुताबिक किया जाएगा.’ सुनने में ये बात एक पल को सही लगती है. लेकिन कोई श्रेयस को भी समझाए कि जब सामने आयरलैंड जैसी कमजोर टीम हो, जिसमें उसके सबसे अच्छे खिलाड़ी भी नहीं खेल रहे थे. तो क्या वहां वैभव को प्लेइंग-11 में आजमाने से डरना सही कहा जाएगा?
इतिहास गवाह रहेगा कि इसी ज़िद के बाद ना सिर्फ पहली बार भारत आयरलैंड से हारा, बल्कि 2 मैचों की सीरीज़ में 2-0 से बुरी तरह पिट गया. एक तरफ फैंस का दिल टूट गया, तो वर्ल्ड चैंपियन होने का सारा रुतबा भी मिट्टी में मिल गया. लेकिन लगता है टीम मैनेजमेंट को इस हार का कोई मलाल ही नहीं है. इसी ज़िद का नतीजा रहा कि 1 जुलाई की शाम बर्मिंघम में जब इंग्लैंड के खिलाफ पहला टी20 मुकाबला हुआ, जो बारिश की वजह से पूरा भी नहीं हो पाया वहां भी वैभव को प्लेइंग-11 में जगह नहीं दी गई.
ऐसा नहीं है कि वैभव सूर्यवंशी को यूं ही ‘वंडर किड’ कहा जा रहा है. श्रीलंका में खेली गई ट्राई सीरीज़ के फाइनल में वैभव ने महज 29 गेंदों पर 94 रनों की जो तूफानी पारी खेली थी, उसने दुनिया के बड़े-बड़े क्रिकेट पंडितों को हैरान कर दिया था. वो पारी साबित करती है कि बड़े मैचों का दबाव इस लड़के के आस-पास भी नहीं फटकता. इससे पहले आईपीएल सीज़न-19 में वैभव ने अपने बल्ले से जो आग उगली थी, वो भी सबके सामने है. आईपीएल 2026 के दौरान 230+ के स्ट्राइक रेट से रन कूटते हुए उन्होंने दुनिया के टॉप गेंदबाजों की लाइन-लेंथ बिगाड़ दी.
मॉर्डन टी20 क्रिकेट में टीम इंडिया को ऐसे ही खिलाड़ी की जरूरत है जो पहली ही गेंद से ही मैच का रुख बदलने का माद्दा रखता हो. भरोसा दिखाया गया तो वैभव भारतीय टीम के लिए वो ‘तुरूप के इक्के’ साबित होंगे जो सामने वाली टीम के हौसले पल भर में पस्त कर देंगे. एक बेवजह के तर्क के चलते ऐसे कमाल के हुनर को बेंच पर बैठाकर हम सिर्फ अपना नुकसान कर रहे हैं.
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भविष्य के ‘सचिन’ के आत्मविश्वास से खिलवाड़?
जब वैभव का टीम इंडिया के स्क्वॉड में सिलेक्शन हुआ, तब उनकी उम्र सिर्फ 15 साल और 71 दिन थी. सबसे कम उम्र में नेशनल टीम में चुने जाने का रिकॉर्ड वो पहले ही बना चुके हैं. अब अगर इंग्लैंड दौरे पर उन्हें किसी भी मैच में मौका मिलता है, तो वो मैदान पर कदम रखते ही सचिन तेंदुलकर का 36 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ देंगे. सचिन ने 16 साल 205 दिन की उम्र में भारत के लिए डेब्यू किया था. लेकिन रिकॉर्ड तोड़ने से भी बड़ी बात है खिलाड़ी का हौसला. अगर वैभव वाकई हमारे भविष्य के सचिन हैं, तो उन्हें इस वक्त सबसे ज्यादा आत्मविश्वास देने की जरूरत है.
ट्राई सीरीज़ के फाइनल में तूफानी 94 रन और उससे पहले आईपीएल-19 की सुपर फॉर्म के बावजूद उन्हें बार-बार टीम इंडिया के प्लेइंग-11 से बाहर रखा जाएगा, तो उनका आत्मविश्वास पूरी तरह टूट जाएगा. आने वाले दिनों में भारतीय टीम एशियन गेम्स खेलने भी जाएगी. अगर वैभव के हुनर को बड़े मैचों के लिए तैयार करना है, तो यही सबसे सही वक्त है.
