दुनिया में कहां बहता है 'खूनी झरना'? वैज्ञानिकों ने सुलझाया लाल पानी का 100 साल पुराना रहस्य

अंटार्कटिका के टेलर ग्लेशियर से बहने वाला ‘ब्लड फॉल्स’ सालों से वैज्ञानिकों के लिए रहस्य बना हुआ था. अब नई रिसर्च में पता चला है कि इसका लाल रंग खून नहीं, बल्कि आयरन से भरपूर खारे पानी और ऑक्सीजन की रासायनिक प्रोसेस का नतीजा है.

Antarctica Blood Falls
1 / 6
Credit: AI

विज्ञापन

आखिर लाल रंग आता कहां से है?

आखिर लाल रंग आता कहां से है?2 / 6

इस झरने का पानी जमीन के नीचे मौजूद लाखों साल पुराने खारे जलाशय से आता है. इस पानी में आयरन की मात्रा बहुत ज्यादा होती है. जैसे ही ये पानी सतह पर पहुंचकर ऑक्सीजन के संपर्क में आता है, आयरन में जंग (Iron Oxidation) लगती है और पानी का रंग गहरा लाल हो जाता है. यही वजह है कि ये झरना खून जैसा दिखाई देता है.

विज्ञापन

बर्फ में भी पानी कैसे बहता रहता है?

बर्फ में भी पानी कैसे बहता रहता है?3 / 6

अंटार्कटिका का तापमान बेहद कम होता है, लेकिन ब्लड फॉल्स का पानी जमता नहीं. इसकी वजह है इसमें मौजूद ज्यादा नमक. इससे पानी के जमने का तापमान काफी नीचे चला जाता है, इसलिए ये बर्फ के भीतर भी लिक्विड फॉर्म में बना रहता है और धीरे-धीरे बाहर निकलता रहता है.

100 साल पुराना रहस्य कैसे सुलझा?

100 साल पुराना रहस्य कैसे सुलझा?4 / 6

1911 में ऑस्ट्रेलियाई भूवैज्ञानिक ग्रिफिथ टेलर ने पहली बार इस झरने को देखा था. शुरुआत में वैज्ञानिकों ने लाल रंग का कारण Algae माना, लेकिन बाद की रिसर्च ने इसे गलत साबित किया. रडार तकनीक और हालिया रिसर्च से पता चला कि ग्लेशियर के अंदर छिपी दरारों और चैनलों के जरिए दबाव में मौजूद खारा पानी बाहर निकलता है. नई रिसर्च ने ये भी समझाया कि ग्लेशियर में बनने वाली दरारें इस पानी को सतह तक पहुंचाने में खास भूमिका निभाती हैं.

विज्ञापन

बर्फ के नीचे छिपी है करोड़ों साल पुरानी दुनिया

बर्फ के नीचे छिपी है करोड़ों साल पुरानी दुनिया5 / 6

वैज्ञानिकों ने इस खारे पानी में ऐसे सूक्ष्मजीव (Microbes) भी खोजे हैं जो बिना सूरज की रोशनी और बिना ऑक्सीजन के लाखों सालों से जीवित हैं. ये जीव प्रकाश संश्लेषण (photosynthesis) नहीं करते, बल्कि रासायनिक प्रतिक्रियाओं से ऊर्जा लेते हैं. इस खोज से वैज्ञानिकों को ये समझने में मदद मिल रही है कि मंगल या बृहस्पति के चंद्रमा यूरोपा जैसे बर्फीले ग्रहों पर भी जीवन संभव हो सकता है.

विज्ञान के लिए क्यों है बेहद खास?

विज्ञान के लिए क्यों है बेहद खास?6 / 6

ब्लड फॉल्स सिर्फ एक अनोखा झरना नहीं बल्कि पृथ्वी पर मौजूद सबसे खास प्राकृतिक प्रयोगशालाओं में से एक है. यहां होने वाले शोध से वैज्ञानिक ग्लेशियरों के अंदर छिपी जल प्रणाली, जलवायु परिवर्तन और पृथ्वी से बाहर जीवन की संभावनाओं को बेहतर तरीके से समझने की कोशिश कर रहे हैं. (All Photos Credit: Social Media)

विज्ञापन

न्यूज 24 पर पढ़ें देश,राष्ट्रीय समाचार (National News),खेल,मनोरंजन,धर्म,लाइफ़स्टाइल,हेल्थ,शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।

First published on:

और पढ़ें: हमारे संपादकीय दिशानिर्देश और मानक यहाँ देखें।

लेखक के बारे में

Varsha Sikri

Varsha Sikri

वर्षा सिकरी News24 हिंदी डिजिटल में सीनियर सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. जर्नलिज्म में 9 साल का अनुभव रखने वाली वर्षा सिकरी राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. वर्षा सिकरी ने सितंबर 2017 में इंडिया टीवी से अपने करियर की शुरुआत की थी, जिसके बाद से उन्होंने रिपब्लिक टीवी, जी न्यूज, आज तक जैसे चैनलों में काम किया. फिलहाल वो News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 9 साल के करियर में वर्षा सिकरी ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. वर्षा सिकरी का पत्रकारिता में अनुभव: 9 साल योग्यता: NRAI स्कूल ऑफ मास कम्यूनिकेशन से ग्रेजुएशन करने के बाद वर्षा सिकरी ने मीडिया में अपने करियर की शुरुआत की. उन्होंने बतौर एंकर और रिपोर्टर भी काम किया है.
... और पढ़ें
विज्ञापन