मिलें एम ए स्‍नेहा से, No Caste, No Religion का सर्ट‍िफ‍िकेट पाने वाली भारत की पहली मह‍िला बनीं

MA Sneha Story: तमिलनाडु की वकील एम ए स्नेहा को मिला भारत का पहला ‘No Caste, No Religion’ सर्टिफिकेट. जानें 9 साल की लंबी कानूनी लड़ाई और इस ऐतिहासिक फैसले की पूरी कहानी.

no caste no relision certificate

स्‍नेह के ल‍िए यह लड़ाई आसान नहीं थी. जानें आख‍िर क्‍यों बनवाया ये सर्ट‍िफिकेट(फोटो क्रेड‍िट- TOI)

जब हम कोई सरकारी फॉर्म, स्कूल एडमिशन या नौकरी का आवेदन भरते हैं, तो जाति और धर्म का कॉलम भरना लगभग तय होता है. लेकिन क्या आप एक ऐसे सरकारी सर्टिफिकेट की कल्पना कर सकते हैं, जिस पर आधिकारिक तौर पर लिखा हो कि आपकी कोई जाति और कोई धर्म नहीं है?

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तमिलनाडु के तिरुपत्तूर की रहने वाली वकील एम ए स्‍नेहा (M A Sneha) ने यह कर दिखाया है. लगभग 9 साल की लंबी कानूनी और प्रशासनिक लड़ाई के बाद, 5 फरवरी 2019 को उन्हें भारत का पहला ऑफ‍िश‍ियल No Caste, No Religion (बिना जाति, बिना धर्म) का प्रमाण पत्र मिला. आइए स्‍नेहा की इस अनोखी और प्रेरणादायक कहानी को जानते हैं.

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बचपन से ही अलग थी परवरिश

स्नेहा के माता-पिता (पी वी आनंदकृष्णन और मणिमोझी) पेशे से वकील थे. उनके घर का माहौल शुरू से ही तर्कवादी, वामपंथी और धर्मनिरपेक्ष विचारों से प्रभावित था. स्‍नेहा और उनकी बहनों के बर्थ सर्टिफिकेट या स्कूल के दाखिला फॉर्म में कभी जाति या धर्म दर्ज नहीं कराया गया.

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स्‍नेहा की बहनों के नाम मुमताज सूर्या और जेनिफर रखे गए. बाद में स्‍नेहा और उनके पति (तमिल प्रोफेसर के पार्थीबराजा) ने अपनी तीनों बेटियों के नाम में भी सभी धर्मों के नाम शामिल किए- आधिरई नसरीन, आधिला आइरीन और आरिफा जेसी.

जब सरकारी कागजी कार्रवाई बनी रुकावट
बचपन में जो पहचान स्‍नेहा के लिए सहज थी, वह बड़े होकर प्रशासनिक व्यवस्था के आगे एक बड़ी चुनौती बन गई. जब स्‍नेहा ने जुडिशल सर्विस एग्जाम और नोटरी पद के लिए अप्लाई किया, तो उनसे कास्ट सर्टिफिकेट (जाति प्रमाण पत्र) मांगा गया. स्‍नेहा ने कॉलम में No Caste, No Religion लिखा, लेकिन अधिकारियों ने सबूत के तौर पर सरकारी सर्टिफिकेट की मांग की.

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स्‍नेहा ने 2010 में पहली बार इस तरह के सर्टिफिकेट के लिए आवेदन दिया. अधिकारियों ने यह कहकर मना कर दिया कि देश में ऐसा कोई नियम या पिछला उदाहरण (Precedent) मौजूद नहीं है.

9 साल की लंबी लड़ाई और सफलता
स्‍नेहा ने सवाल उठाया कि अगर सरकार किसी व्यक्ति को उसकी जाति बताने का सर्टिफिकेट दे सकती है, तो यह प्रमाणित करने का सर्टिफिकेट क्यों नहीं दे सकती कि उसकी कोई जाति नहीं है?

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लगातार प्रयासों और उसी प्रशासनिक प्रक्रिया का पालन करने के बाद, जिससे कम्युनिटी सर्टिफिकेट जारी होते हैं, आखिरकार 5 फरवरी 2019 को तिरुपत्तूर के तहसीलदार टी एस सत्यमूर्ति ने उन्हें यह ऐतिहासिक प्रमाण पत्र जारी किया.

क्या स्नेहा आरक्षण के खिलाफ हैं?
इस फैसले के बाद स्‍नेहा को देश भर से हजारों लोगों के फोन आए जो जानना चाहते थे कि वे ऐसा सर्टिफिकेट कैसे बनवा सकते हैं.

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स्‍नेहा ने मीडिया को स्पष्ट किया कि उनका यह कदम किसी विशेष लाभ के लिए नहीं था और न ही वे आरक्षण (Reservation) के खिलाफ हैं. वे वंचित और पिछड़े वर्गों के लिए मिलने वाले आरक्षण का पूरा समर्थन करती हैं. वे बस अपनी उस असल पहचान का आधिकारिक दस्तावेज चाहती थीं, जैसा जीवन उन्होंने हमेशा जिया है.

