लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक इन दिनों अपनी भूख हड़ताल को लेकर चर्चा में हैं. उनकी तबीयत बिगड़ने और अस्पताल में भर्ती होने के बाद एक नाम लगातार सुर्खियों में है और वो हैं उनकी पत्नी गीतांजलि जे. आंग्मो. अब तक सार्वजनिक जीवन से काफी दूर रहने वाली गीतांजलि इस आंदोलन के दौरान खुलकर सामने आई हैं. वह न केवल अपने पति सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य पर नजर रख रही हैं, बल्कि आंदोलन से जुड़े हर अहम फैसले और अपडेट भी लोगों तक पहुंचा रही हैं. तो लोगों के बीच सवाल ये है कि आखिर सोनम वांगचुक की पत्ति गीताजंलि आंग्मो हैं कौन?
कौन हैं गीतांजलि आंग्मो?
गीतांजलि जे. आंग्मो शिक्षा और सामाजिक विकास के क्षेत्र में लंबे समय से काम कर रही हैं. वह हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव्स, लद्दाख (HIAL) की सह-संस्थापक, मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) और डीन हैं. यह संस्थान लद्दाख जैसे पहाड़ी इलाकों के लिए बेहतर और व्यावहारिक शिक्षा मॉडल तैयार करने का काम करता है. इससे पहले भी वह शिक्षा और सामाजिक विकास से जुड़े कई संस्थानों में काम कर चुकी हैं. उनके योगदान को देखते हुए साल 2022 में नीति आयोग ने उन्हें 'विमेन ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया अवॉर्ड' से सम्मानित किया था.
कॉरपोरेट से लद्दाख तक का सफर
गीतांजलि का जन्म ओडिशा के बालासोर में हुआ था. उन्होंने भौतिकी (फिजिक्स) में स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद भुवनेश्वर स्थित जेवियर इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (XIMB) से एमबीए किया. शुरुआती दौर में उन्होंने कॉरपोरेट क्षेत्र में काम किया, लेकिन बाद में उन्होंने सामाजिक विकास और शिक्षा के क्षेत्र को अपना कार्यक्षेत्र बनाया. इसके बाद वह सोनम वांगचुक के साथ जुड़ीं और लद्दाख में एजुकेशन, इनोवेशन और कम्युनिटी डेवलपमेंट से जुड़े कई प्रोजेक्ट्स पर काम किया.
यह भी पढ़ें- कॉकरोच जनता पार्टी कर पाएगी संसद कूच? अस्पताल से सोनम वांगचुक का मार्च को लेकर खास संदेश, जानें कैसी है तैयारी
अस्पताल में डॉक्टरों से क्या कहा?
सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल के दौरान गीतांजलि लगातार उनके साथ खड़ी रहीं. जब वांगचुक की तबीयत बिगड़ी और उन्हें दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया, तब गीतांजलि ने डॉक्टरों और प्रशासन से साफ कहा कि उनके पति की इच्छा और परिवार की सहमति के बिना कोई भी चिकित्सा प्रक्रिया शुरु नहीं की जाए. उन्होंने यह भी साफ किया कि वांगचुक का आंदोलन खत्म नहीं हुआ है और 20 जुलाई को प्रस्तावित कार्यक्रम पहले की तरह ही जारी रहेगा.
आंदोलन के बीच क्यों चर्चा में हैं गीतांजलि?
इस पूरे घटनाक्रम के बाद गीतांजलि आंग्मो पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आई हैं. अब उनकी पहचान सिर्फ सोनम वांगचुक की पत्नी तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि वह एक एजुकेशनिस्ट, सोशल एंटरप्रेन्योर और अपने पति के आंदोलन की अहम सहयोगी के रूप में भी सामने आई हैं. आंदोलन के दौरान जिस तरह उन्होंने स्थिति संभाली और अपनी बात मजबूती से रखी, उससे वह इस पूरे अभियान का एक महत्वपूर्ण चेहरा बन गई हैं.
लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक इन दिनों अपनी भूख हड़ताल को लेकर चर्चा में हैं. उनकी तबीयत बिगड़ने और अस्पताल में भर्ती होने के बाद एक नाम लगातार सुर्खियों में है और वो हैं उनकी पत्नी गीतांजलि जे. आंग्मो. अब तक सार्वजनिक जीवन से काफी दूर रहने वाली गीतांजलि इस आंदोलन के दौरान खुलकर सामने आई हैं. वह न केवल अपने पति सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य पर नजर रख रही हैं, बल्कि आंदोलन से जुड़े हर अहम फैसले और अपडेट भी लोगों तक पहुंचा रही हैं. तो लोगों के बीच सवाल ये है कि आखिर सोनम वांगचुक की पत्ति गीताजंलि आंग्मो हैं कौन?
कौन हैं गीतांजलि आंग्मो?
गीतांजलि जे. आंग्मो शिक्षा और सामाजिक विकास के क्षेत्र में लंबे समय से काम कर रही हैं. वह हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव्स, लद्दाख (HIAL) की सह-संस्थापक, मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) और डीन हैं. यह संस्थान लद्दाख जैसे पहाड़ी इलाकों के लिए बेहतर और व्यावहारिक शिक्षा मॉडल तैयार करने का काम करता है. इससे पहले भी वह शिक्षा और सामाजिक विकास से जुड़े कई संस्थानों में काम कर चुकी हैं. उनके योगदान को देखते हुए साल 2022 में नीति आयोग ने उन्हें ‘विमेन ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया अवॉर्ड’ से सम्मानित किया था.
कॉरपोरेट से लद्दाख तक का सफर
गीतांजलि का जन्म ओडिशा के बालासोर में हुआ था. उन्होंने भौतिकी (फिजिक्स) में स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद भुवनेश्वर स्थित जेवियर इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (XIMB) से एमबीए किया. शुरुआती दौर में उन्होंने कॉरपोरेट क्षेत्र में काम किया, लेकिन बाद में उन्होंने सामाजिक विकास और शिक्षा के क्षेत्र को अपना कार्यक्षेत्र बनाया. इसके बाद वह सोनम वांगचुक के साथ जुड़ीं और लद्दाख में एजुकेशन, इनोवेशन और कम्युनिटी डेवलपमेंट से जुड़े कई प्रोजेक्ट्स पर काम किया.
यह भी पढ़ें- कॉकरोच जनता पार्टी कर पाएगी संसद कूच? अस्पताल से सोनम वांगचुक का मार्च को लेकर खास संदेश, जानें कैसी है तैयारी
अस्पताल में डॉक्टरों से क्या कहा?
सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल के दौरान गीतांजलि लगातार उनके साथ खड़ी रहीं. जब वांगचुक की तबीयत बिगड़ी और उन्हें दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया, तब गीतांजलि ने डॉक्टरों और प्रशासन से साफ कहा कि उनके पति की इच्छा और परिवार की सहमति के बिना कोई भी चिकित्सा प्रक्रिया शुरु नहीं की जाए. उन्होंने यह भी साफ किया कि वांगचुक का आंदोलन खत्म नहीं हुआ है और 20 जुलाई को प्रस्तावित कार्यक्रम पहले की तरह ही जारी रहेगा.
आंदोलन के बीच क्यों चर्चा में हैं गीतांजलि?
इस पूरे घटनाक्रम के बाद गीतांजलि आंग्मो पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आई हैं. अब उनकी पहचान सिर्फ सोनम वांगचुक की पत्नी तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि वह एक एजुकेशनिस्ट, सोशल एंटरप्रेन्योर और अपने पति के आंदोलन की अहम सहयोगी के रूप में भी सामने आई हैं. आंदोलन के दौरान जिस तरह उन्होंने स्थिति संभाली और अपनी बात मजबूती से रखी, उससे वह इस पूरे अभियान का एक महत्वपूर्ण चेहरा बन गई हैं.