BJP ने यूपी में क्यों खेला विनोद तावड़े पर दांव? जानिए- क्या है 2027 की रणनीति
भारतीय जनता पार्टी के लिए साल 2027 में होने वाला विधानसभा चुनाव बेहद अहम है, राष्ट्रीय पार्टी यहां जीत की हैट्रिक लगाने का मन बना रही है, ऐसे में विनोद तावड़े को सबसे बड़ी आबादी वाले राज्य का प्रदेश प्रभारी बनाया गया है. आखिर नितिन नबीन की अगुवाई में ये फैसला क्यों लिया गया.
Written By: Shariqul Hoda|Updated: Aug 18, 2026 16:19
Edited By : Shariqul Hoda|Updated: Aug 18, 2026 16:19
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विनोद तावड़े (Photo-X@TawdeVinod)
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Why Vinod Tawde Gets UP Charge: बीजेपी ने यूपी में संगठन की जिम्मेदारी सीनियर नेता विनोद तावड़े को सौंपी है, उन्हें प्रदेश प्रभारी बनाया गया है. इससे संकेत मिलता है कि पार्टी 2027 के अहम विधानसभा चुनावों से पहले संगठन को मजबूत करने पर ध्यान दे रही है. 17 अगस्त 2026 को बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव और राज्यसभा सांसद विनोद तावड़े को पार्टी का उत्तर प्रदेश प्रभारी नियुक्त किया गया. जगदीश ईश्वरभाई पटेल को सह-प्रभारी बनाया गया है. ये नियुक्तियां बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन की तरफ से संगठन में बड़े फेरबदल और राष्ट्रीय पदाधिकारियों की नई टीम की ऐलान के बाद की गई हैं. सतीश पूनिया को पंजाब की जिम्मेदारी दी गई है, जबकि तरुण चुघ गुजरात का कामकाज देखेंगे.
63 साल के विनोद तावड़े ने बीजेपी में पर्दे के पीछे रहकर काम करने वाले ऐसे ऑर्गनाइजर के तौर पर पहचान बनाई है, जिन्हें चुनाव की प्लानिंग करने, सदस्यता अभियान चलाने और गठबंधन में तालमेल बिठाने का तजुर्बा है. महाराष्ट्र के नेता तावड़े 2014 से विधायक रहे और देवेंद्र फडणवीस सरकार में शिक्षा, चिकित्सा शिक्षा, खेल, संसदीय कार्य और सांस्कृतिक मामलों जैसे कई विभागों के मंत्री रहे. हालांकि, 2019 के विधानसभा चुनावों में उन्हें टिकट नहीं मिला, जिसके बाद उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर संगठन की जिम्मेदारियां संभालने पर फोकस किया.
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बाद में उन्होंने NDA के राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति पद के कैंपेन में अहम रोल अदा किया, जिसमें 2022 में द्रौपदी मुर्मू और 2025 में सीपी राधाकृष्णन के लिए समर्थन जुटाने का काम शामिल था. तावड़े 2022 से बीजेपी के बिहार प्रभारी भी रहे और कई राज्यों में पार्टी की चुनावी और ऑर्गेनाइजेशन स्ट्रेटजी बनाने में शामिल रहे.
यूपी क्यों है अहम?
80 लोकसभा सीटों और 403 विधानसभा क्षेत्रों वाला यूपी बीजेपी की राष्ट्रीय रणनीति के केंद्र में है. 2024 के लोकसभा चुनावों में काफी जमीन खोने के बाद पार्टी के सामने अब बड़ी चुनौती है. माना जा रहा है कि तावड़े की नियुक्ति से बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व और उत्तर प्रदेश यूनित के बीच तालमेल बेहतर होगा और आंतरिक मतभेदों को सुलझाने में मदद मिलेगी. 2027 के चुनावों को देखते हुए, पार्टी ने तावड़े को संगठन को नई एनर्जी देने और कार्यकर्ताओं को एक और बड़ी चुनावी लड़ाई के लिए तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी है. पार्टी इस प्रदेश में जीत की हैट्रिक लगाने की हर मुमकिन कोशिश कर रही है.