News 24 Exclusive: क्या 2027 का वर्ल्ड कप खेलेंगे वैभव सूर्यवंशी? यंग क्रिकेटर के चाचा ने कह दी बड़ी बात

Will Vaibhav Sooryavanshi Play World Cup 2027: इंडिया ए स्क्वॉड में सिलेक्शन होने के बाद वैभव सूर्यवंशी के चाचा राजीव सूर्यवंशी ने न्यूज़ 24 के सामने अपने दिल की बात बताई है. जाहिर सी बात है कि वो बीसीसीआई के इस फैसले से काफी खुश हैं, और अपने भतीजे के बेहतर भविष्य के लिए कॉन्फिडेंट हैं.

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Vaibhav Sooryavanshi Uncle Rajeev Sooryavanshi’s Interview With News 24: श्रीलंका में होनी वाली ट्रायंगुलर सीरीज के लिए इंडिया-ए की टीम में वैभव सूर्यवंशी का सिलेक्शन 14 मई को हुआ. इसका मतलब है कि इस यंग क्रिकेटर को भारत की सीनियर टीम के लिए तैयार किया जा रहा है. ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि क्या दक्षिण अफ्रीका, नामीबिया और जिम्बाब्वे में होने वाले वर्ल्ड कप 2027 में वैभव को मौका मिलेगा. ऐसे ही कुछ सवालों का जवाब उनके चाचा ने दिया.

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वैभव के चाचा से सवाल-जवाब

इंडिया ए टीम में वैभव सूर्यवंशी का सिलेक्शन के ठीक बाद उनके चाचा राजीव सूर्यवंशी ने पहला इंटरव्यू न्यूज़ 24 को दिया, और अपने भतीजे से जुड़ी कई बातें बताईं. आइए जानते हैं उन्हें क्या दिलचस्प बातें वैभव के बारे में बताई हैं.

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सवाल: वैभव ने छोटी उम्र से ही क्रिकेट में करियर बनाना शुरू कर दिया था, तब वो अपनी पढ़ाई के साथ प्रैक्टिस और टूर्नामेंट्स की टाइमिंग को कैसे मैनेज करते थे?

राजीव सूर्यवंशी: वैभव घर में सुबह 5 बजे से 6 बजे तक ट्यूशन पढ़ते थे, उसके बाद नेट प्रैक्टिस करते थे. अगर कभी स्कूल की टाइमिंग अर्ली मॉर्निंग हो जाती थी, तब वो क्लास खत्म करने के बाद दोपहर और शाम को खेलते थे. अगर स्कूल का वक्त 10 बजे से होता था, तब सुबह में ही वो अभ्यास करते थे.

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सवाल: क्या कभी ऐसी परेशानी आती थी, कि स्कूल का टाइम और प्रैक्टिस एक साथ मैनेज नहीं हो पा रहा है.

राजीव सूर्यवंशी: दिक्कत की क्या बात है, अगर कोई इंसान मन लगाकर सिर्फ 2 घंटे प्रैक्टिस करे, तो भी काफी असर देखने को मिल सकता है. अगर कोई खेलना नहीं चाहता, तो उसे पूरा दिन भी खेलने दे दिया जाए, फिर भी कोई फायदा नहीं होगा. लगन से निरंतर काम करने से इसका नतीजा अच्छा ही आता है, तब समय मायने नहीं रखता.

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सवाल: दसवीं बोर्ड के अलावा क्या पहले कभी ऐसा हुआ कि अहम टूर्नामेंट्स और परीक्षा की तारीखें आपस में टकरा गईं और आपको किसी एक को चुनना पड़ा?

राजीव सूर्यवंशी: स्कूल के समय अगर ऐसे हालात आते थे, तब जो सही लगता था, उसे चुना जाता था, लेकिन अक्सर परीक्षा को ज्यादा अहमियत दी जाती थी. कई बार अहम टूर्नामेंट में क्रिकेट को भी प्राथमिकता देते थे. हालांकि कई मुकाबले संडे को खेले जाते थे, इसलिए ये मैनेज हो जाता था.

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सवाल: क्या कभी ऐसा डर लगा कि अगर क्रिकेट में करियर न बन पाए, और पढ़ाई में भी पीछे छूट जाएं, तो जिंदगी कितनी मुश्किल हो जाएगी?

राजीव सूर्यवंशी: हमें इस बात का पूरा यकीन था, कि वैभव एक दिन जरूर कामयाब होंगे, और सपना सच भी हो गया. अगर सफल नहीं होते, तो फिर जिंदगी चलाने के लिए कुछ न कुछ उपाय निकाल लेते.

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सवाल: पढ़ाई और क्रिकेट को बैलेंस करने में स्कूल ने वैभव की कितनी मदद की?

