Rath Yatra 2026: विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ पुरी की रथयात्रा हर साल आषाढ़ महीने में होती है. पंचांग के अनुसार, यह आषाढ़ शुक्ल द्वितीया से शुरू होकर 10 दिनों तक चलता है. इस दौरान, पूरी दुनिया से भक्त और दर्शक यहां आते हैं. श्रद्धालु भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा के रथों को अपने कंधों पर खींचते हैं. आइए विस्तार से जानते हैं, साल 2026 में देवस्नान पूर्णिमा कब है, कब शुरू होगी रथयात्रा, क्या हैं हेरा पंचमी और बहुदा यात्रा की प्रमुख तिथियां?
रथयात्रा 2026 की प्रमुख तिथियां
आपको बता दें कि जगन्नाथ पुरी की रथयात्रा हिन्दू धर्म का सबसे के सबसे भव्य उत्सव है. इसकी हर तिथि का एक खास अर्थ और धार्मिक महत्व है:
देवस्नान पूर्णिमा 2026 कब है?
यह दिव्य अनुष्ठान इस वर्ष 11 जून को मनाई जाएगी. इसमें भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा सोने के कुएं से लाए 108 घड़े के शीतल जल से स्नान करवाया जाता है. इसके बाद भगवान बीमार पड़ जाते हैं और 15 दिनों के लिए 'अनासरा' यानी एकांतवास में चले जाते हैं.
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रथयात्रा 2026 कब है?
आषाढ़ शुक्ल द्वितीया को महाप्रभु जगन्नाथ, बड़े भैया बलभद्र और देवी सुभद्रा अपने तीन विशाल रथों पर मौसी के घर गुंदिचा मंदिर जाते हैं. इसलिए इसे 'गुंदिचा यात्रा' भी कहते हैं. यही असली रथयात्रा है, जो इस 2026 में 16 जुलाई को आरंभ होगी. आपको बता, इस यात्रा से पहले पुरी के राजा खुद सोने की झाड़ू से रथ मार्ग को बुहारते हैं. इसे 'छेरा पंहरा' कहते हैं.
हेरा पंचमी 2026 कब है?
हेरा पंचमी वह अनुष्ठान है, जब देवी लक्ष्मी महाप्रभु को ढूंढ़ती हुई गुंदिचा मंदिर पहुंचती है. चूंकि भगवान जगन्नाथ, माता लक्ष्मी को अपने साथ नहीं ले जाते हैं और सूचना भी नहीं देते हैं, तो गुस्से में आकर लक्ष्मी जी भगवान के रथ का एक हिस्सा तोड़ देती हैं. इस साल यह जुलाई 2026 को है.
आड़प मंडप दर्शन 2026 कब है?
साल 2026 में 'आड़प मंडप दर्शन' 22 जुलाई को है. यह अनुष्ठान गुंदिचा मंदिर में संपन्न होता है और इस मंदिर के गर्भगृह यानी आड़प मंडप में भगवान के दर्शन करना अत्यंत शुभ माना गया है. इसे 'संध्या दर्शन' भी कहते हैं, जिसे करने से दस लाख अश्वमेध यज्ञों के बराबर पुण्य फल मिलता है.
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बहुदा यात्रा 2026 कब है?
गुंदिचा मंदिर से भगवान जगन्नाथ और उनके तीनों दिव्य रथों की वापसी को बहुदा यात्रा कहते हैं. साल 2026 में यह अनुष्ठान यानी रथों की वापसी 24 जुलाई को सम्पन्न होगी. इस दिन भगवान को 'पोडा पीठा' का भोग लगाया जाता है.
सुना बेशा 2026 कब है?
सुना बेशा यानी भगवान का स्वर्ण श्रृंगार इस वर्ष 25 जुलाई 2026 को होगा. यह भगवान का सबसे भव्य और अलौकिक रूप होता है, जब महाप्रभु, दाऊ बलभद्र और देवी सुभद्रा सोने के अप्रतिम वस्त्र-आभूषणों से सजकर कर जनता को दर्शन देते हैं.
नीलाद्रि बीजे 2026 कब है?
श्रीमंदिर यानी मुख्य जगन्नाथ मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश कर रत्नवेदी पर स्थान ग्रहण करने के अनुष्ठान को 'नीलाद्रि बीजे' कहते हैं. यह रथयात्रा उत्सव का समापन माना जाता है. लेकिन इससे जुड़ी एक रोचक परंपरा यह है नाराज होने के कारण माता लक्ष्मी भगवान जगन्नाथ को मंदिर में प्रवेश करने नहीं देती हैं, तब भगवान उन्हें रसगुल्ले का भोग लगाते हैं.
जल्द ही करें ये काम
यदि आप इस वर्ष जगन्नाथ पुरी रथयात्रा में जाने की प्लानिंग कर रहे हैं, तो आपको पुरी में रुकने की व्यवस्था के लिए अभी ही होटल या धर्मशाला बुक कर लेनी चाहिए. क्योंकि, ऐन रथयात्रा के समय रहने की जगह मिलना, लगभग असंभव होता है.
यह भी पढ़ें: Pranayama Benefits: योग विज्ञान की जड़ है प्राणायाम, आसपास की शुद्ध ऊर्जा से होती है ईश्वर की अनुभूति! जानें कैसे?
