जापान दुनिया का एक ऐसा अनोखा देश है जो हर साल लगभग 1500 भूकंपों के भयानक झटके झेलता है. पैसिफिक और फिलीपीन सी जैसी चार बड़ी टेक्टोनिक प्लेटों के मिलन बिंदु पर होने के कारण यहां दुनिया के 20 प्रतिशत खतरनाक भूकंप आते हैं.
हिलती हैं पर गिरती नहीं इमारतें

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यहां के आधुनिक गगनचुंबी भवनों को सुरक्षित रखने के लिए 'बेस आइसोलेशन' जैसी बेहतरीन तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है. इस तकनीक में इमारत की नींव के नीचे रबर और स्टील के बेयरिंग लगाए जाते हैं जो जमीन के झटकों को पूरी तरह सोख लेते हैं.
सख्त कानून से मिली मजबूती

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जापान ने अपने इतिहास में आए बड़े हादसों से सीख लेकर देश के 'बिल्डिंग कोड' यानी निर्माण कानूनों को दुनिया में सबसे कड़ा बना दिया है. वैज्ञानिक 'E-Defense' नामक दुनिया के सबसे बड़े भूकंप सिम्युलेटर पर असली इमारतों का टेस्ट करके उनकी कमियों को सुधारते हैं.
पलक झपकते ही अलर्ट सिस्टम

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जापान के पास दुनिया का सबसे तेज और आधुनिक अर्थक्वेक अर्ली वार्निंग सेंसर नेटवर्क मौजूद है. जमीन के अंदर हलचल होते ही विनाशकारी तरंगों के पहुंचने से कुछ सेकंड पहले ही देश के सभी मोबाइलों पर चेतावनी संदेश चला जाता है.
बुलेट ट्रेन के ऑटोमैटिक ब्रेक

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जापान की हाई-स्पीड शिंकानसेन बुलेट ट्रेन सीधे राष्ट्रीय भूकंप डिटेक्शन नेटवर्क प्रणाली से जुड़ी हुई है. सेंसर को तेज झटके का आभास होते ही इन सुपरफास्ट ट्रेनों में अपने आप इमरजेंसी ब्रेक लग जाते हैं जिससे कोई बड़ा हादसा नहीं होता.
प्राचीन कला से ली प्रेरणा

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जापानी इंजीनियरों ने आधुनिक इमारतों को लचीला बनाने की प्रेरणा सदियों पुरानी लकड़ी की मीनारों से ली है. इन प्राचीन मीनारों के बीच में 'शिनबाशिरा' नाम का एक मुख्य खंभा होता है जो भूकंप के समय पूरी इमारत को गिरने से बचाता है.