क्‍या है No Caste, No Religion सर्ट‍िफ‍िकेट?
No Caste, No Religion प्रमाण पत्र एक ऐसा आधिकारिक और कानूनी दस्तावेज है, जो यह प्रमाणित करता है कि उसे धारण करने वाला व्यक्ति किसी भी जाति या धर्म से संबद्ध नहीं है.

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आमतौर पर भारत में नागरिकों के जन्म प्रमाण पत्र, स्कूल टीसी (TC) या सरकारी दस्तावेजों में जाति और धर्म का उल्लेख किया जाता है. हालांकि, भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 (Article 25) के तहत हर व्यक्ति को अपने विवेक के अनुसार किसी भी धर्म को मानने, न मानने या खुद को किसी भी धर्म/जाति से अलग रखने का मौलिक अधिकार प्राप्त है. यह सर्टिफिकेट उसी अधिकार की कानूनी पुष्टि करता है.

इस सर्टिफिकेट के क्‍या फायदे हैं
आधिकारिक पहचान (Official Validation):
यह प्रमाण पत्र ऐसे लोगों को एक कानूनी आधार देता है जो खुद को नास्तिक (Atheist), तर्कवादी (Rationalist) या धर्मनिरपेक्ष मानते हैं. अब उन्हें सरकारी फॉर्म में मजबूरीवश कोई धर्म या जाति नहीं चुननी पड़ती.

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जाति-मुक्त और धर्मनिरपेक्ष जीवन की स्वतंत्रता:
यह दस्तावेज व्यक्ति को समाज में बिना किसी धार्मिक या जातीय टैग के जीने की स्वतंत्रता और मान्यता देता है.

कागजी कार्रवाई और फॉर्म भरने में स्पष्टता:
सरकारी या निजी फॉर्म भरते समय जब Caste या Religion का कॉलम आता है, तो इस सर्टिफिकेट के आधार पर वहां None या Nil दर्ज कराने का कानूनी अधिकार मिल जाता है.

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आने वाली पीढ़ियों के लिए विकल्प:
जो अभिभावक अपने बच्चों को बिना किसी जातीय या धार्मिक पहचान के बड़ा करना चाहते हैं, वे इस सर्टिफिकेट के जरिए बच्चों के स्कूल और सरकारी रिकॉर्ड में इसे लागू करवा सकते हैं.

होंगे ये नुकसान भी
इस बात पर ध्‍यान दें क‍ि अगर कोई व्यक्ति No Caste, No Religion का प्रमाण पत्र लेता है, तो वह जाति आधारित सरकारी आरक्षण (Reservation), छात्रवृत्ति (Scholarship) या अन्य विशेष लाभों का दावा नहीं कर सकता. यह सर्टिफिकेट किसी पर जबरन लागू नहीं होता, बल्कि यह केवल उन लोगों के लिए है जो अपनी इच्छा से अपनी जातीय और धार्मिक पहचान छोड़ना चाहते हैं.

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लेख समाप्त

लेखक के बारे में

Vandana Bharti

Vandana Bharti

वन्‍दना भारती News 24 में बतौर ड‍िप्‍टी न्‍यूज एडिटर कार्यरत हैं और मौजूदा समय में बिजनेस डेस्‍क संभाल रही हैं. वन्दना News 24 के लिए स्टॉक मार्केट, पर्सनल फाइनेंस, कमोडिटी मार्केट, सरकारी योजनाओं पर खबरें लिखती हैं. वन्‍दना ने अपने करियर की शुरुआत दैन‍िक जागरण अखबार से की. इसके बाद देशबंधु अखबार में उन्होंने ब‍िजनेस रिपोर्टिंग में अपनी विशेषज्ञता विकसित की. साल 2010 में उन्होंने ह‍िन्‍दुस्‍तान अखबार में अपनी सेवाएं दीं, जहां उन्होंने ब‍िजनेस पेज के लिए 6 साल तक काम किया. वन्‍दना, आजतक डिजिटल, India.com और News18.com जैसे न्यूज प्लेटफॉर्म्स में बिजनेस डेस्क से जुड़ी रही हैं. वन्दना ने दिल्ली विश्वविद्यालय से बीकॉम किया है. कॉमर्स बैकग्राउंड होने के कारण उनकी बिजनेस की खबरों में अच्छी पकड़ है और इन खबरों को वह आसान भाषा में यूजर्स तक पहुंचाती हैं. कितने साल का अनुभव: 18 साल योग्यता: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बी.कॉम और नई द‍िल्‍ली के YMCA संस्‍थान से पत्रकार‍िता में पीजीडीएमए की डिग्री प्राप्त की है.
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