Sawan Purnima 2026 Date: सावन पूर्णिमा कब है, 28 या 29 अगस्त? जानें सही तिथि, स्नान-दान का समय और पूजा का धार्मिक महत्व

Sawan Purnima 2026 Date: इस साल सावन पूर्णिमा की तिथि को लेकर लोगों में कन्फ्यूजन है कि 28 या 29 अगस्त, यह किस दिन है? आइए पंचांग से जानते हैं, सही तिथि, रक्षाबंधन, स्नान-दान का शुभ मुहूर्त और पूजा का महत्व.

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हिन्दू धर्म में सावन पूर्णिमा के दिन 'रक्षाबंधन' त्योहार मनाया जाता है. जानें सही तिथि. (फोटो क्रेडिट: AI)

Sawan Purnima 2026 Date: सावन का पवित्र महीना अपने आखिरी पड़ाव पर है. इसलिए लोगों का सवाल यह है कि सावन पूर्णिमा कब मनाया जाएगा, यह 28 अगस्त को है या 29 अगस्त को? यह सिर्फ एक तारीख नहीं है, बल्कि भगवान शिव की विदाई, रक्षाबंधन का त्योहार और पुण्य-स्नान का अमृत मुहूर्त – सब कुछ इसी एक दिन समाया है. पंचांगों में अलग-अलग जानकारी ने लोगों को उलझन में डाल दिया है. किस दिन स्नान-दान करने से पुण्य मिलेगा? किस दिन राखी बांधना सबसे शुभ रहेगा? आइए, वैदिक पंचांग की सटीक गणना के आधार पर इस पावन तिथि से जुड़ी हर बात को विस्तार से जानते हैं.

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सावन पूर्णिमा सही तिथि क्या है?

वैदिक पंचांग के अनुसार पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त को सुबह 9:08 बजे शुरू होकर 28 अगस्त को सुबह 9:48 बजे समाप्त होगी. उदयातिथि (सूर्योदय के समय जो तिथि हो) की मान्यता के कारण 28 अगस्त को ही सावन पूर्णिमा का व्रत और पूजन किया जाएगा. यानी, इस साल सावन पूर्णिमा शुक्रवार, 28 अगस्त को होगी. जो लोग चंद्रमा को अर्घ्य देते हैं, वे 27 अगस्त की रात को यह अनुष्ठान करेंगे, क्योंकि उस रात पूर्ण चंद्रमा दिखाई देगा.यह भी पढ़ें:

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सावन पूर्णिमा स्नान-दान का समय

सावन पूर्णिमा पर पवित्र नदियों में स्नान और दान का विशेष महत्व है. स्नान के लिए ब्रह्म मुहूर्त – सुबह 4:28 बजे से 5:12 बजे तक – सबसे उत्तम रहेगा. दान का शुभ समय 28 अगस्त को सूर्योदय सुबह 5:57 बजे से लेकर पूर्णिमा तिथि समाप्त सुबह 9:48 बजे तक रहेगा. इसी दिन रक्षाबंधन भी मनाया जाएगा. राखी बांधने का सबसे श्रेष्ठ समय सुबह 5:57 बजे से 9:48 बजे के बीच रहेगा. ध्यान रखें, इसके बाद भाद्रपद यानी भादो महीने की शुरुआत हो जाएगी.

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सावन पूर्णिमा धार्मिक महत्व

सावन पूर्णिमा हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र दिन है. यह सावन महीने का आखिरी दिन है, जो भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है. इस दिन भगवान शिव और भगवान विष्णु दोनों की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि आती है. पूर्णिमा की रात माता लक्ष्मी की पूजा करने से धन की तंगी दूर होती है. ब्रह्म मुहूर्त में गंगा जैसी पवित्र नदी में स्नान और अन्न या वस्त्र का दान करने से जन्मों के पाप मिट जाते हैं और अपार पुण्य की प्राप्ति होती है.

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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लेखक के बारे में

Shyamnandan

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श्यामनंदन कुमार News24.com में चीफ सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में 20 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले श्यामनंदन ज्योतिष, अंक शास्त्र, सामुद्रिक शास्त्र, पर्व-त्योहार सहित भारतीय धर्म-संस्कृति के जानकार पत्रकार हैं. उन्होंने पत्रकारिता में एम.ए. की पढ़ाई काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) से की है और ज्योतिष का अध्ययन भारतीय विद्या भवन, नई दिल्ली से किया है. अपने पेशे में डिजिटल करियर की शुरुआत उन्होंने एनडीटीवी कन्वर्जेंन्स के साथ की. श्यामनंदन हिंदुस्तान टाइम्स, बंसल न्यूज (भोपाल) जैसे न्यूज प्लेटफॉर्म्स के साथ भी जुड़े रहे हैं. उन्होंने देश के प्रसिद्ध संतों के सत्संग और समागम की रिपोर्टिंग की है.
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