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दिल्ली के ‘लापता शहर’ बनने की कहानी… हर रोज कहां जा रहे 27 लोग? पुलिस की आंखों में कैसे धूल झोंक रही गैंग

दिल्ली में आजकल हर तरफ लापता और किडनैपिंग का शोर है. सोशल मीडिया पर लगातार इस तरह के वीडियो और ऑडियो मैसेज शेयर किए जा रहे हैं जिससे हर तरफ एक माहौल सा बन गया कि दिल्ली में कोई गैंग सक्रिय हो गया है जो बच्चों और लड़कियों को उठा कर ले जा रहा है और इसके लिए हवाला दिया रहा है दिल्ली पुलिस के आंकड़ों का. पढ़ें दिल्ली से विमल कौशिक की रिपोर्ट.

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Edited By : Versha Singh Updated: Feb 6, 2026 22:03

दिल्ली में आजकल हर तरफ लापता और किडनैपिंग का शोर है. सोशल मीडिया पर लगातार इस तरह के वीडियो और ऑडियो मैसेज शेयर किए जा रहे हैं जिससे हर तरफ एक माहौल सा बन गया कि दिल्ली में कोई गैंग सक्रिय हो गया है जो बच्चों और लड़कियों को उठा कर ले जा रहा है और इसके लिए हवाला दिया रहा है दिल्ली पुलिस के आंकड़ों का.

दरअसल साल 2026 के पहले पखवाड़े के कुछ आंकड़े सामने आए जिसने इस किडनैपिंग गैंग वाली थ्योरी को हवा दे दी. इन आंकड़ों के मुताबिक दिल्ली में इस साल के पहले 15 दिनों में यानि 15 जनवरी 2026 तक 807 लोग लापता हो गए. जिसमें महिलाएं, पुरुष, बुजुर्ग, छोटे बच्चे सब शामिल हैं. लेकिन इसी बीच एक सवाल और खड़ा हुआ कि ये कोई पहला साल नहीं है जब दिल्ली में इस तरह से लोग लापता हुए हों.

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बल्कि हर साल हजारों की संख्या में लोग लापता होते हैं जिसमें से करीब 40 से 50 प्रतिशत को या तो ढूंढ लिया जाता है या फिर वो खुद वापस लौट आते हैं. तो ऐसा क्या है कि अचानक से राजधानी में ह्यूमन ट्रैफिकिंग गैंग और बच्चा चोरों को लेकर शोर मच रहा है.

दरअसल कुछ लोग इसे फिल्मी कहानी से जोड़ रहे हैं. अगर दिल्ली पुलिस की मानें तो पहले 15 दिनों में या पूरी जनवरी के आंकड़ों को सामने रखे तो ये फिगर पिछले कुछ सालों के मुकाबले कम हुआ है.

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हाल ही में दिल्ली में बॉलीवुड अदाकारा रानी मुखर्जी की अपकमिंग फिल्म मर्दानी 3 का प्रमोशन हुआ था. इस फिल्म की कहानी भी चाइल्ड ट्रैफिकिंग से जुड़ी है. उसके बाद से अचानक से ऐसे वीडियो की भरमार हो गई और साथ ही दिल्ली पुलिस के फिगर्स को शेयर किया जाने लगा कि दिल्ली में बच्चों-लड़कियों को उठाया जा रहा है. अब ऐसे में दिल्ली पुलिस के ज्वाइंट सीपी सामने आए और उन्होंने कहा कि इसको लेकर हकीकत से ज्यादा अफवाहें फैलाई जा रही हैं.

उन्होंन कहा, दिल्ली में डरने वाली कोई बात नहीं है. हर वर्ष बड़ी संख्या में लोग मिसिंग होते हैं. इसके लिए बकायदा हर जिले में एंटी मिसिंग सेल के साथ-साथ क्राइम ब्रांच की स्पेशलाइज्ड यूनिट एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट भी लगातार काम कर रही हैं और हम खासकर बच्चों के मिसिंग केसेस को बहुत गंभीरता से लेते हैं. इस वक्त अफवाहें ज्यादा फैलाई जा रही हैं और दिल्ली पुलिस का कहना है कि ऐसे लोगों से सख्ती से निपटा जाएगा.

