क्या आप भी बच्चे को डांटते हैं इस समय? एक्सपर्ट ने बताया कब बच्चे पर चिल्लाने की नहीं करनी चाहिए गलती

Shouting On Child: माता-पिता बच्चे को यूं तो कभी भी डांट देते हैं, लेकिन ऐसी कुछ सिचुएशन हैं जिनमें बच्चे को डांटने की गलती कभी नहीं करनी चाहिए. इसी बारे में बता रही हैं चाइल्ड साइकोलॉजिस्ट श्वेता गांधी. यहां जानिए बच्चे को किस समय डांटने से मना कर रही हैं श्वेता.

Parenting Tips

क्या आप भी बच्चे को डांटते हैं इस समय? एक्सपर्ट ने बताया कब बच्चे पर चिल्लाने की नहीं करनी चाहिए गलती.

Parenting Tips: माता-पिता अक्सर ही बच्चे को कहीं भी और कभी भी डांट देते हैं. कभी बच्चा कोई गलती करता है या फिर पैरेंट्स का मूड अच्छा नहीं होता तो वे यह नहीं देखते कि क्या समय है और सीधा बच्चे पर चीखने या चिल्लाने लगते हैं. लेकिन, ऐसी कुछ सिचुएशन हैं जब बच्चे को बिल्कुल नहीं डांटना चाहिए. इस बारे में बता रही हैं चाइल्ड साइकोलॉजिस्ट श्वेता गांधी. श्वेता ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट से पोस्ट शेयर करके बताया है कि बच्चे को किस सिचुएशन में डांटने (Shouting On Child) की गलती कभी नहीं करनी चाहिए.

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बच्चों को कब नहीं डांटना चाहिए | When Not To Shout On Child

सुबह उठने के तुरंत बाद

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एक्सपर्ट का कहना है कि बच्चे को सुबह उठने के तुरंत बाद कभी नहीं डांटना चाहिए. चाइल्ड साइकोलॉजी के अनुसार, इस समय बच्चे की दिनभर की इमोशनल टोन सेट हो रही होती है. ऐसे में अगर सुबह के समय बच्चे को डांटा जाए तो इससे बच्चे का पूरा दिन बिगड़ जाता है.

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स्कूल के लिए निकलने से पहले

बच्चे को अगर स्कूल के लिए निकलने से पहले डांटा जाए तो बच्चा आपके कहे शब्दों को दिनभर अपने साथ रखता है. हो सकता है इससे बच्चे का ध्यान पढ़ाई में ना लगकर बल्कि उन बातों पर रहे जो आपने उससे कही हैं.

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स्कूल से आने के बाद

आपको नहीं पता होता कि बच्चा स्कूल से किस मूड के साथ आया है. हो सकता है बच्चा बहुत ज्यादा थका हुआ हो, परेशान हो या हो सकता बच्चा उस समय बात ही नहीं करना चाहता है. इसीलिए स्कूल से आने के तुरंत बाद बच्चे को डांटना (Bache Ko Datna) नहीं है बल्कि उसे इमोशनल सेफ्टी देनी है.

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सोने से पहले

सोने से तुरंत पहले बच्चे का सबकोंशियस माइंड बहुत ज्यादा एक्टिव होता है. अगर इस समय बच्चे को डांटा जाए तो आपके कहे शब्द उनके सब्कोंशियस माइंड में घर कर जाते हैं. खासकर तब जब आप उन्हें कुछ दुख पहुंचाने वाला बोलते हैं.

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जब बच्चा टैंट्रम कर रहा हो

जब बच्चे का मेल्टडाउन चल रहा हो या कहें जब बच्चा बहुत टैंट्रम शो कर रहा होता है तो आपको उसे नहीं डांटना चाहिए. बच्चे को इस समय आपके डिसीप्लिन या डांट की नहीं बल्कि कनेक्शन और इमोशनल सपोर्ट की जरूरत होती है. इस समय बच्चे को डांटने से बचें.

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लेखक के बारे में

Seema Thakur

Seema Thakur

सीमा ठाकुर पत्रकारिता से पिछले 7 सालों से जुड़ी हैं. न्यूज24 में सीमा बतौर चीफ सब एडिटर काम कर रही हैं. सीमा हेल्थ और लाइफस्टाइल बीट पर लिखती हैं और कॉन्टेन्ट क्रिएशन के साथ ही टीम लीड की भूमिका भी निभा रही हैं. न्यूज24 में सीमा ने अपनी बीट से हटकर इलेक्शंस की स्टोरीज पर भी काम किया है. हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़ी स्टडीज, लेटेस्ट न्यूज और एक्सपर्ट्स/डॉक्टर्स से बातचीत पर आधारित लेख लिखने में सीमा की मजबूत पकड़ है. सीमा हेल्थ की खबरों और लेटेस्ट अपडेट के लिए AIIMS, ICMR, WHO,  स्वास्थ्य मंत्रालय जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों और डॉक्टरों के संपर्क में रहती हैं. अनुभव सीमा ने पत्रकारिता की शुरुआत दिल्ली प्रेस ग्रुप से की थी जहां वे सरिता, मुक्ता और गृहशोभा मैग्जीन में वुमेन ओरिएंटेड, सोशल, लाइफस्टाइल, हेल्थ और बॉलीवुड के अलावा पॉलिटकल आर्टिकल्स लिखती थीं. सीमा को प्रूफरीडिंग और एडिटिंग का भी खासा अनुभव है. प्रिंट में काम करने के दौरान सीमा की हिंदी भाषा में अच्छी पकड़ है. दिल्ली प्रेस के बाद सीमा डायमंड पब्लिशिंग हाउस से जुड़ी थीं जहां उन्होंने मैग्जीन और वेबसाइट दोनों के लिए काम किया. डायमंड पब्लिशिंग हाउस के बाद सीमा ने NDTV के साथ डिजिटल मीडिया में अपना करियर शुरू किया. NDTV में सीमा ने राइटर के साथ ही वीडियो प्रोड्यूसर, एंकर और पॉडकास्टर के तौर पर भी काम किया. लाइफस्टाइल वीडियोज और बॉलीवुड गोल्ड सीरीज को प्रोड्यूस और एंकर करने के साथ ही वे बॉलीवुड पॉडकास्ट किया करती थीं. वीडियो प्रोडक्शन में सीमा का इंटरेस्ट और पकड़ यहीं से आई है. शिक्षा सीमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज से बी.ए किया है. इसके बाद जामिया मिलिया इस्लामिया से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. जामिया की पीजी डिप्लोमा इन जर्नलिज्म डिपार्टमेंट की मैग्जीन में सीमा स्टूडेंट एडिटर और अपने बैच की कॉन्टेंट हेड रह चुकी हैं.
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