आखिर 7 पर ही क्यों रुक गई दुनिया के अजूबों की गिनती? 8वां न चुनने की वजह है दिलचस्प

कुछ चीजें देखते ही हमें अजूबा सी लगती हैं, लेकिन दुनिया में सिर्फ 7 अजूबे ही मौजूद हैं. यह गिनती आगे नहीं बढ़ती और न ही हर शानदार इमारत या ऐतिहासिक जगह को नया अजूबा माना जाता है. 

why are there only 7 wonders
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सात अजूबों की सालों पुरानी परंपरा. Image Credit- AI

दुनिया के अजूबों की बात होते ही हमारे दिमाग में सात अजूबे आते हैं और कोई आठवें अजूबे की बात नहीं करता. ऐसे में दिमाग में सवाल आना जरूरी है कि आखिर सिर्फ सात अजूबे ही क्यों? क्या दुनिया में इससे ज्यादा शानदार और अद्भुत जगहें या इमारतें नहीं हैं? अगर आपने कभी इस बारे में सोचा है तो इसका जवाब इतिहास से जुड़ा है और काफी दिलचस्प भी है. क्या आपको इसका सही जवाब जानना है, आइए इस लेख में विस्तार से जानते हैं कि इसके पीछे की क्या वजह रही है और क्या आगे इसमें कुछ बदलाव नहीं हो सकता.

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सात अजूबों की सालों पुरानी परंपरा 

सात अजूबों की सालों पुरानी परंपरा 2 / 6

सात अजूबों की परंपरा आज की नहीं, बल्कि हजारों साल पुरानी है. प्राचीन यूनानी लेखकों ने भूमध्यसागरीय और आसपास के इलाकों में मौजूद ऐसी सात चीजों को अजूबे के तैयार पर घोषित किया था, जो अपने आप में बहुत खास थीं. अब पुराने सात अजूबों में से ज्यादातर नष्ट हो गए. इसलिए 2007 में वोट देकर नए सात अजूबों का चुन लिया गया. इसे भी पढ़ें- स्ट्रीट लाइट के पोल पर क्यों लगा होता है छोटा बॉक्स? जानें किस काम आता है ये डिवाइस

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लिस्ट में क्या है शामिल? 

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इस लिस्ट में मिस्र के गीजा के पिरामिड, बेबीलोन के हैंगिंग गार्डन्स, ओलंपिया की ज्यूस प्रतिमा, इफिसुस का आर्टेमिस मंदिर, हेलिकार्नासुस का मकबरा, रोड्स का कोलोसस और अलेक्जेंड्रिया का लाइटहाउस शामिल थे. अब नए सात अजूबों में ताजमहल, चीन की महान दीवार, माचू पिचू, पेट्रा, कोलोसियम, चिचेन इत्जा और क्राइस्ट द रिडीमर शामिल हैं.

7 ही क्यों रह गए अजूबे? 

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ऐसा इसलिए क्योंकि प्राचीन यूनानी संस्कृति में 7 को खास माना जाता था. बता दें कि खगोल विज्ञान में सात आकाशीय पिंडों की पहचान की जाती थी, जिसमें सूर्य, चंद्रमा और नग्न आंखों से दिखाई देने वाले पांच ग्रह शामिल हैं.

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कैसे आया विचार?

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जब प्राचीन लेखकों ने दुनिया की अद्भुत चीजें देखीं तो उन्होंने नंबर को 7 तक सीमित रखा यानी यह फैसला इस वजह से नहीं था कि दुनिया में सिर्फ सात ही अद्भुत चीजें थीं, बल्कि सात को पूर्णता माना जाता था.

8वां अजूबा क्यों नहीं चुना गया?

8वां अजूबा क्यों नहीं चुना गया?6 / 6

दुनियाभर की विरासतों की देखभाल करने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था यूनेस्को किसी भी जगह को अजूबा घोषित नहीं करती है. वो इमारतों को विश्व धरोहर का दर्जा दे देती है. साल 2007 में जो 7 नए अजूबे चुने गए थे, वह एक प्राइवेट फाउंडेशन द्वारा चलाया गया अभियान था. इसे भी पढ़ें- पहले घरों में गोबर और मिट्टी से क्यों की जाती थी लिपाई? जानें असली वजह इसे भी पढ़ें- 

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लेखक के बारे में

Shadma Muskan

Shadma Muskan

शादमा मुस्कान न्यूज 24 डिजिटल में सीनियर सब एडिटर हैं और हेल्थ व लाइफस्टाइल बीट कवर करती हैं. शादमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के डॉ. भीमराव अंबेडकर कॉलेज से BJMC और दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस से पीजी डिप्लोमा किया है. उन्होंने गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय, हिसार से MJMC की पढ़ाई भी की है. शादमा को पत्रकारिता के क्षेत्र में 5 साल से ज्यादा का अनुभव है. शादमा ने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका और हरिभूमि में इंटर्नशिप से की. इसके बाद, उन्होंने जागरण न्यू मीडिया की वेबसाइट हरज़िंदगी के साथ 4 साल से अधिक समय तक काम किया, जहां उन्होंने हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लेखन किया. इस दौरान उन्होंने ब्यूटी, फैशन, फूड, होम रेमेडीज, गार्डनिंग, होम डेकोर और पेरेंटिंग जैसे विषयों पर भी काम किया. इस अनुभव के दौरान शादमा ने अलग-अलग क्षेत्रों के कई विशेषज्ञों के साथ काम किया है. एक्सपर्ट ओपीनियन के आधार पर वह रीडर्स तक सटीक और आसान शब्दों में चीजों को पहुंचाने का काम कर रही हैं. कुल अनुभव - 5 साल पिछला अनुभव- शादमा ने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की. इसके बाद तहजीब टीवी, हरिभूमि और जागरण न्यू मीडिया की वेबसाइट के साथ चार साल तक हेल्थ और लाइफस्टाइल पर लिखा. किस क्षेत्र में महारत शादमा मुस्कान को लाइफस्टाइल, ट्रैवल, फूड और हेल्थ से जुड़े विषयों के बारे में काफी अच्छी जानकारी है. इसके अलावा शादमा को फूड रिव्यू, किचन गाइड, फैशन टिप्स, शॉपिंग गाइड, ब्यूटी, रिलेशनशिप और इंटीरियर पर वह विशेषज्ञों से बातचीत के आधार पर लिखती हैं.
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