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र की मान्यताओं पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.
Rath Yatra 2026: विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ पुरी की रथयात्रा हर साल आषाढ़ महीने में होती है. पंचांग के अनुसार, यह आषाढ़ शुक्ल द्वितीया से शुरू होकर 10 दिनों तक चलता है. इस दौरान, पूरी दुनिया से भक्त और दर्शक यहां आते हैं. श्रद्धालु भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा के रथों को अपने कंधों पर खींचते हैं. आइए विस्तार से जानते हैं, साल 2026 में देवस्नान पूर्णिमा कब है, कब शुरू होगी रथयात्रा, क्या हैं हेरा पंचमी और बहुदा यात्रा की प्रमुख तिथियां?
रथयात्रा 2026 की प्रमुख तिथियां
आपको बता दें कि जगन्नाथ पुरी की रथयात्रा हिन्दू धर्म का सबसे के सबसे भव्य उत्सव है. इसकी हर तिथि का एक खास अर्थ और धार्मिक महत्व है:
देवस्नान पूर्णिमा 2026 कब है?
यह दिव्य अनुष्ठान इस वर्ष 11 जून को मनाई जाएगी. इसमें भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा सोने के कुएं से लाए 108 घड़े के शीतल जल से स्नान करवाया जाता है. इसके बाद भगवान बीमार पड़ जाते हैं और 15 दिनों के लिए ‘अनासरा’ यानी एकांतवास में चले जाते हैं.
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रथयात्रा 2026 कब है?
आषाढ़ शुक्ल द्वितीया को महाप्रभु जगन्नाथ, बड़े भैया बलभद्र और देवी सुभद्रा अपने तीन विशाल रथों पर मौसी के घर गुंदिचा मंदिर जाते हैं. इसलिए इसे ‘गुंदिचा यात्रा’ भी कहते हैं. यही असली रथयात्रा है, जो इस 2026 में 16 जुलाई को आरंभ होगी. आपको बता, इस यात्रा से पहले पुरी के राजा खुद सोने की झाड़ू से रथ मार्ग को बुहारते हैं. इसे ‘छेरा पंहरा’ कहते हैं.
हेरा पंचमी 2026 कब है?
हेरा पंचमी वह अनुष्ठान है, जब देवी लक्ष्मी महाप्रभु को ढूंढ़ती हुई गुंदिचा मंदिर पहुंचती है. चूंकि भगवान जगन्नाथ, माता लक्ष्मी को अपने साथ नहीं ले जाते हैं और सूचना भी नहीं देते हैं, तो गुस्से में आकर लक्ष्मी जी भगवान के रथ का एक हिस्सा तोड़ देती हैं. इस साल यह जुलाई 2026 को है.
आड़प मंडप दर्शन 2026 कब है?
साल 2026 में ‘आड़प मंडप दर्शन’ 22 जुलाई को है. यह अनुष्ठान गुंदिचा मंदिर में संपन्न होता है और इस मंदिर के गर्भगृह यानी आड़प मंडप में भगवान के दर्शन करना अत्यंत शुभ माना गया है. इसे ‘संध्या दर्शन’ भी कहते हैं, जिसे करने से दस लाख अश्वमेध यज्ञों के बराबर पुण्य फल मिलता है.
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बहुदा यात्रा 2026 कब है?
गुंदिचा मंदिर से भगवान जगन्नाथ और उनके तीनों दिव्य रथों की वापसी को बहुदा यात्रा कहते हैं. साल 2026 में यह अनुष्ठान यानी रथों की वापसी 24 जुलाई को सम्पन्न होगी. इस दिन भगवान को ‘पोडा पीठा’ का भोग लगाया जाता है.
सुना बेशा 2026 कब है?
सुना बेशा यानी भगवान का स्वर्ण श्रृंगार इस वर्ष 25 जुलाई 2026 को होगा. यह भगवान का सबसे भव्य और अलौकिक रूप होता है, जब महाप्रभु, दाऊ बलभद्र और देवी सुभद्रा सोने के अप्रतिम वस्त्र-आभूषणों से सजकर कर जनता को दर्शन देते हैं.
नीलाद्रि बीजे 2026 कब है?
श्रीमंदिर यानी मुख्य जगन्नाथ मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश कर रत्नवेदी पर स्थान ग्रहण करने के अनुष्ठान को ‘नीलाद्रि बीजे’ कहते हैं. यह रथयात्रा उत्सव का समापन माना जाता है. लेकिन इससे जुड़ी एक रोचक परंपरा यह है नाराज होने के कारण माता लक्ष्मी भगवान जगन्नाथ को मंदिर में प्रवेश करने नहीं देती हैं, तब भगवान उन्हें रसगुल्ले का भोग लगाते हैं.
जल्द ही करें ये काम
यदि आप इस वर्ष जगन्नाथ पुरी रथयात्रा में जाने की प्लानिंग कर रहे हैं, तो आपको पुरी में रुकने की व्यवस्था के लिए अभी ही होटल या धर्मशाला बुक कर लेनी चाहिए. क्योंकि, ऐन रथयात्रा के समय रहने की जगह मिलना, लगभग असंभव होता है.
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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र की मान्यताओं पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.