क्या मौत की सजा के लिए दोषियों को दिया जाएगा जहरीला इंजेक्शन? फांसी पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला

ऋषि मल्होत्रा द्वारा दायर याचिका में सुप्रीम कोर्ट से अपील की गई थी कि मृत्युदंड को पीड़ादायक बनाने की बजाए कम पीड़ादायक बनाया जाना चाहिए. याचिकाकर्ता ने संविधान के अनुच्छेद 21 में मिले जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का हवाला दिया.

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भारत में मौत की सजा पाने वाले दोषियों को फांसी देने के तरीके को बदलने की मांग को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है. सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर करते हुए मांग की गई थी कि मौत की सजा पा चुके दोषियों को फांसी की बजाए कम दर्दनाक इंजेक्शन दिया जाए, साथ ही इस प्रक्रिया को मृत्युदंड के लिए कानूनी बनाया जाए. याचिका पर जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने इस मामले से जुड़े तीन पुराने फैसलों को बड़ी पीठ के पास भेजने की मांग को अस्वीकार करते हुए बड़ी टिप्पणी की.

सुप्रीम कोर्ट में किसने दायर की थी याचिका?


सुप्रीम कोर्ट ने लेथल इंजेक्शन जैसे कम दर्दनाक तरीकों से मौत की सजा देने की मांग वाली याचिका को पहली सुनवाई में ही खारिज कर दिया. कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि देश में फिलहाल फांसी ही मृत्युदंड को लागू करने का कानूनी तरीका बनी रहेगी. आपको बता दें कि यह याचिका वकील ऋषि मल्होत्रा ने दायर की थी, जिसमें इसमें फांसी को बेहद पीड़ादायक, अमानवीय और क्रूर तरीका बताया गया था. इसके बजाय याचिका में मृत्युदंड के लिए लेथल इंजेक्शन, गोली मारने, बिजली का झटका देने या गैस चैंबर जैसे विकल्पों पर विचार करने की मांग की गई थी.

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अनुच्छेद 21 का दिया हवाला


ऋषि मल्होत्रा द्वारा दायर याचिका में सुप्रीम कोर्ट से अपील की गई थी कि मृत्युदंड को पीड़ादायक बनाने की बजाए कम पीड़ादायक बनाया जाना चाहिए. याचिकाकर्ता ने संविधान के अनुच्छेद 21 में मिले जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का हवाला देते हुए फांसी देने के प्रावधान को असंवैधानिक घोषित करने की मांग की थी. याचिका में यह भी दावा किया गया कि फांसी के बाद मृत्यु की पुष्टि में काफी समय लग सकता है, जबकि गोली मारने या लेथल इंजेक्शन जैसे तरीकों में इस प्रक्रिया में लगने वाले समय में कमी आ सकती है.

क्या सरकार लेगी कोई फैसला?


सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में पुराने फैसलों पर दोबारा विचार करने या मामले को बड़ी पीठ को सौंपने का ठोस आधार नहीं है. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के लिए भी विकल्प खुला रखा है. पीठ ने कहा कि सरकार चाहे तो एक्सपर्ट की एक कमेटी का गठन कर मृत्युदंड लागू करने के वैकल्पिक तरीकों की समीक्षा करा सकती है.

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लेखक के बारे में

Akarsh Shukla

Akarsh Shukla

आकर्ष शुक्ला न्यूज 24 के साथ बतौर चीफ सब एडिटर जुड़े हुए हैं. मूल रूप से नोएडा, उत्तर प्रदेश के रहने वाले आकर्ष ने पत्रकारिता का सफर 2016 में प्रिंट मीडिया से शुरू हुआ, बाद में उन्होंने डिजिटल मीडिया का रुख किया. आकर्ष शुक्ला ने गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री हासिल की. आकर्ष ने दिल्ली के अखबार वूमेन एक्सप्रेस में काम किया. इसके बाद नवोदय टाइम्स, ओपेरा न्यूज, वनइंडिया, इंडिया डॉट कॉम (जी मीडिया ग्रुप) में विभिन्न पदों पर कार्य किया. आकर्ष शुक्ला अक्टूबर, 2025 से न्यूज24 से जुड़े हुए हैं, जहां वो मुख्य रूप से राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय और राजनीति से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं. इसके साथ ही आकर्ष शिफ्ट हेड के तौर पर टीम का नेतृत्व भी करते हैं. आकर्ष ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव के अलावा संसद से जुड़ी खबरों को कवर किया है. उनकी राजनीति में गहरी रुचि है, इस कारण वह राजनीति से जुड़ी खबरों को आसान शब्दों में लिखने में माहिर हैं. डिग्री और डिप्लोमा: आकर्ष शुक्ला ने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक (BA) की डिग्री के बाद गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. आकर्ष शुक्ला ने DICS इंस्टीट्यूट से कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर में 2 साल का डिप्लोमा भी किया है. पत्रकारिता में अनुभव: 10 वर्ष से अधिक
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