20 जुलाई से संसद का मानसून सत्र शुरू हो रहा है. लेकिन इससे पहले रविवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में एक एक सर्वदलीय बैठक बुलाई गई थी, लेकिन सर्वदलीय बैठक की शुरुआत ही राजनीतिक विवाद के साथ हुई. तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बागी सांसदों को बैठक में बुलाए जाने पर विपक्षी दलों ने कड़ा विरोध जताया और बैठक का बहिष्कार किया. हालांकि कुछ समय बाद विपक्षी नेता फिर से बैठक में शामिल हुए और सरकार के सामने अपने मुद्दे रखे.
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने संसद सत्र से पहले सभी दलों के नेताओं को बैठक के लिए आमंत्रित किया था. इस बार तृणमूल कांग्रेस से अलग हुए 20 सांसदों के समूह को भी अलग राजनीतिक समूह के रूप में बैठक में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया था.
विपक्षी दलों ने क्यों जताई आपत्ति?
हाल ही में लोकसभा अध्यक्ष द्वारा इन सांसदों को सदन में अलग बैठने की अनुमति दी गई थी जिसके बाद उन्हें बैठक में बुलाया गया था. इसी फैसले पर विपक्ष ने आपत्ति जताई. बैठक शुरू होते ही कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, डीएमके, शिवसेना (उद्धव गुट), राजद और वाम दलों सहित कई विपक्षी दलों के नेताओं ने विरोध दर्ज कराया. उनका कहना था कि जिन सांसदों की राजनीतिक स्थिति अभी क्लियर नहीं है, उन्हें अलग समूह मानकर सर्वदलीय बैठक में बुलाने का क्या मतलब है? विरोध जताने के बाद विपक्षी नेता कुछ समय के लिए बैठक छोड़कर बाहर चले गए.
हालांकि बाद में विपक्षी दलों ने फिर से बैठक में हिस्सा लिया. नेताओं का कहना था कि संसद के आगामी सत्र में जनता से जुड़े अहम मुद्दों को उठाना उनकी जिम्मेदारी है, इसलिए बैठक का पूरी तरह बहिष्कार करना ठीक नहीं होगा. इसके बाद विपक्ष ने महंगाई, बेरोजगारी, किसानों के मुद्दे, राष्ट्रीय सुरक्षा और अन्य राजनीतिक विषयों पर चर्चा की मांग सरकार के सामने रखी.
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मानसून सत्र को सुचारु रूप से चलाने में सहयोग की अपील
बैठक के दौरान किरेन रिजिजू ने सभी राजनीतिक दलों से मानसून सत्र को सुचारु रूप से चलाने में सहयोग करने की अपील की. उन्होंने कहा कि सरकार सभी महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा के लिए तैयार है और संसद लोकतांत्रिक संवाद का सबसे बड़ा मंच है. सरकार चाहती है कि सदन की कार्यवाही बिना किसी व्यवधान के चले ताकि विधायी कामकाज समय पर पूरा हो सके.
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा 'कल से संसद का मॉनसून सत्र शुरू होगा. हम चाहते हैं कि विपक्ष हमारी बात सुने और हम भी विपक्ष की बात सुनेंगे. आज सरकार ने सर्वदलीय बैठक बुलाई है. हम सभी दलों से आग्रह करते हैं कि मानसून सत्र को अच्छी तरह से चलाने में सभी सहयोग करें.'
दरअसल, तृणमूल कांग्रेस के बागी नेताओं की नई पार्टी NCPI को भी इस बैठक में बुलाया गया था. विपक्षी पार्टियों का कहना है कि अब तक इस पार्टी को लोकसभा स्पीकर की तरफ से मान्यता नहीं दी गई है. तो फिर उन्हें बिना मान्यता के बैठक में कैसे बुलाया जा सकता है.
20 जुलाई से संसद का मानसून सत्र शुरू हो रहा है. लेकिन इससे पहले रविवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में एक एक सर्वदलीय बैठक बुलाई गई थी, लेकिन सर्वदलीय बैठक की शुरुआत ही राजनीतिक विवाद के साथ हुई. तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बागी सांसदों को बैठक में बुलाए जाने पर विपक्षी दलों ने कड़ा विरोध जताया और बैठक का बहिष्कार किया. हालांकि कुछ समय बाद विपक्षी नेता फिर से बैठक में शामिल हुए और सरकार के सामने अपने मुद्दे रखे.
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने संसद सत्र से पहले सभी दलों के नेताओं को बैठक के लिए आमंत्रित किया था. इस बार तृणमूल कांग्रेस से अलग हुए 20 सांसदों के समूह को भी अलग राजनीतिक समूह के रूप में बैठक में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया था.
विपक्षी दलों ने क्यों जताई आपत्ति?
हाल ही में लोकसभा अध्यक्ष द्वारा इन सांसदों को सदन में अलग बैठने की अनुमति दी गई थी जिसके बाद उन्हें बैठक में बुलाया गया था. इसी फैसले पर विपक्ष ने आपत्ति जताई. बैठक शुरू होते ही कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, डीएमके, शिवसेना (उद्धव गुट), राजद और वाम दलों सहित कई विपक्षी दलों के नेताओं ने विरोध दर्ज कराया. उनका कहना था कि जिन सांसदों की राजनीतिक स्थिति अभी क्लियर नहीं है, उन्हें अलग समूह मानकर सर्वदलीय बैठक में बुलाने का क्या मतलब है? विरोध जताने के बाद विपक्षी नेता कुछ समय के लिए बैठक छोड़कर बाहर चले गए.
हालांकि बाद में विपक्षी दलों ने फिर से बैठक में हिस्सा लिया. नेताओं का कहना था कि संसद के आगामी सत्र में जनता से जुड़े अहम मुद्दों को उठाना उनकी जिम्मेदारी है, इसलिए बैठक का पूरी तरह बहिष्कार करना ठीक नहीं होगा. इसके बाद विपक्ष ने महंगाई, बेरोजगारी, किसानों के मुद्दे, राष्ट्रीय सुरक्षा और अन्य राजनीतिक विषयों पर चर्चा की मांग सरकार के सामने रखी.
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मानसून सत्र को सुचारु रूप से चलाने में सहयोग की अपील
बैठक के दौरान किरेन रिजिजू ने सभी राजनीतिक दलों से मानसून सत्र को सुचारु रूप से चलाने में सहयोग करने की अपील की. उन्होंने कहा कि सरकार सभी महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा के लिए तैयार है और संसद लोकतांत्रिक संवाद का सबसे बड़ा मंच है. सरकार चाहती है कि सदन की कार्यवाही बिना किसी व्यवधान के चले ताकि विधायी कामकाज समय पर पूरा हो सके.
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा ‘कल से संसद का मॉनसून सत्र शुरू होगा. हम चाहते हैं कि विपक्ष हमारी बात सुने और हम भी विपक्ष की बात सुनेंगे. आज सरकार ने सर्वदलीय बैठक बुलाई है. हम सभी दलों से आग्रह करते हैं कि मानसून सत्र को अच्छी तरह से चलाने में सभी सहयोग करें.’
दरअसल, तृणमूल कांग्रेस के बागी नेताओं की नई पार्टी NCPI को भी इस बैठक में बुलाया गया था. विपक्षी पार्टियों का कहना है कि अब तक इस पार्टी को लोकसभा स्पीकर की तरफ से मान्यता नहीं दी गई है. तो फिर उन्हें बिना मान्यता के बैठक में कैसे बुलाया जा सकता है.