आजकल घरों की सफाई और खूबसूरती के लिए टाइल्स, मार्बल और पेंट का इस्तेमाल किया जाता है. मगर क्या आपको पता है कि पहले गांवों और कच्चे घरों में फर्श और दीवारों पर मिट्टी और गोबर का लेप लगाया जाता था. देखने में भले ही यह तरीका नॉर्मल लगता हो, लेकिन इसके पीछे कई कारण छिपे थे. यह सिर्फ परंपरा नहीं थी, बल्कि उस समय के हिसाब से घर को साफ, ठंडा और रहने लायक बनाए रखने का एक नेचुरल तरीका भी था.
धूल को कम करने का आसान तरीका

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कच्चे फर्श पर सूखी मिट्टी की वजह से धूल उड़ सकती थी. गोबर और मिट्टी का लेप लगाने से फर्श बन जाता था और धूल उड़ने की समस्या कम होती थी. गांवों में रोजाना पर फर्श की लिपाई करना आम था.
फर्श को मजबूत बनाता था

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मिट्टी और गोबर का मिश्रण कच्चे फर्श पर एक तरह की नेचुरल कोटिंग बना देता था. इससे फर्श की छोटी-मोटी दरारें और असमान हिस्से भर जाते थे और लेयर चिकनी हो जाती थी.
गोबर का इस्तेमाल क्यों किया जाता था?

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गोबर में मौजूद जैविक मिट्टी के साथ मिलकर लेप को बांधने में मदद करते थे. सूखने के बाद यह मिश्रण फर्श पर एक परत बना देता था. हालांकि, इसे स्वच्छ तरीके से तैयार करना जरूरी था.
कीड़ों से बचाने में मददगार

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गोबर-मिट्टी से लिपाई करने पर घर में कुछ कीड़े-मकोड़ों की समस्या कम होती थी. साथ ही, लिपाई से फर्श साफ रहता था. हालांकि, इसे स्प्रे से अच्छा नहीं माना जाता, जिससे परेशानी हो जाती है.