कौन सा राज्य है भारत का 'Rice Capital'? जानिए इसके पीछे की खास वजह

भारत में चावल सबसे ज्यादा खाया जाने वाला अनाज है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि देश का ‘राइस कैपिटल’ किसे कहा जाता है? जानिए उस राज्य के बारे में, जहां सबसे ज्यादा चावल पैदा होता है और क्यों उसे यह खास पहचान मिली है.

Which State Is Known As The Rice Capital Of India
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Credit: Social Media

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भारत में चावल का महत्व

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भारत में चावल सिर्फ एक आम खाद्य पदार्थ नहीं है, बल्कि यह देश की संस्कृति, परंपरा और रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा है. उत्तर से लेकर दक्षिण और पूर्व से लेकर पश्चिम तक, हर इलाके में चावल अलग-अलग रूपों में खाया जाता है. कहीं दाल-चावल, कहीं इडली-दोसा, तो कहीं बिरयानी और पुलाव के रूप में यह हर थाली में शामिल होता है. चावल देश की बड़ी आबादी का मुख्य भोजन है, खासकर पूर्वी और दक्षिणी राज्यों में. इसके अलावा, त्योहारों और धार्मिक अनुष्ठानों में भी चावल का खास महत्व होता है. यही वजह है कि भारत दुनिया के सबसे बड़े चावल उत्पादक देशों में गिना जाता है.

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भारत का ‘Rice Capital’ कौन सा राज्य है?

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भारत में सबसे ज्यादा चावल उत्पादन करने वाला राज्य पश्चिम बंगाल है, इसलिए इसे ‘Rice Capital of India’ कहा जाता है. यहां की कृषि अर्थव्यवस्था काफी हद तक धान की खेती पर बेस्ड है. पश्चिम बंगाल देश के कुल चावल उत्पादन में बड़ा हिस्सा योगदान देता है. यहां के किसान पारंपरिक और आधुनिक दोनों तरीकों से खेती करते हैं, जिससे प्रोडक्शन में लगातार बढ़ोतरी हो रही है. यही वजह है कि यह राज्य चावल उत्पादन के मामले में बाकी राज्यों से आगे है.

उपजाऊ मिट्टी बनाती है इसे खास

उपजाऊ मिट्टी बनाती है इसे खास4 / 8

पश्चिम बंगाल की मिट्टी को बहुत ज्यादा उपजाऊ माना जाता है. यहां मुख्य रूप से जलोढ़ (alluvial) मिट्टी पाई जाती है, जो गंगा नदी और उसकी सहायक नदियां लाती हैं. इस मिट्टी में पोषक तत्व भरपूर मात्रा में होते हैं, जिससे धान की फसल तेजी से बढ़ती है और बेहतर क्वालिटी का प्रोडक्शन मिलता है. इसके अलावा, जमीन की नमी बनाए रखने की क्षमता भी ज्यादा होती है, जो धान की खेती के लिए बेहद जरूरी है.

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अनुकूल मौसम और जलवायु

अनुकूल मौसम और जलवायु5 / 8

चावल की खेती के लिए गर्म और नम जलवायु की जरूरत होती है, पश्चिम बंगाल इस मामले में पूरी तरह अनुकूल है. यहां सालभर काफी बारिश होती है, खासकर मानसून के दौरान, जो धान की खेती के लिए वरदान साबित होती है. तापमान भी ज्यादातर 20 से 35 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है, जो धान के पौधों के विकास के लिए आइडल माना जाता है. यही वजह है कि यहां चावल की खेती बड़े पैमाने पर सफल होती है.

साल में कई बार होती है खेती

साल में कई बार होती है खेती6 / 8

पश्चिम बंगाल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां साल में एक बार नहीं, बल्कि कई बार चावल की खेती की जाती है. यहां तीन प्रमुख फसल चक्र होते हैं- Aman, Aus और Boro. इन तीनों सीजन की वजह से बंगाल में सालभर चावल का उत्पादन जारी रहता है, जिससे कुल पैदावर काफी ज्यादा हो जाती है. Aman मानसून के दौरान बोई जाने वाली मुख्य फसल है, Aus गर्मियों की शुरुआत में बोई जाती है, Boro सर्दियों में उगाई जाने वाली फसल है.

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चावल की फेमस किस्में

चावल की फेमस किस्में7 / 8

पश्चिम बंगाल सिर्फ मात्रा में ही नहीं, बल्कि क्वालिटी में भी आगे है. यहां कई प्रसिद्ध और खुशबूदार चावल की किस्में उगाई जाती हैं, जिनकी देश और विदेश में मांग है. इनमें Gobindobhog, Tulaipanji जैसी किस्में खास तौर पर जानी जाती हैं. ये चावल अपनी खुशबू, स्वाद और बनावट के लिए मशहूर हैं और कई पारंपरिक व्यंजनों में इस्तेमाल होते हैं.

दूसरे राज्यों की भी अहम भूमिका

दूसरे राज्यों की भी अहम भूमिका8 / 8

पश्चिम बंगाल को ‘Rice Capital’ कहा जाता है, लेकिन भारत में बाकी कई राज्य भी चावल उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. उत्तर प्रदेश, पंजाब, ओडिशा, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु जैसे राज्य भी बड़े पैमाने पर धान की खेती करते हैं. (All Photos Credit: Social Media)

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लेखक के बारे में

Varsha Sikri

Varsha Sikri

वर्षा सिकरी News24 हिंदी डिजिटल में सीनियर सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. जर्नलिज्म में 9 साल का अनुभव रखने वाली वर्षा सिकरी राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. वर्षा सिकरी ने सितंबर 2017 में इंडिया टीवी से अपने करियर की शुरुआत की थी, जिसके बाद से उन्होंने रिपब्लिक टीवी, जी न्यूज, आज तक जैसे चैनलों में काम किया. फिलहाल वो News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 9 साल के करियर में वर्षा सिकरी ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. वर्षा सिकरी का पत्रकारिता में अनुभव: 9 साल योग्यता: NRAI स्कूल ऑफ मास कम्यूनिकेशन से ग्रेजुएशन करने के बाद वर्षा सिकरी ने मीडिया में अपने करियर की शुरुआत की. उन्होंने बतौर एंकर और रिपोर्टर भी काम किया है.
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