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BRICS में नए देश की एंट्री कैसे होती है? जानिए सदस्यता के नियम और पूरी प्रक्रिया

BRICS का दायरा पिछले कुछ सालों में तेजी से बढ़ा है. कभी पांच देशों का समूह रहा यह संगठन अब 11 पूर्ण सदस्यों तक पहुंच चुका है. बता दें कि भारत 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने जा रहा है. ऐसे में यह सवाल भी महत्वपूर्ण है कि आखिर किसी नए देश को इस समूह में शामिल होने का मौका कैसे मिलता है और इसके लिए क्या नियम तय किए गए हैं.

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भारत 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने जा रहा है. उभरती अर्थव्यवस्थाओं वाले देशों के इस समूह का वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक प्रभाव पिछले कुछ सालों में लगातार मजबूत हुआ है. यही वजह है कि दुनिया के कई देश अब BRICS से जुड़ने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं.

बता दें कि BRICS में किसी देश को सदस्य बनाने का फैसला मौजूदा पूर्ण सदस्यों के बीच चर्चा और आपसी सहमति के आधार पर किया जाता है. यानी किसी भी इच्छुक देश के लिए केवल सदस्य बनने की इच्छा जताना काफी नहीं है. उसकी उम्मीदवारी पर समूह के मौजूदा सदस्य देशों की राजनीतिक सहमति जरूरी होती है. तो चलिए जानते हैं कि कैसे BRICS में किसी देश को जोड़ा जाता है और इसकी पूरी प्रक्रिया क्या होती है.

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BRICS कोई ऐसी संस्था नहीं है जिसकी सदस्यता के लिए संयुक्त राष्ट्र की तरह कोई एक औपचारिक आवेदन प्रक्रिया या कठोर संविधान हो. किसी नए देश को शामिल करने का फैसला मुख्य रूप से मौजूदा सदस्यों की आपसी सहमति और राजनीतिक समझ पर निर्भर करता है. यानी सदस्यता का सबसे अहम आधार सर्वसम्मति (Consensus) है.

क्या है सदस्यता की प्रक्रिया?

अगर कोई देश BRICS में शामिल होना चाहता है तो उसे अपनी इच्छा समूह के सदस्य देशों के सामने रखनी होती है. इसके बाद उसकी उम्मीदवारी पर सदस्य देशों के बीच बातचीत और कूटनीतिक विचार-विमर्श होता है. यहां सबसे महत्वपूर्ण शर्त यह है कि सभी मौजूदा सदस्य देश उम्मीदवार के पक्ष में हों.

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यानी अगर समूह के 10 देश किसी देश को सदस्य बनाने के समर्थन में हैं, लेकिन एक सदस्य भी आपत्ति करता है, तो उसकी पूर्ण सदस्यता आगे नहीं बढ़ सकती. यही सर्वसम्मति का सिद्धांत BRICS की विस्तार प्रक्रिया को दूसरे कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों से अलग बनाता है.

पांच से 11 देशों तक पहुंचा समूह

BRICS की शुरुआत ब्राजील, रूस, भारत और चीन के साथ हुई थी. दक्षिण अफ्रीका के शामिल होने के बाद इसका नाम BRICS हुआ. इसके बाद समूह का विस्तार हुआ और मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात को शामिल किया गया. इंडोनेशिया के पूर्ण सदस्य बनने के बाद सदस्यों की संख्या 11 हो गई.

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क्या है पार्टनर देश का नया मॉडल?

BRICS ने पूर्ण सदस्यता के अलावा पार्टनर कंट्री का मॉडल भी अपनाया है. 2024 में कजान शिखर सम्मेलन के दौरान इस व्यवस्था को आगे बढ़ाया गया. इसके तहत ऐसे इच्छुक देशों को समूह से जोड़ा जा सकता है जिन्हें तत्काल पूर्ण सदस्यता नहीं मिली है. पार्टनर देशों को BRICS की कुछ बैठकों और चर्चाओं में भाग लेने का अवसर मिलता है. साथ ही उन्हें सदस्य देशों के साथ व्यापार, निवेश और आर्थिक सहयोग बढ़ाने का भी मौका दिया जाता है. हालांकि पूर्ण सदस्य देशों की तरह उन्हें संगठन के सभी नीतिगत फैसलों में समान अधिकार हासिल नहीं होते हैं.

