Rishabh Sharma
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फीफा वर्ल्ड कप 2026 का क्लाइमैक्स आते ही फैंस के ज़ेहन में इस वक्त सिर्फ एक बड़ा सवाल है. सवाल ये कि आखिर टूर्नामेंट का फाइनल खत्म होने के बाद वर्ल्ड कप की सुनहरी चमचमाती ट्रॉफी किस टीम का कप्तान उठाएगा? आज की स्थिति में यकीनन इस सवाल का सटीक जवाब देना बेहद मुश्किल है. यहां सीधी टक्कर वर्ल्ड फुटबॉल की टॉप-4 अजेय टीमों के बीच है. लेकिन एक बात तो शीशे की तरह साफ है कि ये दोनों सेमीफाइनल मुकाबले बेहद ज़ोरदार और कांटे के होने वाले हैं. जहां लियोनेल मेसी से लेकर जूड बेलिंगहैम और डिक्लन राइस से लेकर किलियन एम्बाप्पे, माइकल ओलिस और मिकेल मेरिनो जैसे एक से बढ़कर एक दिग्गज मैदान पर उतरेंगे. टूर्नामेंट के इन टॉप खिलाड़ियों की मौजूदगी नॉकआउट मुकाबलों के रोमांच को फैंस के लिए सातवें आसमान पर ले जाएगी.
डलास के भव्य स्टेडियम में जब फ्रांस और स्पेन की टीमें 20 साल बाद वर्ल्ड कप के मंच पर आमने-सामने होंगी, तो यह सिर्फ दो देशों की नहीं, बल्कि फुटबॉल की दो अलग-अलग शैलियों की टक्कर होगी. कहा जा सकता है कि यह मुकाबला पूरी तरह से फ्रांस की अटैकिंग गेम और स्पेन के अभेद्य डिफेंस की क्लासिक जंग हो सकता है. यहां वो फ्रांस है जो लगातार तीसरी बार फाइनल में पहुंचने के इरादे से मैदान में उतरेगा.
टूर्नामेंट में अब तक साझा रूप से सबसे ज्यादा 8 गोल कर चुके एम्बाप्पे की रफ्तार और उस्मान डेम्बेले के हमलों का तूफान स्पेन की उस रक्षा दीवार से टकराएगा. यहां टक्कर आयुष लापोर्टे और 19 साल के युवा पाऊ कुबार्सी से भी होगी जिनकी बदौलत स्पेन का डिफेंस अभेद्य बना लगता है. यहां गौर करने वाली बात ये होगी कि स्पेन ने बेल्जियम के खिलाफ क्वार्टर फाइनल तक एक भी गोल नहीं खाया था, जिससे यह सेमीफाइनल और भी दिलचस्प होने वाला है.
All four @FIFAWorldCup 2026 semi-finalists have previously won the tournament 🏆 pic.twitter.com/KmknHZRPcR
— FIFA (@FIFAcom) July 13, 2026
मॉर्डन फुटबॉल को समझने वाले जानते हैं कि वर्ल्ड कप जैसे बड़े टूर्नामेंट में मैच अक्सर मिडफील्ड में जीते जाते हैं. इस हाई-वोल्टेज मैच में कुछ ऐसे खिलाड़ी हैं जो पलक झपकते ही बाजी पलट सकते हैं. फ्रांस के पास माइकल ओलिस के रूप में एक ऐसा रचनात्मक दिमाग है, जो अब तक 5 असिस्ट कर चुके हैं और फुटबॉल के ऑल टाइम ग्रेटेस्ट खिलाड़ियों में शुमार पेले के 1970 के ऐतिहासिक रिकॉर्ड की बराबरी से सिर्फ एक कदम दूर हैं. उनकी सटीक पासिंग ही फ्रांस के आक्रमण की असली ताकत है. वहीं स्पेन की ताकत उनकी बेंच स्ट्रेंथ में छिपी है. मिकेल मेरिनो के रूप में उनके पास एक ऐसा ‘सुपर सब’ है, जो आखिरी मिनटों में नई ऊर्जा के साथ उतरकर थके हुए विपक्षी डिफेंस को तोड़ देता है. पुर्तगाल और बेल्जियम के खिलाफ उनकी यही खूबी स्पेन को सेमीफाइनल तक खींच लाई है.