अब बात करते हैं इन आंकड़ों की-

  • साल 2026 के पहले 15 दिनों में 800 से ज्यादा लोग गायब होने के बाद दिल्ली की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं.
  • दिल्ली पुलिस के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक 1 से 15 जनवरी 2026 के बीच 807 लोग लापता हुए हैं, यानी लगभग हर रोज 50 से ज्यादा लोग बिना किसी सूचना के गायब हो रहे हैं.
  • इन लापता लोगों मे सबसे ज्यादा महिलाएं और लड़कियां शामिल हैं. कुल मामलों में से लगभग 63% इसी श्रेणी के लोग हैं, बाकी पुरुष और लड़के हैं.
  • यह आंकड़ा दिखाता है कि राजधानी में महिलाओं और नाबालिगों की सुरक्षा एक गंभीर मुद्दा बन चुकी है.
  • दिल्ली में लापता मामलों का यह सिलसिला नया नहीं है. बीते वर्षों के जिपनेट (Zonal Integrated Police Network) जैसे पुलिस डेटाबेस के आंकड़े बताते हैं कि 2015 से 2025 तक लाखों लोग लापता दर्ज हुए हैं और उनमें से सैकड़ों का आज भी पता नहीं चला है.
  • दिल्ली पुलिस में दर्ज रिपोर्टों में यह बात सामने आई है कि नाबालिगों में किशोरियों (12-18 वर्ष) का अनुपात बहुत अधिक होता जा रहा है, जिससे यह समस्या और गंभीर हो गई है. ये केवल रोज़-मर्रा के खो जाने के मामले ही नहीं है. कुछ मामलों में अपहरण या अन्य अपराधी गतिविधियों का भी खतरा हो सकता है.
  • देश की राजधानी में रोजाना 50 से ऊपर लोग लापता होना सिर्फ आकड़ों का खेल नहीं है बल्कि यह हमारी सुरक्षा, सोशल अवेरनेस और पुलिस प्रशासन की प्रतिक्रिया पर बड़े सवाल खड़े करता है. यह आंकडे़ स्पष्ट रूप से दिखाते हैं कि दिल्ली में सुरक्षा की चुनौतियां गम्भीर रूप ले चुकी हैं.
  • दिल्ली पुलिस आंकड़ों के अनुसार कुल 2026 के शुरुआती 15 दिनों में 807 लोग लापता दर्ज किए गए, जिनमें से 235 लोगों को ट्रेस कर लिया गया है, जबकि 572 अब भी अनट्रेस्ड हैं.
  • वयस्कों के मामलों में 616 लोग लापता हुए, जिनमें 181 का पता चला (90 पुरुष और 91 महिलाएं), जबकि 435 वयस्क अभी भी लापता हैं.
  • वहीं, नाबालिगों के 191 मामले सामने आए, जिनमें से 48 बच्चों को ट्रेस किया गया (29 लड़कियां और 19 लड़के), जबकि 143 नाबालिग अब तक नहीं मिले हैं.
  • पिछले 11 सालों की अगर हम बात करें तो आंकड़े डराने वाले हैं. राजधानी दिल्ली से पिछले 11 साल में 5,559 बच्चे गायब हुए हैं, जिनमें से 695 बच्चों का कोई सुराग नहीं मिला.
  • दिल्ली पुलिस के डेटा के अनुसार, 2026 में पहले 27 दिनों में 8 साल तक के कुल 9 बच्चे गायब हुए जिनमें 6 लड़के थे, जिसमें से 3 लड़कों को अब तक ट्रेस किया जा चुका है. जबकि बाकी 6 की तलाश जारी है.
  • साल 2025 में 8 साल तक के कुल 368 बच्चे लापता हुए थे जिनमें से 149 ट्रेस कर लिए गए जबकि 219 का अब तक कोई सुराग नहीं मिला है.
  • साल बदलते जाते हैं लेकिन आंकड़े कमोबेश यही रहते हैं. सवाल ये हैं कि जिन बच्चों का कोई सुराग नहीं मिलता उनके साथ क्या हुआ इसका जवाब किसी के पास नहीं.
  • अगर हम बात 8 से 12 साल के बच्चों की करें तो 2026 के पहले 15 दिनों में कुल 13 बच्चे लापता हुए जिनमें से सिर्फ तीन को ट्रेस किया जा सका जबकि 10 बच्चों का सुराग नहीं मिला है.
  • जबकि 12 से 18 साल के कुल 169 बच्चे शुरुआती 27 दिन में लापता हो गए जिनमें से 48 ट्रेस कर लिए गए जबकि 121 अभी भी लापता हैं.
  • यानी शुरू के 27 दिन में 0 से 18 साल के कुल 137 बच्चे अभी भी लापता हैं.
  • साल 2025 में 0 से 18 साल के 5,915 बच्चे गायब हुए थे जिनमें से 4,424 को ट्रेस किया गया था और 1,491 लापता हैं.
  • 2016 से 2026 के बीच 60,694 बच्चे लापता हुए, जिनकी उमर 18 साल तक की थी, इनमें से 53,763 ट्रेस कर लिए गए जबकि 6,931 का कोई सुराग नहीं मिला. यानी गायब होने वाले बच्चों में से 11 प्रतिशत बच्चे अनट्रेस रह जाते हैं.

First published on: Feb 06, 2026 10:03 PM

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