---विज्ञापन---

Religion angle-right

Satuani Parv: सतुआनी क्या है, कब है और क्यों मनाते हैं? जानें सटीक डेट, महत्व और रोचक रीति-रिवाज

Satuani Parv: हर साल मेष संक्रांति पर मनाया जाने वाला सतुआनी त्योहार गर्मी की शुरुआत, सूर्य के राशि परिवर्तन और खरमास के अंत का संकेत देता है. इसका संबंध नई फसल और सेहत से भी जुड़ा है. आइए जानते हैं, सतुआनी क्या है और क्यों खास है यह लोक पर्व?

---विज्ञापन---

Satuani Parv: सतुआनी, जिसे सतुआन या सतुआ संक्रांति भी कहा जाता है, पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड का प्रमुख लोक पर्व है. यह दिन सूर्य के मेष राशि में प्रवेश का प्रतीक है. इसी के साथ गर्मी की शुरुआत मानी जाती है और खरमास की समाप्ति होती है. यह पर्व सिर्फ मौसम बदलने का संकेत नहीं, बल्कि नई फसल, सेहत और लोक परंपराओं का उत्सव है. आइए जानते हैं, सतुआनी क्या है, कब है और क्यों मनाते हैं?

कब है सतुआनी 2026

गांव-देहात की सुबह, मिट्टी की खुशबू और रसोई से आती सत्तू की सोंधी महक, इसी माहौल के बीच आता है सतुआनी का त्योहार. हर साल मेष संक्रांति के दिन मनाया जाने वाला यह पर्व 2026 में 14 अप्रैल, मंगलवार को मनाया जाएगा.

---विज्ञापन---

सत्तू का खास महत्व

इस दिन सत्तू का सेवन जरूरी माना जाता है. भुने चने, जौ या मक्के से बना सत्तू शरीर को ठंडक देता है. इसे पानी, नमक, नींबू या गुड़ के साथ खाया जाता है. गांवों में इसे ‘गर्मी का देसी एनर्जी ड्रिंक’ भी कहा जाता है.

क्यों मनाया जाता है?

यह त्योहार नई फसल के आगमन की खुशी में मनाया जाता है. किसान अपने खेतों की उपज का आभार जताते हैं. साथ ही यह मौसम के अनुसार खानपान बदलने का संकेत भी देता है.

---विज्ञापन---

यह भी पढ़ें: Neelam Wearing Guide: नीलम है सबसे सक्रिय रत्न, पहनने से पहले जानें सूटेबल है या नहीं, वरना

टिकोला और देसी स्वाद

सत्तू के साथ कच्चा आम यानी टिकोला खाने का खास चलन है. माना जाता है कि इस दिन से पहले आम का सेवन नहीं किया जाता. टिकोला की चटनी और आम पन्ना इस दिन खास पकवान होते हैं.

---विज्ञापन---

पूजा और दान की परंपरा

सुबह स्नान के बाद लोग सत्तू, गुड़, चना दाल और पानी से भरा घड़ा दान करते हैं. सूर्य देव और विष्णु की पूजा होती है. कई जगह तुलसी के पास पानी टपकाने की परंपरा भी निभाई जाती है.

सेहत और विज्ञान का मेल

सतुआनी केवल परंपरा नहीं, बल्कि विज्ञान से भी जुड़ा है. सत्तू, कच्चा आम और ठंडे पेय शरीर को लू से बचाते हैं. यह पर्व बताता है कि मौसम बदलते ही खानपान भी बदलना जरूरी है.

---विज्ञापन---

यह भी पढ़ें: Akshaya Tritiya Facts: अक्षय तृतीया क्यों है सनातन धर्म का सबसे शुभ दिन, जानें यूनिक और रोचक फैक्ट्स

डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

---विज्ञापन---

First published on: Apr 06, 2026 12:53 PM

End of Article

About the Author

Shyamnandan

श्यामनंदन कुमार पिछले 20 से अधिक वर्षों से पत्रकारिता और कंटेंट क्रिएशन की दुनिया में सक्रिय हैं। वर्तमान में वे News24 में धर्म और ज्योतिष सेक्शन के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने पत्रकारिता में एम.ए. की पढ़ाई काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) से की है और भारतीय विद्या भवन, नई दिल्ली से ज्योतिष का सांगोपांग अध्ययन किया है। वे वैदिक ज्योतिष (पाराशरीय), अंक ज्योतिष (न्यूमरोलॉजी) और सामुद्रिक शास्त्र के क्षेत्र में गहरी विशेषज्ञता रखते हैं और स्वयं एक सक्रिय ज्योतिषविद हैं। जो साल 2015 से धर्म और ज्योतिष विषय पर लगातार लिख रहे हैं। उनकी कोशिश रहती है कि पाठकों को सटीक, सरल और उपयोगी जानकारी मिल सके।  धार्मिक परंपराओं, वैदिक ज्योतिष, ग्रह-गोचर, राशिफल, अंक ज्योतिष, वास्तु, सामुद्रिक शास्त्र, व्रत-त्योहार, पूजा-पद्धति और आध्यात्मिक विषयों को आसान और भरोसेमंद भाषा में पाठकों तक पहुंचाना उनकी पहचान है। डिजिटल मीडिया, SEO और कंटेंट रणनीति की उन्हें गहरी और अच्छी समझ है।

संपर्क करें: 📧 Email: shyam.nandan@bagconvergence.in 𝕀𝕟 ~ LinkedIn:
https://www.linkedin.com/in/shyamnandan-kumar/ 𝕏 ~ Twitter/X: @Shyamnandan_K 𝔽 ~ facebook: https://www.facebook.com/shyamnandank73

Read More
---विज्ञापन---
संबंधित खबरें
Sponsored Links by Taboola