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लेफ्ट-राइट कॉम्बिनेशन की उलझन और ‘अनकहा’ डर
क्रिकेट की रणनीति के हिसाब से देखें तो भारतीय टीम इस वक्त ‘राइट-लेफ्ट बैटिंग कॉम्बिनेशन’ के एक अजीब से डर में फंसी है. टॉप ऑर्डर में भारत के पास बाएं हाथ के बल्लेबाज अभिषेक शर्मा ओपनर हैं, और तीसरे नंबर पर खेल रहे ईशान किशन भी लेफ्टी हैं. मैनेजमेंट को डर है कि अगर वैभव को खिलाया गया, तो उन्हें आउट ऑफ फॉर्म चल रहे संजू सैमसन की जगह लाना होगा. ऐसा होते ही टॉप-3 के तीनों बल्लेबाज बाएं हाथ के हो जाएंगे.
संजू सैमसन का दाएं हाथ का बल्लेबाज होना इस वक्त उनका अकेला सहारा बना हुआ है. मैनेजमेंट का संजू को न ड्रॉप करने का ये अड़ियल रवैया समझ से बाहर है. एक तरफ एक खिलाड़ी लगातार फ्लॉप हो रहा है, और दूसरी तरफ एक युवा बल्लेबाज अपने करियर की सबसे बेहतरीन फॉर्म में बाहर बैठा है.
मैदान पर टीम या प्लेइंग-11 बनाते वक्त किसी भी खिलाड़ी की पुरानी पहचान नहीं, बल्कि उसकी मौजूदा फॉर्म देखी जाती है. इंग्लैंड के खिलाफ बर्मिंघम के पहले टी20 में संजू सिर्फ 1 रन बनाकर आउट हो गए. इससे पहले आयरलैंड के खिलाफ दो मैचों में उन्होंने कुल 5 रन बनाए थे, जिसमें से एक बार तो वो बिना खाता खोले शून्य पर ही लौट गए थे. आईपीएल 2026 के आंकड़ों को भी मिला लें, तो पिछली 10 टी20 पारियों में संजू ने सिर्फ 1 बार पचास का आंकड़ा पार किया है और उनका दूसरा टॉप स्कोर सिर्फ 28 रन का रहा है.
ऐसे में सिर्फ दाएं हाथ का बल्लेबाज होने की वजह से संजू को लगातार ढोना और सुपर फॉर्म में चल रहे वैभव को नज़रअंदाज करना क्रिकेट के किसी भी नियम के हिसाब से सही नहीं है. टीम मैनेजमेंट में कप्तान और कोच दोनों की ज़िम्मेदारी सबसे ज्यादा होती है. इस बात में कोई शक नहीं कि संजू बड़े और अच्छे खिलाड़ी हैं और उनपर भरोसा दिखाना ज़रूरी है. लेकिन अगर किसी एक खिलाड़ी को चाहने का खामियाज़ा पूरी टीम भुगतेगी तो यहां श्रेयस अय्यर और गौतम गंभीर की जवाबदेही भी बनेगी.
मेरा मानना है कि भारतीय टीम मैनेजमेंट के कुछ फैसले इन दिनों समझदारी से कम और किसी पुरानी ज़िद से ज्यादा लिए जा रहे हैं. ऐसे में मेरी कप्तान श्रेयस अय्यर और कोच गौतम गंभीर से यह बहुत ही सीधी और दिल से अपील है कि वो कागजी जोड़-घटाव और राइट-लेफ्ट की इस बेमतलब उलझन से बाहर निकलें. सच्चाई का सामना करें और खिलाड़ी की आज की फॉर्म को महत्व दें. वैभव सूर्यवंशी जैसे बल्लेबाज़ को बेंच पर बैठाए रखना, जो 29 गेंद में 94 रन बनाने का दम रखता हो, भारतीय क्रिकेट के भविष्य के साथ बड़ी नाइंसाफी है.
वैभव से जल्द से जल्द डेब्यू कराइए, उन्हें वो भरोसा दीजिए जिसके वो असली हकदार हैं. जब ‘यूनिवर्सल बॉस बेबी’ इंग्लैंड के मैदान पर बल्ला थामकर उतरेगा, तो दुनिया खुद देख लेगी कि भारतीय क्रिकेट का नया दौर शुरू हो चुका है. कहीं ऐसा न हो कि फैसले में देरी और ज़िद के चलते हमें बाद में बस यही कहना पड़े- ‘समय चुकें पुनि का पछितानें’.