पहले घरों में गोबर और मिट्टी से क्यों की जाती थी लिपाई? जानें असली वजह

आज भले ही घरों की दीवारों पर सीमेंट और पैंट किया जाने लगा है, लेकिन मिट्टी से बने पारंपरिक घरों की बात ही अलग है. आज भी इसकी नेचुरल खूबियां अब भी लोगों का ध्यान खींचती हैं.

walls and floors of homes plastered
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घर को ठंडा रखने में मदद करना. Image Credit- AI

आजकल घरों की सफाई और खूबसूरती के लिए टाइल्स, मार्बल और पेंट का इस्तेमाल किया जाता है. मगर क्या आपको पता है कि पहले गांवों और कच्चे घरों में फर्श और दीवारों पर मिट्टी और गोबर का लेप लगाया जाता था. देखने में भले ही यह तरीका नॉर्मल लगता हो, लेकिन इसके पीछे कई कारण छिपे थे. यह सिर्फ परंपरा नहीं थी, बल्कि उस समय के हिसाब से घर को साफ, ठंडा और रहने लायक बनाए रखने का एक नेचुरल तरीका भी था.

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घर को ठंडा रखने में मदद

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मिट्टी की एक खासियत यह है कि यह गर्मी को धीरे-धीरे बाहर करती है. गर्मियों में मिट्टी से लिपे घरों के अंदर ठंडक महसूस होती है. यही वजह थी कि बिना पंखे या कूलर के भी मिट्टी के घरों में गर्मी से कुछ राहत मिलती थी. इसे भी पढ़ें- आज से 79 साल पहले भारत में कितना था पेट्रोल के दाम? कीमत जानकर रह जाएंगे हैरान

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धूल को कम करने का आसान तरीका

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कच्चे फर्श पर सूखी मिट्टी की वजह से धूल उड़ सकती थी. गोबर और मिट्टी का लेप लगाने से फर्श बन जाता था और धूल उड़ने की समस्या कम होती थी. गांवों में रोजाना पर फर्श की लिपाई करना आम था.

फर्श को मजबूत बनाता था

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मिट्टी और गोबर का मिश्रण कच्चे फर्श पर एक तरह की नेचुरल कोटिंग बना देता था. इससे फर्श की छोटी-मोटी दरारें और असमान हिस्से भर जाते थे और लेयर चिकनी हो जाती थी.

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गोबर का इस्तेमाल क्यों किया जाता था?

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गोबर में मौजूद जैविक मिट्टी के साथ मिलकर लेप को बांधने में मदद करते थे. सूखने के बाद यह मिश्रण फर्श पर एक परत बना देता था. हालांकि, इसे स्वच्छ तरीके से तैयार करना जरूरी था.

कीड़ों से बचाने में मददगार

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गोबर-मिट्टी से लिपाई करने पर घर में कुछ कीड़े-मकोड़ों की समस्या कम होती थी. साथ ही, लिपाई से फर्श साफ रहता था. हालांकि, इसे स्प्रे से अच्छा नहीं माना जाता, जिससे परेशानी हो जाती है.

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कम खर्च में घर की देखभाल

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उस वक्त महंगे निर्माण और डेकोरेशन के सामान हर किसी की पहुंच में नहीं थे. मिट्टी और गोबर आसानी से मिलने वाली चीजें थीं. इसलिए इनसे घर की मरम्मत और लिपाई आसान था. इसे भी पढ़ें- कई एयरलाइंस 13 नंबर की सीट क्यों नहीं रखतीं? वजह जानकर हो जाएंगे हैरान

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लेखक के बारे में

Shadma Muskan

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शादमा मुस्कान न्यूज 24 डिजिटल में सीनियर सब एडिटर हैं और हेल्थ व लाइफस्टाइल बीट कवर करती हैं. शादमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के डॉ. भीमराव अंबेडकर कॉलेज से BJMC और दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस से पीजी डिप्लोमा किया है. उन्होंने गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय, हिसार से MJMC की पढ़ाई भी की है. शादमा को पत्रकारिता के क्षेत्र में 5 साल से ज्यादा का अनुभव है. शादमा ने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका और हरिभूमि में इंटर्नशिप से की. इसके बाद, उन्होंने जागरण न्यू मीडिया की वेबसाइट हरज़िंदगी के साथ 4 साल से अधिक समय तक काम किया, जहां उन्होंने हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लेखन किया. इस दौरान उन्होंने ब्यूटी, फैशन, फूड, होम रेमेडीज, गार्डनिंग, होम डेकोर और पेरेंटिंग जैसे विषयों पर भी काम किया. इस अनुभव के दौरान शादमा ने अलग-अलग क्षेत्रों के कई विशेषज्ञों के साथ काम किया है. एक्सपर्ट ओपीनियन के आधार पर वह रीडर्स तक सटीक और आसान शब्दों में चीजों को पहुंचाने का काम कर रही हैं. कुल अनुभव - 5 साल पिछला अनुभव- शादमा ने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की. इसके बाद तहजीब टीवी, हरिभूमि और जागरण न्यू मीडिया की वेबसाइट के साथ चार साल तक हेल्थ और लाइफस्टाइल पर लिखा. किस क्षेत्र में महारत शादमा मुस्कान को लाइफस्टाइल, ट्रैवल, फूड और हेल्थ से जुड़े विषयों के बारे में काफी अच्छी जानकारी है. इसके अलावा शादमा को फूड रिव्यू, किचन गाइड, फैशन टिप्स, शॉपिंग गाइड, ब्यूटी, रिलेशनशिप और इंटीरियर पर वह विशेषज्ञों से बातचीत के आधार पर लिखती हैं.
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