LPG Cylinder New Update: लाल-नीला ही नहीं काले-सफेद और ग्रे-ब्राउन कलर के सिलेंडर भी होते हैं, जानें क्या है मतलब?

LPG Cylinder Colors: मिडिल ईस्ट की जंग के कारण होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से कच्चे तेल का संकट गहराया तो भारत में गैस सिलेंडर की किल्लत हो गई। इसलिए भारत में आजकल गैस सिलेंडर काफी सुर्खियों में हैं। ऐसे में गैस सिलेंडर के रंगों को लेकर भी बात हो रही है तो आइए जानते हैं कि देश में कितने रंग के सिलेंडर इस्तेमाल होते हैं और उनका क्या मतलब है?

Gas Cylinder Color Codes
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सुबह की चाय से लेकर रात के डिनर तक रसोई में गैस सिलेंडर इंसान की जिंदगी का अहम हिस्सा है। जब भी गैस सिलेंडर का नाम लेते हैं तो लाल रंग का सिलेंडर दिमाग में आता है या फिर नीले रंग का सिलेंडर जो अकसर दुकानों पर देखने को मिलता है, लेकिन क्या आप जाते हैं कि सफेद, काले, भूरे और स्लेटी रंग के सिलेंडर भी होते हैं और वे इस्तेमाल भी किए जाते हैं।

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सिलेंडर का रंग उसका सेफ्टी कोड

सिलेंडर का रंग उसका सेफ्टी कोड2 / 8

गैस सिलेंडर के रंग का मतलब यह नहीं कि लोहे को कलर करके डिजाइनर बना दिया, बल्कि सिलेंडर का कलर उसका सेफ्टी कोड होता है, जिसका मतलब है कि किस रंग के सिलेंडर में कौन-सी गैस भरी है, जिसके बारे में हर किसी को पता होना चाहिए। यहां हम आपको इन्हीं सेफ्टी कोड के बारे में बताएंगे, फिर आप सिलेंडर कर रंग देखकर ही बता देंगे कि उसमे कौन-सी गैस है?

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लाल सिलेंडर में लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस

लाल सिलेंडर में लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस3 / 8

लाल रंग के सिलेंडर घरों में किचन में इस्तेमाल होते हैं। इनमें लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) भरी होती है, जिसके कुकिंग गैस कहते हैं। घरों में खाना बनाने के लिए इसी गैस का इस्तेमाल होता है। लाल रंग खतरे का निशान है, इसलिए सिलेंडर के लाल रंग का मतलब है कि LPG खतरनाक गैस है, क्योंकि यह गैस तेजी से आग पकड़ लेती है।

सफेद रंग के सिलेंडर में ऑक्सीजन गैस

सफेद रंग के सिलेंडर में ऑक्सीजन गैस4 / 8

अस्पतालों और एंबुलेंस में सफेद रंग के सिलिंडर होते हैं, जिनमें जीवनदायिनी 'ऑक्सीजन' गैस भरी होती है। सफेद रंग शांति और जीवन का प्रतीक है, इसलिए मेडिकल इमरजेंसी के दौरान शांति बनी रहे और जीवन की मौजूदगी का अहसास हो, इसलिए ऑक्सीजन सिलेंडर का रंग सफेद होता है।

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नीले रंग के सिलेंडर में नाइट्रस ऑक्साइड

नीले रंग के सिलेंडर में नाइट्रस ऑक्साइड5 / 8

नीले रंग के सिलिंडर में 'नाइट्रस ऑक्साइड' गैस भरी होती है, जिसे लाफिंग गैस भी कहते हैं। इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से डेंटिस्ट और डॉक्टरों के द्वारा मरीजों का दर्द कम करने के लिए या उन्हें एनेस्थीसिया देने के लिए किया जाता है।

काले रंग के सिलेंडर में नाइट्रोजन गैस

काले रंग के सिलेंडर में नाइट्रोजन गैस6 / 8

काले रंग के सिलेंडर में 'नाइट्रोजन' गैस होती है। यह गैस बहुत जल्दी किसी चीज के साथ रिएक्शन नहीं करती। इसलिए इसका इस्तेमाल बड़े-बड़े कारखानों में, चिप्स के पैकेट को फ्रेश रखने और आज-कल गाड़ियों के टायरों में हवा भरने जैसे कामों में किया जाता है।

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ग्रे रंग के सिलेंडर में कार्बन-डाइ-ऑक्साइड

ग्रे रंग के सिलेंडर में कार्बन-डाइ-ऑक्साइड7 / 8

ग्रे कलर के सिलेंडर में 'कार्बन-डाइ-ऑक्साइड' गैस होती है। इसका सबसे आम इस्तेमाल आग बुझाने वाले यंत्रों और कोल्ड ड्रिंक्स बनाने वाली फैक्ट्रियों में होता है।

भूरे रंग के सिलेंडर में हीलियम गैस

भूरे रंग के सिलेंडर में हीलियम गैस8 / 8

मेलों में जो रंग-बिरंगे गुब्बारे हवा में ऊपर उड़ते हैं, उनमें 'हीलियम' गैस भरी होती है। यह गैस सामान्य हवा से भी हल्की होती है। इसे सुरक्षित रखने और पहचानने के लिए हमेशा भूरे रंग के सिलिंडर का ही इस्तेमाल किया जाता है।

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लेखक के बारे में

Khushbu Goyal

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खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.
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