Pawan Mishra
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जब भी आप अपने टीवी स्क्रीन पर या फिर कर्तव्य पथ पर बैठकर गणतंत्र दिवस समारोह देखते होंगे, तो आपके मन में ये विचार जरूर आता होगा कि देश के तीनों सेना के शूरवीर कदमताल करते हैं, लेकिन इनके चयन की क्या प्रक्रिया होती होगी. कैसे इन्हें परेड में शामिल होने का मौका मिलता होगा. चलिए इस बारे में आपको विस्तार से बताते हैं.
रिपब्लिक डे परेड में सैनिकों का चयन उनकी रेजिमेंट के प्रदर्शन,अनुशासन,फिटनेस और एक्स्ट्रा एक्टिविटी को देखकर किया जाता है. परेड में शामिल होने वाले सैनिकों का सिलेक्शन सितंबर महीने से ही शुरू हो जाता है. जिस युनिट यानी रेजिमेंट का चयन किया जाता है उनके रेजिमेंट में शामिल बेहतर सैनिकों का सबसे पहले शॉर्टलिस्ट किया जाता है. उसके बाद उनकी अतिरिक्त फिटनेस की जांच की जाती है. ये प्रक्रिया सितंबर महीने में पूरी कर ली जाती है. जिन सैनिकों का चयन कर लिया जाता है उनको एक महीने तक यानी पूरे अक्टूबर महीने में ट्रेनिंग , मार्च पास्ट, अनुशासन और उनके टीम वर्क पर विशेष ध्यान दिया जाता है. क्योकि राजपथ पर सिर्फ परेड ही नहीं दूसरा नजारा टीम वर्क का भी देखने को मिलता है.
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ये सारा प्रोसेस कैंपटी रेजिमेंटल सेंटर में होता है. मिनिस्ट्री ऑफ डिफेंस में कार्यरत एक लेफ्टिनेंट कर्नल जो कर्तवय पथ पर परेड कर चुके हैं, उन्होंने न्यूज 24 को एक्सक्लूसिव जानकारी देते हुए बताया कि इस परेड में सेना के 27 रेजिमेंट से चयन होता है यानी हर साल अगल-अलग रेजिमेंट को मौका दिया जाता है. जब रक्षा मंत्रालय की तरफ से रेजिमेंट का चयन कर लिया जाता है. तब शुरुआत होती है चयन प्रक्रिया की,जिसके तहत रेजिंमेंट के सीनियर अधिकारी सैनिकों का नाम मांगते है जो परेड का हिस्सा बनना चाहते हैं. हालांकि कभी -कभी ऐसा भी साल रहा जहां रेजिमेंट के सभी सैनिकों के साथ ही अधिकारियों ने भी परेड करने की अपनी इस्छा जाहिर कर दी थी. इस दौरान चयन को लेकर काफी मशक्कत करनी पड़ी थी.
जब नाम सेलेक्शन करने वाले अधिकारियों के पास आता है तब सबसे पहले शुरु की जाती है स्क्रूटनी की प्रक्रिया. प्रक्रिया में सैनिकों और अधिकारियों के पूरे बैक ग्राउंड को खंगाला जाता है कि सेना में भर्ती के बाद कैसी रही थी इनकी ट्रेनिंग क्षमता,यूनिट में इनका व्यवहारा अधिकारियों के साथ ही सहक्रमी के साथ कैसा रहा है,फौज के नियम का कितना पालन करते हैं. साथ ही सबसे अहम होता है अनुशासन. लंबी स्क्रूटनी के बाद चयन की प्रक्रिया पूरी की जाती है. फिर शुरु होती है रेजिमेंट स्तर पर ट्रेनिंग, जिसमें परेड और दूसरे रूटीन शामिल होते हैं.
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आपको बता दें कि चयन में सभी राज्यों से सैनिकों को लेने का भी प्रवाधान है. हर साल लगभग 30 हजार सैनिकों का चयन होता है,और रेजिमेंटल ट्रेनिंग करते करते आखिरी चयन सिर्फ 200 सैनिकों का ही हो पाता है. इसमें 20 अफसर होते हैं और 180 मार्च में शामिल होने वाले सैनिक होते हैं. आपको बता दें कि मार्च का नेतृत्व तो एक ही अधिकारी करते हैं, लेकिन एक अतिरिक्त अधिकारी का भी चयन परेड मार्च के लिए किया जाता है ताकि अगर मार्च को लीड करने वाला अफसर बीमार पड़ गया तो रिजर्व अफसर को इनकी जगह पर लाया जाता है. ठीक इसी तरह परेड करने वाले सैनिकों के साथ भी होता है,आखिरी चरण में तो 160 जवान परेड का हिस्सा बनते हैं लेकिन 20 अतिरिक्त जवान का सेलेक्शन इसलिए किया जाता है ताकि मार्चिंग के वक्त अगर कुछ सैनिकों की तबीयत बिगड़ जाती है या फिर किसी परिवारिक कारणों से परेड में शामिल नहीं हो पाते हैं तो इन्ही रिजर्व सैनिकों को परेड में शामिल होने का मौका दिया जाता है.
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