Lionel Messi leads Argentina in nearly every single offensive category at this World Cup 🤯
— ESPN FC (@ESPNFC) July 13, 2026
39 years old and still a top player 👏 pic.twitter.com/96QAp6NBjY
वर्ल्ड कप का दूसरा सेमीफाइनल अटलांटा स्टेडियम में खेला जाएगा. जहां ये मैदान उस सुलगती रंजिश का गवाह बनेगा जो 1982 के फॉकलैंड युद्ध और 1986 में डिएगो माराडोना के ‘हैंड ऑफ गॉड’ से शुरू हुई थी. ये दोनों टीमें पहली बार वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में भिड़ रही हैं, इसलिए दांव पर सिर्फ फाइनल का टिकट नहीं, बल्कि दशकों का गुरूर भी है. वर्ल्ड कप की डिफेंडिंग चैंपियन अर्जेंटीना ने इस टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा 17 गोल दागे हैं, जो उनके लैटिन अमेरिकी ‘फ्लेयर’ और आकर्षक खेल को दर्शाता है. दूसरी तरफ फीफा रैंकिंग में दुनिया की नंबर-4 टीम इंग्लैंड है, जो वर्ल्ड कप में अब तक 13 गोल दागकर ठीक उनके पीछे है. यह मुकाबला इंग्लैंड के कड़े अनुशासन और अर्जेंटीना के जुनूनी खेल के बीच की जंग रहेगा, जहां मैदान पर भावनाओं का सैलाब आना तय है.
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बताने की ज़रूरत नहीं कि वर्ल्ड कप 2026 में अर्जेंटीना की उम्मीदों का सबसे बड़ा केंद्र 39 वर्षीय लियोनेल मेसी हैं. मेसी का अर्जेंटीनी टीम में वही कद है जो कभी भारतीय क्रिकेट टीम में सचिन तेंदुलकर का हुआ करता था. हालांकि सचिन 2011 वर्ल्ड कप में कप्तान नहीं थे, लेकिन पूरी भारतीय टीम सचिन के लिए ही वर्ल्ड कप जीतना चाहती थी. आज अर्जेंटीना की टीम के खेलने का अंदाज़ इस बात की तस्दीक करता है कि वर्ल्ड कप जीतना है और मेसी के नाम इसे समर्पित करना है. वैसे कप्तान लियोनेल मेसी भी 8 गोल और 2 असिस्ट के साथ टूर्नामेंट की टॉप फॉर्म में चल रहे हैं.
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आंकड़े कहते हैं कि इस वर्ल्ड कप में मेसी ने मैदान पर अपना 64 प्रतिशत समय पैदल चलकर बिताया है, लेकिन फिर भी बॉल मिलते ही वो पल भर में विरोधी टीमों के हौसलों को तहस-नहस करने में सफल रहे. दूसरी तरफ करीब 6 दशकों से वर्ल्ड कप की ट्रॉफी का इंतजार कर रहे इंग्लैंड की उम्मीदों का रथ 23 वर्षीय जूड बेलिंगहैम चला रहे हैं. बेलिंगहैम ने लगातार दो नॉकआउट मैचों में दो-दो गोल दागकर इंग्लैंड को नई ऊर्जा दी है. जब मिडफील्ड में इंग्लैंड के डिफेंसिव एंकर डिक्लन राइस का सामना अर्जेंटीना के एलेक्सिस मैक एलिस्टर से होगा, तो मिडफील्ड की यही टक्कर इस ऐतिहासिक मुकाबले के विजेता का फैसला करेगी.
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वैसे अगर टीमों की मौजूदा फॉर्म, रणनीति और दबाव झेलने की क्षमता का बारीकी से आकलन किया जाए, तो फाइनल की तस्वीर काफी हद तक साफ नजर आती है. ज्यादातर लोग यही मानेंगे कि स्पेन का खेल शानदार है, लेकिन रैंकिंग में वर्ल्ड नंबर-1 टीम फ्रांस के पास नॉकआउट मैचों का दबाव सोखने का गहरा अनुभव और एम्बाप्पे-ओलिस की आक्रामक ताकत है. यहां फ्रांस का कॉम्बिनेशन उन्हें स्पेन पर भारी बनाता है.
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दूसरी ओर इंग्लैंड की टीम कागजों पर कितनी भी संतुलित क्यों न हो, अर्जेंटीना के पास मेसी फैक्टर, डिफेंडिंग चैंपियन का आत्मविश्वास और वो जिद्दी मानसिकता है जो उन्हें मुश्किल हालात से बाहर निकाल लाती है. इसी वर्ल्ड कप में अर्जेंटीना ने 2 मौकों पर लगभग हारी दिख रही बाज़ी को जीत में बदलकर इसे मुमकिन किया है. यूं भी फुटबॉल फैंस के नजरिए से देखें तो मेसी का मैजिक और एम्बाप्पे की रफ्तार का फाइनल मुकाबला दुनिया भर के लिए सबसे बड़ा ब्लॉकबस्टर होगा. देखना दिलचस्प होगा कि 20 जुलाई को न्यूयॉर्क में होने वाले फाइनल मैच में फ्रांस और अर्जेंटीना के बीच ही खिताबी जंग देखने को मिलेगी या नहीं!
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