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फ्रेंचाइजी क्रिकेट लीग्स की बाढ़ ने बढ़ाया ICC का सिरदर्द, अब शुरू हुई एक्शन की तैयारी!

Franchise Based Cricket League: आईपीएल की कामयाबी के बाद दुनिया भर के क्रिकेट बोर्ड ने फ्रैंचाइजी बेस्ड लीग को शुरू किया, जो आज सुपरहिट साबित हो रहा है, लेकिन इसके बीच इंटरनेशनल कैलेंडर पर इसका असर न पड़े, इसकी तैयारी आईसीसी कर रही है.

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ICC To Take action on Franchise Cricket’s Boom: आईसीसी ने फ्रैंचाइजी बेस्ड क्रिकेट लीग के बढ़ते असर से निपटने के लिए एक खास कमेटी बनाने का फैसला किया है, जो ग्लोबल शेड्यूल पर इसके असर की स्टडी करेगी. ये कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब दुनिया भर में टी20 लीग का विस्तार लगातार जारी है, जिससे इंटरनेशनल मैचों और बाइलेट्रल सीरीज के लिए चुनौतियां खड़ी हो रही हैं. क्रिकेट प्रशासकों को इस बात की बढ़ती चिंता है कि मैचों से भरा ये कैलेंडर इस खेल के लंबे समय के बैलेंस को अफेक्ट कर सकता है.

क्रिकेट लीग्स को लेकर ICC फिक्रमंद

पिछले एक दशक में फ्रेंचाइजी टूर्नामेंट क्रिकेट के लैंडस्केप का एक अहम हिस्सा बन गए हैं. आईपीएल के साथ-साथ एसए20, आईएल टी20, बिग बैश लीग, बांग्लादेश प्रीमियर लीग, लंका प्रीमियर लीग, द हंड्रेड और कैरेबियन प्रीमियर लीग जैसी कॉम्पिटिशन अब सालाना शेड्यूल में अहम जगह बना चुकी हैं. यूरोपियन टी20 प्रीमियर लीग के जल्द ही शुरू होने से इस दबाव के और बढ़ने की उम्मीद है. आईसीसी ने एक बयान में कहा, ‘बोर्ड ने फ्रेंचाइजी क्रिकेट के बढ़ते विस्तार पर चिंता जताई और मौजूदा ढांचे के भीतर इंटरनेशनल कैलेंडर के साथ फ्रेंचाइजी क्रिकेट के तालमेल का आकलन करने के लिए एक कमेटी बनाने का फैसला किया.’

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बैलेंस बनाने की कोशिश

आईसीसी ने पहले भी इंटरनेशनल क्रिकेट और फ्रेंचाइजी लीग की कमर्शियल कामयाबी के बीच संतुलन बनाने के कई तरीकों पर चर्चा की है. एक सुझाव ये रहा है कि एक खिलाड़ी हर साल कितने टूर्नामेंट में हिस्सा ले सकता है, इसकी तादाद सीमित की जाए, साथ ही ये भी एनश्योर किया जाए कि नेशनल कमिटमेंट ही मेन प्रायोरिटी बनी रहें. ये चुनौती और भी बड़ी हो गई है, क्योंकि खिलाड़ियों को लीग कॉन्ट्रैक्ट और इंटरनेशनल ड्यूटी के बीच शेड्यूल को लेकर अक्सर टकराव का सामना करना पड़ता है.

यह भी पढ़ें- बिग बैश लीग में 8 की जगह अब खेलेंगी सिर्फ 7 टीमें, अगले सीजन से पहले किस फ्रेंचाइजी का कटेगा पत्ता?

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छोटे देशों पर पड़ेगा असर?

ये मुद्दा खास तौर पर क्रिकेट खेलने वाले छोटे देशों के लिए ज्यादा अहम है, जहां फ्रैंचाइजी क्रिकेट के मौके अक्सर ज्यादा आर्थिक फायदे देते हैं. निकोलस पूरन और हेनरिक क्लासेन जैसे कई जाने-माने खिलाड़ियों ने पहले ही इंटरनेशनल क्रिकेट से अपना ध्यान हटा लिया है. वेस्टइंडीज के पूर्व स्पिनर सुनील नरेन ने भी अपने करियर का ज्यादातर हिस्सा फ्रेंचाइजी क्रिकेट को प्रायोरिटी देते हुए बिताया. इस नई कमेटी के जरिए, आईपीएल को उम्मीद है कि वो ऐसे समाधान निकाल पाएगी जो इंटरनेशनल क्रिकेट को सुरक्षित रखें, साथ ही मॉडर्न क्रिकेट में फ्रेंचाइजी लीग के बढ़ते रोल को भी पहचान दें.’

First published on: Jun 02, 2026 10:28 PM

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About the Author

Shariqul Hoda

न्यूज़ 24 के डिजिटल सेक्शन में शारिकुल होदा सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. मुख्य तौर पर वो स्पोर्ट्स की खबरें लिखते हैं. हालांकि उन्हें नेशनल, इंटरनेशनल, ट्रैवल, टेक, हेल्थ, लाइफस्टाइल और रिलेशनशिप सेक्शन का बेहतरीन तजुर्बा है. 2008 में दूरदर्शन में बतौर इंटर्न अपनी शुरुआत करने के बाद, वो दैनिक जागरण, टीवी टुडे नेटवर्क, जनसंदेश, श्री न्यूज़, भारत खबर, स्पोर्ट्सकीड़ा, WION और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दे चुके. एजुकेशनल क्वालिफिकेशन की बात करें तो उन्होंने बैंगलौर यूनिवर्सिटी (आचार्य इंस्टीट्यूट) से बीए जर्नलिज्म, और गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी (एपीजे इंस्टीट्यूट) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म और मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई की है.

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Shariqul Hoda

न्यूज़ 24 के डिजिटल सेक्शन में शारिकुल होदा सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. मुख्य तौर पर वो स्पोर्ट्स की खबरें लिखते हैं. हालांकि उन्हें नेशनल, इंटरनेशनल, ट्रैवल, टेक, हेल्थ, लाइफस्टाइल और रिलेशनशिप सेक्शन का बेहतरीन तजुर्बा है. 2008 में दूरदर्शन में बतौर इंटर्न अपनी शुरुआत करने के बाद, वो दैनिक जागरण, टीवी टुडे नेटवर्क, जनसंदेश, श्री न्यूज़, भारत खबर, स्पोर्ट्सकीड़ा, WION और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दे चुके. एजुकेशनल क्वालिफिकेशन की बात करें तो उन्होंने बैंगलौर यूनिवर्सिटी (आचार्य इंस्टीट्यूट) से बीए जर्नलिज्म, और गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी (एपीजे इंस्टीट्यूट) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म और मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई की है.

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