फुल मेंबर और पार्टनर कंट्री में क्या है अंतर?

किसी संगठन के पूर्ण सदस्य और पार्टनर देश की भूमिका और अधिकार एक जैसे नहीं होते हैं. पूर्ण सदस्य देशों को संगठन के अहम फैसलों में भाग लेने, नीतियां तय करने और नए एजेंडे पर निर्णय लेने का अधिकार मिलता है. इसके साथ ही उन्हें संगठन से जुड़ी प्रमुख संस्थाओं और पहलों में नेतृत्व की भूमिका भी मिल सकती है. वहीं, पार्टनर देशों की भागीदारी सीमित होती है. उन्हें कुछ खास बैठकों, चर्चाओं और कार्यक्रमों में शामिल होने का अवसर मिलता है, लेकिन संगठन की नीतियां तय करने में उनकी भूमिका पूर्ण सदस्यों जैसी नहीं होती. साथ ही, उन पर संगठन के राजनीतिक फैसलों या एजेंडे को उसी तरह लागू करने की बाध्यता भी नहीं होती.

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हालांकि, पार्टनर देश आर्थिक मोर्चे पर सदस्य देशों के साथ अपने रिश्ते मजबूत कर सकते हैं. उन्हें व्यापार, निवेश, वित्तीय सहयोग और साझा आर्थिक परियोजनाओं में भागीदारी के भी मौके मिलते हैं.

ब्रिक्स में शामिल हैं ये पार्टनर देश?

ब्रिक्स के साथ इस समय कुल 10 देश पार्टनर कंट्री के तौर पर जुड़े हुए हैं. इनमें बेलारूस, बोलीविया, क्यूबा, कजाकिस्तान, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम शामिल हैं. इन देशों को ब्रिक्स की गतिविधियों और कुछ बैठकों में भाग लेने का अवसर मिलता है.

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BRICS के अलावा भारत और किन-किन संगठनों के साथ जुड़ा हुआ है?

भारत BRICS के अलावा G20, SCO, BIMSTEC, SAARC, QUAD, IBSA, IORA, ASEAN और East Asia Summit और अन्य कई संगठनों के साथ जुड़ा हुआ है.

G20: BRICS के अलावा भारत G20 का भी महत्वपूर्ण सदस्य है. G20 दुनिया की प्रमुख विकसित और उभरती अर्थव्यवस्थाओं का मंच है, जहां वैश्विक आर्थिक विकास, व्यापार, वित्तीय स्थिरता, जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा और सतत विकास जैसे मुद्दों पर चर्चा होती है. भारत ने 2023 में G20 की अध्यक्षता की थी और नई दिल्ली में आयोजित शिखर सम्मेलन में अफ्रीकी संघ को G20 के स्थायी सदस्य के रूप में शामिल कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

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SCO यानी शंघाई सहयोग संगठन: भारत Shanghai Cooperation Organisation (SCO) का पूर्ण सदस्य है. यह संगठन मुख्य रूप से क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद से मुकाबला, आर्थिक सहयोग और सदस्य देशों के बीच राजनीतिक एवं रणनीतिक संवाद पर फोकस्ड है. भारत 2017 में SCO का पूर्ण सदस्य बना था. इस संगठन के जरिए भारत को चीन, रूस और मध्य एशियाई देशों के साथ एक ही बहुपक्षीय मंच पर संवाद करने का अवसर मिलता है. खास तौर पर मध्य एशिया में कनेक्टिविटी, ऊर्जा, सुरक्षा और आतंकवाद से जुड़े मुद्दों पर SCO भारत के लिए महत्वपूर्ण मंच है.

BIMSTEC: भारत BIMSTEC (Bay of Bengal Initiative for Multi-Sectoral Technical and Economic Cooperation) का भी सदस्य है. इसमें बंगाल की खाड़ी और आस-पास के क्षेत्र के सात देश शामिल हैं. यह संगठन व्यापार, निवेश, कनेक्टिविटी, ऊर्जा, सुरक्षा, तकनीक और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर काम करता है. भारत के लिए BIMSTEC इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच संपर्क मजबूत करने का माध्यम है.

