डायनासोर कैसे बने आसमान के पंछी? चीन की धरती से निकला 15 करोड़ साल पुराना राज, वैज्ञानिकों के उड़े होश!
चीन के फुजियान प्रांत में मिला 148 मिलियन साल पुराना जीवाश्म डायनासोर से पक्षी बनने के क्रमिक सफर का राज खोलता है, जिसने विकासवाद की एक बड़ी पहेली को सुलझा दिया है.

वैज्ञानिकों के लिए लंबे समय से यह जानना एक बड़ी पहेली रहा है कि विशालकाय डायनासोर आखिर उड़ने वाले पक्षियों में कैसे बदल गए. इस रहस्य से पर्दा उठाने वाला एक 148 मिलियन साल पुराना अनोखा जीवाश्म चीन के फुजियान प्रांत में मिला है.
जुरासिक काल का अनोखा पंछी
2 / 6वैज्ञानिकों ने जुरासिक काल की इस नई खोजी गई पक्षी प्रजाति को 'झेंगहॉर्निस बुयु' नाम दिया है. इस बेहद महत्वपूर्ण खोज की विस्तृत रिपोर्ट 1 जुलाई 2026 को मशहूर विज्ञान जर्नल 'साइंस एडवांसेज' में पब्लिश की गई है.
क्यों खास है यह जीवाश्म
3 / 6इस प्राचीन जीव की पूंछ में 15 छोटी रीढ़ की हड्डियां मिली हैं जो आपस में जुड़ी हुई नहीं हैं. यह बनावट दर्शाती है कि यह जीव लंबी पूंछ वाले डायनासोर और छोटी पूंछ वाले आधुनिक पक्षियों के बिल्कुल बीच की कड़ी है.
रातों-रात नहीं बदली दुनिया
4 / 6इस नई खोज ने वैज्ञानिकों की उस पुरानी थ्योरी को गलत साबित कर दिया है जिसमें माना जाता था कि डायनासोर की पूंछ अचानक छोटी हो गई थी. इससे साफ पता चलता है कि डायनासोर की पूंछ का छोटा होना एक बेहद धीमी और क्रमिक प्रक्रिया का हिस्सा था.
नन्ही गिलहरी जितना आकार
5 / 6हैरान करने वाली बात यह है कि झेंगहॉर्निस बुयु प्रजाति का वजन महज 74 से 163 ग्राम के बीच था जो एक छोटी गिलहरी के बराबर है. उड़ने की क्षमता विकसित करने और प्रकृति में जिंदा रहने के लिए इन जीवों का आकार समय के साथ छोटा होता चला गया.
चीन में सुरक्षित है जीवाश्म
6 / 6यह ऐतिहासिक जीवाश्म साल 2024 में चीन के यानयुआन गांव में मिला था जिसे अब बीजिंग के चाइनीज एकेडमी ऑफ साइंसेज में रखा गया है. चीन के दिग्गज वैज्ञानिकों मिन वांग और झोंगहे झोउ की टीम ने इस पूरी क्रांतिकारी रिसर्च को लीड किया है.



















