तमिलनाडु के CM जोसेफ विजय ने Mookambika Devi Temple में किये दर्शन, जानिए मंदिर की मान्यता और इतिहास

Mookambika Devi Temple: कर्नाटक के कोल्लूर स्थित मूकांबिका देवी मंदिर में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय बीते शुक्रवार दर्शन किये. मंदिर में सीएम जोसेफ विजय ने पूजा-अर्चना की और 1.6 किलो चांदी की तलवार भेंट दी.

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Photo Credit- News24GFX

Mookambika Devi Temple: मूकांबिका देवी मंदिर में दर्शन के लिए तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय पहुंचे थे. मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने 12 जून को मंदिर में दर्शन किये. उन्होंने मूकांबिका देवी मंदिर में दर्शन किये और साथ ही मंदिर में 1.6 किलो चांदी की तलवार भेंट दी. इस तलवार को विजय का प्रतीक बताया गया. सीएम विजय जोसेफ ने मंदिर में दर्शन और पूजा-अर्चना की. बता दें कि, मूकांबिका देवी मंदिर कर्नाटक उडुपी जिले के बायंदूर तालुक के कोल्लूर क्षेत्र में है. आइये इस मंदिर के बारे में विस्तार से जानते हैं.

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मूकांबिका देवी मंदिर, कर्नाटक

कर्नाटक के मूकांबिका देवी मंदिर का इतिहास 1200 साल पुराना बताया जाता है. मंदिर का निर्माण कार्य आदि शंकराचार्य ने कराया था. आदि शंकराचार्य ने इस मंदिर में देवी मां की प्रतिमा की स्थापना स्वयं की थी. यह मंदिर कर्नाटक के कोल्लूर क्षेत्र में सुरम्य कोडाचाद्री पहाड़ियों की तलहटी में सौपर्णिका नदी के तट पर स्थित है. कर्नाटक का मूकांबिका देवी मंदिर अत्यंत प्रसिद्ध और पवित्र हिंदू मंदिर है. मूकांबिका देवी के दर्शन से ज्ञान, शक्ति और समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है.

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मूकांबिका देवी मंदिर की मान्यता

मंदिर को लेकर प्राचीन मान्यता है कि, महान संत आदि शंकराचार्य ने यहां घोर तपस्या की थी. इससे प्रसन्न होकर माता ने उन्हें दर्शन दिये थे. इसके बाद स्वयं आदि शंकराचार्य ने इस मंदिर की स्थापना की थी. मूकांबिका देवी मंदिर को शिव और शक्ति का अनूूठा संगम माना जाता है. मूकांबिका देवी मंदिर के गर्भगृह के ठीक नीचे एक प्राचीन ज्योतिर्लिंग है.

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प्राचीन ज्योतिर्लिंग को एक स्वर्ण रेखा दो हिस्सों में विभाजित करती है. ज्योतिर्लिंग के बाएं भाग को त्रिदेवी यानी महाकाली, महालक्ष्मी, महासरस्वती और दाएं भाग को त्रिदेव यानी ब्रह्मा, विष्णु, महेश का प्रतीक माना जाता है. मंदिर को लेकर एक अन्य पौराणिक कथा के अनुसार, यहां पर कौमासुर नाम का राक्षस था. वह शिव जी की कठोर तपस्या कर अमरता का वरदान चाहता था. लेकिन देवी सरस्वती ने उसकी जीभ को वश में कर लिया इसके बाद वह मूकासुर बन गया. मूकासुर के वध के लिए त्रिदेवियों ने मूकांबिका देवी का रूप धारण किया और मूकासुर का वध किया.

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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लेखक के बारे में

Aman Maheshwari

Aman Maheshwari

अमन माहेश्वरी न्यूज 24 में सीनियर सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वह खबरों को समझकर पाठकों तक आसान शब्दों में पहुंचाने का काम बखूबी करते हैं. इन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के डॉ भीमराव अंबेडकर कॉलेज से पत्रकारिता में ग्रेजुएशन (BJMC) किया है. इसके बाद उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन (MJMC) किया. पढ़ाई पूरी करने के बाद डिजिटल मीडिया में अपने करियर की शुरुआत की. सबसे पहले जी मीडिया डीएनए हिंदी के साथ जुड़े. पिछले 5 साल से अमन डिजिटल मीडिया से जुड़े हुए हैं. डीएनए हिंदी में बतौर ट्रेनी जर्नलिस्ट ज्वाइन किया. इसके बाद सब एडिटर के पद पर काम किया. वर्तमान में धर्म और ज्योतिष सेक्शन के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं. अमन ने अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण और प्रयागराज में महाकुंभ मेले के दौरान धार्मिक खबरों को बखूबी कवर किया. धर्म और ज्योतिष - अमन धर्म-ज्योतिष सेक्शन के लिए लिखने के दौरान अंक ज्योतिष, वास्तु, ग्रह गोचर, व्रत-त्योहार से जुड़े विषयों पर लेख तैयार करते हैं. देवी-देवता और उनसे जुड़ी पौराणिक कथाओं, मंदिर, तीर्थ, धार्मिक स्थल और धार्मिक परंपराएं से जुड़े लेख लिखते हैं. इसके साथ ही धार्मिक यात्राओं से जुड़े उपयोगी लेख अमन तैयार करते हैं. Email - aman@bagconvergence.in X Account - MrAman0501
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