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SAARC: भारत SAARC यानी दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन का संस्थापक सदस्य है. इसमें दक्षिण एशिया के देश शामिल हैं और इसका उद्देश्य क्षेत्रीय आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक सहयोग को बढ़ावा देना है. भारत भौगोलिक और आर्थिक दृष्टि से SAARC का सबसे बड़ा सदस्य है. हालांकि पिछले कुछ सालो में भारत-पाकिस्तान संबंधों में तनाव के कारण संगठन की गतिविधियां प्रभावित हुई हैं.

QUAD: भारत QUAD (Quadrilateral Security Dialogue) का भी हिस्सा है. इसमें भारत के साथ अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं. यह कोई पारंपरिक सैन्य गठबंधन नहीं है, बल्कि चार देशों के बीच रणनीतिक और बहुआयामी सहयोग (Strategic and multifaceted cooperation) का मंच है. QUAD में हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा, समुद्री सहयोग, महत्वपूर्ण एवं उभरती तकनीक, साइबर सुरक्षा, आपदा राहत और आपूर्ति श्रृंखला जैसे मुद्दों पर काम किया जाता है. भारत के लिए यह समूह हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अपनी रणनीतिक भूमिका मजबूत करने का महत्वपूर्ण माध्यम है.

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IBSA: भारत IBSA Dialogue Forum का भी सदस्य है. IBSA का गठन भारत, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका ने मिलकर किया है. यह तीन बड़े लोकतांत्रिक विकासशील देशों के बीच सहयोग का मंच है. इसके तहत गरीबी और भुखमरी उन्मूलन, विकास, दक्षिण-दक्षिण सहयोग और बहुपक्षीय संस्थानों में विकासशील देशों की आवाज मजबूत करने जैसे मुद्दों पर काम किया जाता है. तीनों देशों के बीच सहयोग के लिए IBSA Fund भी चलाया जाता है, जिसके जरिए विकासशील देशों में विभिन्न परियोजनाओं का समर्थन किया जाता है.

IORA: भारत Indian Ocean Rim Association (IORA) का भी सदस्य है. हिंद महासागर क्षेत्र भारत की भौगोलिक और रणनीतिक स्थिति के कारण उसके लिए बेहद महत्वपूर्ण है. IORA के माध्यम से भारत समुद्री सुरक्षा, व्यापार, निवेश, ब्लू इकोनॉमी, मत्स्य पालन, आपदा प्रबंधन और समुद्री संपर्क जैसे क्षेत्रों में अन्य हिंद महासागर देशों के साथ सहयोग करता है. यह मंच भारत की ‘इंडो-पैसिफिक’ और समुद्री कूटनीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जाता है.

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ASEAN और East Asia Summit: भारत ASEAN (Association of Southeast Asian Nations) के साथ भी जुड़ा हुआ है. भारत ASEAN का सदस्य नहीं है, बल्कि उसका रणनीतिक साझेदार है. भारत की ‘Act East Policy’ में ASEAN की महत्वपूर्ण भूमिका है. व्यापार, निवेश, कनेक्टिविटी, डिजिटल तकनीक, समुद्री सुरक्षा और सांस्कृतिक संबंधों के अलावा भारत East Asia Summit में भी सक्रिय रूप से भाग लेता है. इसके जरिए भारत दक्षिण-पूर्व और पूर्वी एशिया के देशों के साथ व्यापक रणनीतिक संवाद करता है.

इसके अलावा भारत संयुक्त राष्ट्र (UN), विश्व व्यापार संगठन (WTO), अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF), विश्व बैंक, एशियाई विकास बैंक (ADB) और Asian Infrastructure Investment Bank (AIIB) जैसे वैश्विक संस्थानों का भी सदस्य है. भारत International Solar Alliance (ISA) और Coalition for Disaster Resilient Infrastructure (CDRI) जैसी पहलों में भी अपनी अहम भूमिका निभाता है.

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First published on: Sep 07, 2026 11:06 AM

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