राजीव सूर्यवंशी: वैभव स्कूल की टीम से खेलेते थे, इसलिए क्रिकेट करियर बनाने में कोई दिक्कत नहीं आई, स्कूल की तरफ से पूरी मदद मिलती थी.

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सवाल: क्या पड़ोसी और रिश्तेदारों ने ऐसा कहा कि क्रिकेट में करियर बनाने से अच्छा है, पढ़ाई-लिखाई पर ज्यादा फोकस किया जाए?

राजीव सूर्यवंशी: समाज में हर किसी की मानसिकता अलग-अलग होती हैं, लेकिन किसी का सुनकर हम क्यों काम करें. हमें अपने दिल की सुननी होती है, जो खुद के दिल में आए, वही करना चाहिए. समाज में तो लोग डॉक्टर, इंजीनियर और आईएएस बनाने की बात करते हैं, लेकिन हम बच्चे की इंटरेस्ट और क्वालिटी देखते हैं, और उसी के मुताबिक काम करते हैं.

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सवाल: इंडिया ए टीम में वैभव का सिलेक्शन हुआ है, यानी ये सीनियर टीम इंडिया में जाने की तैयारी है, क्या आपको यकीन था कि ये इतनी कम उम्र में मुमकिन हो पाएगा.

राजीव सूर्यवंशी: बीसीसीआई वैभव के खेल पर पैनी निगाह रखे हुए है, उनके टैलेंट को देखकर जैसा लगेगा, बोर्ड वैसा ही करेगा.

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सवाल: क्या आपको लगा था कि इतनी कम उम्र में वो इस मुकाम पर पहुंच जाएंगे.

राजीव सूर्यवंशी: हमें यकीन था, तभी तो हमने बचपन से इनको क्रिकेट खेलने दिया, बिना मेहनत के यकीन पैदा नहीं होता.

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सवाल: इंडिया ए के लिए वैभव क्या तैयारी करने वाले हैं, क्योंकि अब कॉम्पिटीशन का लेवल बढ़ चुका है, और चुनौतियां भी और मुश्किल होने वाली हैं

राजीव सूर्यवंशी: जैसा टाइम का डिमांड होगा, हम वैभव से वैसी ही तैयारी कराएंगे, और उनकी जो भी जरूरत होगी, हम उसे पूरा करेंगे.

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सवाल: आपको क्या लगता है कि वैभव का टीम इंडिया में कब डेब्यू हो पाएगा?

राजीव सूर्यवंशी: ये सिलेक्शन कमेटी पर डिपेंड करता है, जो उनके टैलेंट को देखकर सही वक्त पर सही फैसला लेंगे.

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सवाल: क्या आपको लगता है कि वर्ल्ड कप 2027 में वैभव खेल पाएंगे.

राजीव सूर्यवंशी: हमलोग ऐसा विश्वास रखते हैं, कि टीम इंडिया में उनको मौका मिलेगा. हालांकि ये सेलिक्शन कमेटी पर निर्भर करता है

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सवाल: वैभव अभी सिर्फ 15 साल के हैं, तो अक्सर ये चिंता बनी रहती है कि इतनी कम उम्र में इतनी दौलत आ जाना क्या खेल से फोकस हटा सकता है?

राजीव सूर्यवंशी: वैभव का फोकस पूरा क्रिकेट पर ही है, उन्हें इस बात की चिंता नहीं रहती, कि पैसे कहां से आ रहे हैं. एक गार्जियन के तौर पर हमलोग उनके साथ हमेशा खड़े हैं.

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लेख समाप्त

लेखक के बारे में

Shariqul Hoda

Shariqul Hoda

न्यूज़ 24 डिजिटल में शारिकुल होदा सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. मुख्य तौर पर वह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खबरें लिखते हैं. शारिकुल ने 2008 में दूरदर्शन में बतौर इंटर्न अपनी शुरुआत की, इसके बाद वह दैनिक जागरण, टीवी टुडे नेटवर्क, जनसंदेश, श्री न्यूज़, भारत खबर, स्पोर्ट्सकीड़ा, WION और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. उन्होंने 3 लोकसभा चुनाव और कई विधानसभा चुनाव से लेकर देश की बड़ी घटनाओं को कवर किया है. अपने डेढ़ दशक के मीडिया करियर में शारिकुल ने देश की राजनीति, इंटरनेशनल डिप्लोमेसी, खेलकूद से जुड़ी घटनाओं की अच्छी समझ हासिल की है. कितने साल का तजुर्बा: 16 साल शिक्षा: शारिकुल ने बैंगलोर यूनिवर्सिटी (आचार्य इंस्टीट्यूट) से बीए जर्नलिज्म और गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी (एपीजे इंस्टीट्यूट) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म और मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई की है.
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